शक्ति मिल बलात्कार अभियुक्त के पुराने जुर्म

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मुंबई की शक्ति मिल में एक महिला पत्रकार के साथ सामूहिक बलात्कार मामले में सरकारी पक्ष ने सोमवार को तीनों अभियुक्तों पर दो नए आरोप लगाए गए हैं. इन आरोप के साबित होने पर उन्हें उम्रकैद या फांसी की सज़ा भी हो सकती है.

विशेष सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने बीबीसी को बताया, "इस मामले के यही तीन अभियुक्त पहले ही टेलीफोन ऑपरेटर मामले में दोषी करार दिए जा चुके हैं और उन्हें आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है."

महिला पत्रकार बलात्कार मामले में कुल पाँच अभियुक्त हैं. जिनमें एक नाबालिग़ है. नाबालिग़ अभिुयक्त पर अलग से मुक़दमा चल रहा है.

इन चारों अभियुक्तों को मंगलवार को सज़ा सुनाई जा सकती है.

अब त़ाजा मामले में सुनवाई के दौरान अन्य आरोपों के साथ यह आरोप भी लगेगा कि वे "आदतन अपराधी" हैं.

टेलीफ़ोन ऑपरेटर के बलात्कार का मामला 31 जुलाई 2013 को हुआ था, जबकि महिला पत्रकार के साथ सामूहिक बलात्कार 22 अगस्त 2013 को हुआ.

तीन आरोपी क़ासिम बंगाली, अशफाक शेख और विजय जाधव शामिल दोनों ही मामलों में शामिल थे.

कड़ी सज़ा की मांग

उज्ज्वल निकम ने बताया, "पिछली सुनवाई के बाद जब ये अभियुक्त दोषी क़रार दिए गए, तब हमने इन पर नए आरोप लगाने की अदालत से दरख़्वास्त की थी. यह दरख़्वास्त अदालत ने आज मान ली और भारतीय दंड विधान की धारा 376 (ई) के तहत तीन नए मामले दर्ज किए."

उन्होंने बताया कि ये महाराष्ट्र में अपनी तरह का पहला ऐसा मामला है जिसमें इतने कम समय में अभियुक्तों को सज़ा मिली है.

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उज्ज्वल निकम ने बीबीसी ने बताया, "इन तीनों आरोपियों को अब आदतन अपराधी मानते हुए सुनवाई की जाएगी. इस क़ानून के नए प्रावधानों के अनुसार अभियुक्तों को उम्रकैद या फांसी के सजा भी हो सकती है."

सोमवार को सुनवाई के दौरान अदालत वकीलों और अन्य लोगों से भरी थी. सुबह 11 बजे सुनवाई शुरू हुई. बचाव पक्ष के वकील ने महाराष्ट्र के गृहमंत्री आरआर पाटिल के अदालत में मौजूद रहने पर आपत्ति जताई थी. लेकिन अदालत ने उसे नज़रअंदाज कर दिया.

इसके बाद सरकारी वकील उज्ज्वल निकम ने अपनी दलील शुरू की और तीन अभियुक्तों पर धारा 376 (ई) और सीआरपीसी की धारा 211 के तहत आरोप लगाने की मांग की.

उज्ज्वल निकम ने कहा, "ये तीनों अभियुक्त सामूहिक बलात्कार के एक मामले में दोषी करार दिए जा चुके है, ऐसे में ये बात उन्हें आदतन अपराधी बनाती हैं और उन पर इन धाराओं के तहत आरोप लगाने चाहिए."

बचाव पक्ष के वकील ने इसका विरोध करते हुए कहा कि सुनवाई के दौरान यह मांग उचित नहीं है, लेकिन अदालत ने बचाव पक्ष की दलील को नज़रअंदाज करते हुए तीनों अभियुक्तों पर आरोप तय किए, हालांकि अभियुक्तों ने उन आरोपों से इनकार किया है.

इसके बाद अदालत की कार्रवाई मंगलवार तक के लिए स्थगित कर दी गई. अभियुक्तों को मंगलवार सजा सुनाई जा सकती है.

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