मोदी सरकार के नहले पर केजरीवाल का दहला

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आम आदमी पार्टी के राष्ट्रीय संयोजक अरविंद केजरीवाल के तीखे सवालों पर चुप्पी तोड़ते हुए नरेंद्र मोदी सरकार ने उनकी तरफ़ से पूछे गए सवालों के जवाब दिए हैं.

अरविंद केजरीवाल ने अपने गुजरात दौरे के दौरान नरेंद्र मोदी से 16 सवाल पूछे थे.

अपनी वाराणसी जनसभा में भी केजरीवाल ने उन्हीं मुद्दों को लेकर मोदी के विकास के दावों को झूठा बताया था.

अब तक इन सवालों पर चुप्पी साधे रही गुजरात सरकार ने एक बयान जारी कर केजरीवाल के सवालों को बेबुनियाद बताया है.

मंगलवार को देर रात नरेंद्र मोदी के कार्यालय से 16 पन्नों का जवाब जारी किया गया.

गुजरात सरकार ने अरविंद केजरीवाल के आरोपों का सिलसिलेवार जवाब दिया है. गुजरात सरकार ने कहा है कि केजरीवाल बेबुनियाद और तथ्यों से परे आरोप लगा रहे हैं.

मोदी सरकार के जवाब

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केजरीवाल नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते रहे हैं कि उनकी सरकार किसानों की ज़मीन छीनकर उद्योगपतियों को देती रही है. इस पर कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी गुजरात की भूमि अधिग्रहण नीति की प्रशंसा की है.

प्रवक्ता ने कहा है कि गुजरात में किसानों को बाज़ार मूल्य पर भुगतान किया जाता है और बिना किसानों की सहमति के भूमि अधिग्रहण नहीं होता.

बयान में यह भी कहा गया कि अन्य राज्यों की तरह गुजरात में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन नहीं हुए हैं.

गैस कीमतों पर गुजरात सरकार ने स्पष्ट किया है कि इस मुद्दे पर बीजेपी की राय शुरू से साफ रही है. यशवंत सिन्हा की अध्यक्षता वाली स्टैंडिग कमेटी ने अप्रैल, 2014 से गैस कीमतें बढ़ाने के फैसले पर दोबारा विचार करने को कहा था.

गुजरात के ऊर्जा मंत्री सौरभ पटेल ने गैस कीमतें बढ़ाने का विरोध किया था. बयान में कहा गया है कि दरअसल ऐसे आरोप लगाकर केजरीवाल अधिक दामों पर बहुराष्ट्रीय कंपनियों से गैस आयात की वकालत कर रहे हैं, इसीलिए उन पर अमेरिका का एजेंट होने का आरोप लगाया जाता है. रिलायंस का सिर्फ 10 फीसदी हिस्सा है, जबकि सरकारी कंपनी ओएनजीसी का 80 फीसदी.

किसानों की आत्महत्या

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गुजरात में किसानों की आत्महत्या की बात को भी झूठा करार देते हुए कहा गया है कि यहां पिछले 10 साल में सिर्फ़ एक किसान ने आत्महत्या की है और वह भी फसल ख़राब होने से.

केजरीवाल यह आरोप लगाते रहे हैं कि नरेंद्र मोदी सरकार ने अडानी उद्योग समूह को फायदा पहुंचाया। इस पर बयान में कहा गया है कि मोदी की अगुवाई में गुजरात में सभी उद्योग-धंधे फले-फूले हैं। सिर्फ अडानी ही नहीं, सभी उद्योगों को फायदा मिला। अडानी का सिर्फ गुजरात ही नहीं, अन्य राज्यों में भी निवेश है। अडानी समूह का गुजरात में कुल निवेश का सिर्फ 35 फीसदी है। जहां तक भूमि अधिग्रहण नीति का सवाल है, गुजरात की भूमि अधिग्रहण नीति की सुप्रीम कोर्ट ने भी तारीफ की है।

एफ़डीआई मुद्दे पर कहा गया है कि भाजपा रिटेल में एफ़डीआई के ख़िलाफ़ है. बयान में दावा किया गया है कि गुजरात में 5.19 लाख उद्योगों में से 95 फ़ीसदी कार्यरत हैं.

लेकिन केजरीवाल ने गुजरात सरकार के बयान का जवाब देने में थोड़ी भी देर नहीं की.

उन्होंने बुधवार को मीडिया में वह चिट्ठी सार्वजनिक की, जिसे गुजरात के मुख्यमंत्री नरेंद्री मोदी ने गैस की क़ीमतें बढ़ाने को लेकर केंद्र सरकार को भेजी थी.

संवाददाताओं से बातचीत में मंगलवार को उन्होंने राष्ट्रीय अपराध अनुसंधान केंद्र की रिपोर्टों का हवाला देते हुए कहा कि गुजरात में अबतक पाँच हज़ार से अधिक किसान आत्महत्या कर चुके हैं.

केजरीवाल के सवाल

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क्या नरेंद्र मोदी सरकार में आने के बाद रिलायंस से खरीदी जाने वाली गैस की क़ीमत आठ डॉलर से बढ़ाकर 16 डॉलर कर देंगे?

नरेंद्र मोदी अपनी हवाई यात्राओं के लिए जिन हेलीकॉप्टरों का इस्तेमाल करते हैं, वो किसके हैं और इसके लिए क्या किसी तरह का भुगतान किया जाता है?

गुजरात सरकार बिना किसी टेंडर के सौर ऊर्जा कंपनियों से महंगी बिजली क्यों ख़रीद रही है?

गुजरात में कृषि उत्पाद घटा है, ऐसे में राज्य सरकार 11 प्रतिशत की विकास दर का दावा कैसे कर रही है?

गुजरात में 10 साल में दो-तिहाई छोटे और मझोले उद्योग बंद हो गए हैं. क्या सरकार की नीति सिर्फ बड़े उद्योगों को बढ़ावा देने की है?

सरकारी विभागों में भारी भ्रष्टाचार क्यों है?

राज्य सरकार ने अपने प्राकृतिक संसाधनों को अंबानी को क्यों सौंप दिया है?

राज्य में बेरोज़गारी बहुत अधिक बढ़ी है. नौजवानों को ठेके पर नौकरी देकर उनका शोषण किया जा रहा है.

सरकारी स्कूलों की हालत बहुत खराब है.

मोदी सरकार के जवाब

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केजरीवाल नरेंद्र मोदी पर आरोप लगाते रहे हैं कि उनकी सरकार किसानों की ज़मीन छीनकर उद्योगपतियों को देती रही है. इस पर कहा गया है कि सुप्रीम कोर्ट ने भी गुजरात की भूमि अधिग्रहण नीति की प्रशंसा की है.

प्रवक्ता ने कहा है कि गुजरात में किसानों को बाज़ार मूल्य पर भुगतान किया जाता है और बिना किसानों की सहमति के भूमि अधिग्रहण नहीं होता.

बयान में यह भी कहा गया कि अन्य राज्यों की तरह गुजरात में भूमि अधिग्रहण के खिलाफ आंदोलन नहीं हुए हैं.

गुजरात में किसानों की आत्महत्या की बात को भी झूठा करार देते हुए कहा गया है कि यहां पिछले 10 साल में सिर्फ़ एक किसान ने आत्महत्या की है और वह भी फसल ख़राब होने से.

एफ़डीआई मुद्दे पर कहा गया है कि भाजपा रिटेल में एफ़डीआई के ख़िलाफ़ है.

बयान में दावा किया गया है कि गुजरात में 5.19 लाख उद्योगों में से 95 फ़ीसदी कार्यरत हैं.

खुली चुनौती

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इससे पहले मंगलवार को अरविंद केजरीवाल ने भाजपा की ओर से प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को खुली चुनौती दी थी.

उन्होंने कहा था कि वो बनारस के बेनिया बाग़ आकर उनसे सीधी बहस करें और अगर वह ऐसा नहीं करते तो 'हम मानेंगे कि दाल में कुछ काला है.'

केजरीवाल ने इसी मैदान में एक जनसभा के दौरान मोदी के ख़िलाफ चुनाव लड़ने की घोषणा की थी.

दिल्ली के मुख्यमंत्री का पद छोड़ने के बाद भगोड़ा कहे जाने पर केजरीवाल ने कहा कि भाजपा तो राजा हरिश्चंद्र को भी भगोड़ा कहती.

इससे पहले केजरीवाल ने बंगलौर में एक रैली के दौरान कहा था कि उनकी पार्टी चाहती है कि वो नरेंद्र मोदी के ख़िलाफ़ वाराणसी से चुनाव लड़ें.

उन्होंने कहा था कि वो वाराणसी में जनसभा करके जनता की राय लेंगे कि वह वाराणसी से लोकसभा चुनाव लड़ें या नहीं.

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