भाजपा क्या कांग्रेस की परछाईं बन गई है: जसवंत

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लोकसभा चुनाव का टिकट न मिलने से नाराज़ भाजपा के वरिष्ठ नेता और पूर्व केंद्रीय मंत्री जसवंत सिंह राजस्थान के बाड़मेर से निर्दलीय उम्मीदवार के रूप में चुनाव लड़ रहे हैं.

उनके इस क़दम को पार्टी विरोधी मानते हुए भाजपा ने उन्हें छह साल के लिए पार्टी से बाहर कर दिया है. पार्टी के इस क़दम पर जसवंत सिंह की राय जानी बीबीसी संवाददाता सुशीला सिंह ने.

जसवंत सिंह भाजपा से निष्कासित

भाजपा ने आपको निष्कासित करने का फ़ैसला लिया है, क्या आपको इसका अंदाज़ा था?

जी, मैंने जो क़दम उठाया था, उसके क्या परिणाम निकलेंगे, उससे मैं परिचित हूं. क्योंकि पार्टी के पास और उपाय ही क्या बचा था. उन्होंने जानबूझकर मेरे चुनाव क्षेत्र में एक ऐसे व्यक्ति को उतार दिया, जो पिछले 20 साल से कांग्रेस में थे. और हर चुनाव कांग्रेस के टिकट पर लड़ा और 20 साल तक वह मुझे कोसते रहे.

अभी पिछले दिनों हुए विधानसभा चुनाव उन्होंने भारतीय जनता पार्टी के ख़िलाफ़ लड़ा था, जिसमें उन्हें हार का सामना करना पड़ा था. लोकसभा चुनाव वह मेरे पुत्र से हार चुके हैं. कांग्रेस के इस व्यक्ति को भारतीय जनता पार्टी का उम्मीदवार बनाना मेरा मज़ाक बनाना था.

यह सोचने की बात है कि पार्टी क्या कांग्रेस की परछाईं बनकर रह गई है. कांग्रेस के लोगों के बिना हम यहां चल भी नहीं सकते हैं. इसलिए मुझे लगता है कि यह मेरे और लाखों लोगों के विश्वास का मखौल उड़ाया गया है.

आपको दरकिनार कर कांग्रेस से आए व्यक्ति क्यों टिकट दिया गया?

मैं समझ नहीं पा रहा हूँ कि पार्टी अध्यक्ष राजनाथ सिंह और राजस्थान की मुख्यमंत्री अगर मेरे साथ बैठकर मुझे समझाते, तो शायद मैं समझ पाता कि मेरे अंदर क्या अवगुण है कि उन्होंने मेरी जगह कांग्रेस के उस व्यक्ति को टिकट दिया जो पार्टी में शामिल होने के दिन तक भाजपा को कोस रहा था. उस व्यक्ति में क्या गुण देखा कि उनका चयन कर लिया.

आप कह रहे हैं कि भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने मुख्यमंत्री वसुंधरा राजे के साथ मिलकर आपको हटाने का फ़ैसला लिया होगा. उन्होंने ऐसा फ़ैसला क्यों लिया होगा?

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मुझे नहीं मालूम. वो मेरे साथ बैठकर चर्चा कर सकते थे. वो कहते हैं कि कुछ राजनीतिक कारण थे. मैं भी 40 साल से राजनीति कर रहा हूँ. ऐसे क्या राजनीतिक कारण थे कि जिन पर वो मेरे साथ बैठकर चर्चा भी नहीं कर सकते थे.

आपने पार्टी को इतना समय दिया है. दिग्गज नेता रहे हैं. एनडीए के शासन में रक्षा और वित्त मंत्री रहे हैं. क्या आपको लगता है कि पार्टी में अब वरिष्ठ लोगों को उतना सम्मान नहीं मिल रहा, जितना मिलना चाहिए?

कितना सम्मान मिलना चाहिए और कितना देना चाहिए था, मैं इस व्यर्थ के विवाद में नहीं पड़ना चाहता. इस पर तो वो लोग विचार करें, जो अपने आपको भाजपा कहते हैं.

क्या आपको लगता है कि लोकसभा चुनाव में जीत हासिल करने के लिए पार्टी इस तरह के क़दम उठा रही है.

जीत के लिए हर क़दम पर शॉर्टकट लेना क्या ठीक है. यहां साधन और साध्य का सवाल उठता है. हम शुद्ध राजनीति के लिए सब कुछ करते हैं. कांग्रेस को हटाने के लिए सभी अशुद्ध बातें करें, यह कहाँ तक हमारे साधन और साध्य का मेल है.

शायद पार्टी को यह उम्मीद रही हो कि वह जिसे टिकट दे रही है, उसमें जीतने की क्षमता आपसे अधिक है. इसलिए उसे टिकट दिया हो?

मैंने ऐसा नहीं मानता. आप इस क्षेत्र से परिचित नहीं हैं और न राजनाथ सिंह परिचित हैं. वो यहाँ कांग्रेस के प्रत्याशी को लाकर जीतना चाहते हैं. इसलिए मुझे दरकिनार कर रहे हैं. मुझे नहीं लगता कि यह सही है. इसमें जीत नहीं है, इसमें भारतीय जनता पार्टी का नेतृत्व कहने वाले लोगों की नैतिक हार है.

आप दार्जीलिंग से चुनाव क्यों नहीं लड़े?

मेरा पांच साल का कार्यकाल पूरा हो चुका था. गोरखे मुझसे बहुत अधिक संतुष्ट थे. वह जगह मेरे घर से बहुत दूर पड़ता है. मेरा घर भारत के पश्चिमी छोर पर है और दार्जीलिंग पूर्वी छोर पर है.

लेकिन आप तो वहाँ से लड़े थे और चुनाव जीते भी थे?

इसका मतलब यह नहीं कि मैं अपना पूरा जीवना वहाँ बिताऊँ. घर तो लौटना ही है. मैंने लालकृष्ण आडवाणी, राजनाथ सिंह और अन्य लोगों से कह दिया था कि मेरे लिए दार्जीलिंग में जो हासिल करना था, वह हो चुका है. यह मेरा आख़िरी चुनाव है. इसलिए मैं अपने घर से लड़ना चाहूँगा.

कठिन से कठिन चुनाव में ईश्वर कृपा से जीतता रहा. पार्टी ने चुनौती वाली जगहों पर मुझे भेजा, दार्जीलिंग भी वैसी ही सीट थी.

पश्चिम बंगाल में भारतीय जनता पार्टी ने एक सीट जीती थी और वो सीट है दार्जीलिंग. मेरा कार्यकाल वहाँ पूरा हो चुका था.

मैंने पार्टी ने निवेदन किया था कि अंतिम चुनाव के लिए मुझे घर जाने दिया जाए. लेकिन मेरे घर जाने में भी उन्हें कठिनाई है. अड़चनें पैदा की जा रही हैं. क्यों, यह मुझे समझ में नहीं आ रहा है.

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