'सस्ते क़र्ज़ के लिए करना होगा इंतज़ार'

In the first bi-monthly monetary policy statement for 2014-15, RBI Governor Raghuram Rajan decided to pause and not disturb status quo. The repo rate, the central’s bank main policy rate and the rate at which it lends money to banks, remained at 8 per cent. Other policy instruments such as cash reserve ratio also remain unchanged at 4%.  The RBI has decided to increase the liquidity provided under 7-day and 14-day term repos from 0.5 per cent of Net demand and term liabilities (NDTL) of the banking system to 0.75 per cent, and decrease the liquidity provided under overnight repos under the LAF from 0.5 per cent of bank-wise NDTL to 0.25 per cent with immediate effect.  The central bank has pegged growth for 2014-15 at 5.5 per cent against 5.6 per cent earlier  The RBI expects current account deficit to come down to 2 per cent of GDP in 2013-14.  Stating that headline inflation may bottom out in October-December, the RBI said it will continue to monitor and actively manage liquidity conditions. It said policy stance will be firmly focused on disinflation path. इमेज कॉपीरइट AFP

भारतीय रिज़र्व बैंक (आरबीआई) ने चालू वित्त वर्ष की अपनी पहली द्विमासिक मौद्रिक नीति में प्रमुख नीतिगत दरों में किसी तरह का बदलाव नहीं किया है.

इसका सीधा मतलब यह है कि बैंकों से लिए जाने वाले क़र्ज़ की ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं होता और आम आदमी को सस्ते क़र्ज़ के लिए इंतज़ार करना पड़ेगा.

रेपो दर यानी रिज़र्व बैंक जिस दर पर बैंकों को क़र्ज़ देता है, उनमें कोई बदलाव नहीं किया गया है और वह आठ प्रतिशत के स्तर पर बनी हुई है.

इसी तरह नकद आरक्षित अनुपात (सीआरआर) भी चार प्रतिशत के स्तर पर बना हुआ है. बैंकों को अपनी जमा राशि का एक हिस्सा रिज़र्व बैंक के पास रखना पड़ता है, जिसे सीआरआर कहा जाता है.

रिज़र्व बैंक ने मौद्रिक नीति में कहा है कि अगर महंगाई के मोर्चे पर सब कुछ योजना के मुताबिक़ चलता रहा तो मौद्रिक नीति में आगे सख्ती किए जाने का अनुमान नहीं है.

इससे उम्मीद जताई जा सकती है कि यहां आगे ब्याज दरों में कटौती का सिलसिला शुरू हो सकता है.

चुनौतियां

रिज़र्व बैंक ने कहा है कि महंगाई के आंकड़े बताते हैं कि मांग पक्ष से दबाव अभी भी बना हुआ है.

खुदरा महंगाई फ़रवरी में लगातार तीसरे महीने घटी है, लेकिन इसके बावजूद फलों और दूध की क़ीमतों में तेज़ी बरक़रार है और सब्जियों की क़ीमतों में यहां से आगे और कमी होने की उम्मीद नहीं है.

दूसरी ओर 2014 में दक्षिण-पश्चिम मॉनसून को लेकर अनिश्चितता बरक़रार है और ऐसे में हो सकता है कि पिछले साल के दौरान कृषि क्षेत्र में जो सुधार देखा गया था, वो चालू साल में देखने को न मिले.

रिज़र्व बैंक ने वित्त वर्ष 2014-15 के दौरान आर्थिक विकास दर के अनुमान को 5.6 प्रतिशत से घटाकर 5.5 प्रतिशत कर दिया है.

केंद्रीय बैंक का कहना है कि वैश्विक मोर्चे पर दबाव अभी भी बरक़रार हैं, हालांकि सरकार के चालू खाता घाटे में कमी देखने को मिलेगी.

रिज़र्व बैंक ने कहा है कि अनिश्चित बाहरी मांग के चलते घरेलू अर्थव्यवस्था पर दबाव बना हुआ है. इसके साथ ही विदेशी पूंजी में उतार-चढ़ाव के जोखिम भी बने हुए हैं.

मौद्रिक नीति में कहा गया है कि रियल एस्टेट और परिवहन जैसे कुछ क्षेत्रों में सुधार के संकेतों के बावजूद औद्योगिक गतिविधियों में मंदी के चलते अर्थव्यवस्था को गति नहीं मिल पा रही है.

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