नीतीश कटारा मामले में सज़ा बरक़रार

दिल्ली हाई कोर्ट की इमारत

दिल्ली उच्च न्यायालय ने नीतीश कटारा हत्याकांड में उत्तर प्रदेश के नेता डीपी यादव के पुत्र विकास यादव समेत तीनों दोषियों की उम्रकैद की सज़ा के निचली अदालत के फ़ैसले को बरक़रार रखा है.

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक़ न्यायमूर्ति गीता मित्तल और न्यायमूर्ति जे आर मिढा की खंडपीठ ने विकास यादव, उनके चचेरे भाई विशाल और सुखदेव पहलवान की सज़ा बरक़रार रखने का यह फ़ैसला मामले की दोबारा सुनवाई के लिए दायर याचिका पर दिया.

नीतीश कटारा की उत्तर प्रदेश के ग़ाज़ियाबाद में 16-17 फ़रवरी 2002 की रात एक शादी समारोह से अपहरण के बाद हत्या कर दी गई थी.

न्यायालय ने कहा कि याचिकाएं स्वीकार करने योग्य नहीं हैं. साथ ही यह भी कहा कि यह झूठी शान की ख़ातिर की गई हत्या का मामला है.

न्यायालय ने अभियोजन पक्ष और नीलम कटारा की तीनों दोषियों को सज़ा-ए-मौत की मांग पर सुनवाई के लिए 25 अप्रैल की तारीख तय की है.

अदालत ने इस मामले में करीब एक साल पहले, 16 अप्रैल को बहस पूरी होने के बाद, अपना फ़ैसला सुरक्षित कर लिया था.

मामला

नीतीश कटारा की माँ नीलम कटारा ने अदालत के फ़ैसले पर संतोष जताते हुए कहा, "मैं इस फ़ैसले से बहुत ख़ुश हूं. एक भारतीय नागरकि के रूप में और एक मां के रूप में भी."

उन्होंने कहा, "मेरा नज़रिया एकदम साफ़ है. यह मामला झूठी शान के लिए हत्या या यूं कहें कि अपनी ताकत दिखाने के लिए की गई हत्या का है. वह हत्या करते हैं और दावा करते हैं कि यह इज़्ज़त के लिए की गई है."

नीतीश कटारा की मां ने कहा, "यह एक बहुत मुश्किल निजी जंग है. यह विरोधी गवाहों वाला मामला नहीं था, इस मामले में तो गवाह ढूंढना ही मुश्किल था."

दिल्ली की एक अदालत ने 30 मई 2008 को इस मामले में विकास और विशाल यादव को उम्र क़ैद की सज़ा सुनाई थी. सुखदेव को 23 जुलाई, 2011 को सज़ा सुनाई गई थी.

निचली अदालत के फ़ैसले को चुनौती देते हुए कम से कम पाँच याचिकाएं उच्च न्यायालय में दाखिल की गई थीं.

इनमें से तीन याचिकाएं दोषियों ने दायर की थीं जबकि दो याचिकाएं नीलम कटारा ने दाख़िल की हैं. नीलम कटारा ने दोषियों के लिए सज़ा-ए-मौत की मांग की है.

अभियोजन पक्ष का कहना था कि विकास यादव और विशाल यादव ने नीतीश कटारा की इसलिए हत्या की थी क्योंकि उन्हें अपनी बहन भारती यादव से उनकी दोस्ती पसंद नहीं थी.

दोषियों के लिए सज़ा-ए-मौत की मांग करते हुए अभियोजन पक्ष ने कहा कि भारती के परिवार की ओर से इस दोस्ती का विरोध ही नीतीश की मौत का कारण बना.

बचाव पक्ष के वकील राम जेठमलानी ने कहा कि इस मामले की सुनवाई क़ानून के मुताबिक़ नहीं हुई. इसलिए इस मामले की दोबारा सुनवाई की जाए.

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