आईडीएफसी और बंधन को मिला बैंकिंग लाइसेंस

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करीब एक दशक के इंतज़ार के बाद भारतीय रिजर्व बैंक ने दो वित्तीय संस्थाओं को सैद्धांतिक तौर पर नए बैंकिंग लाइसेंस दिए हैं.

वित्त सेवा मुहैया कराने वाली कंपनी आईडीएफसी और छोटे कर्ज देने वाली देश की सबसे बड़ी कंपनी बंधन फाइनैंशियल सर्विसेज को ये लाइसेंस मिले हैं.

बंधन फाइनैंशियल गरीब महिलाओं को छोटे कर्ज देती है.

रिजर्व बैंक को नए बैंकिंग लाइसेंस के लिए भारतीय डाक, रिलायंस कैपिटल, टाटा कैपिटल और एलएंडटी फाइनेंस सहित कुल 27 आवेदन मिले थे, जिनमें से दो ने अपना आवेदन वापस ले लिया था.

रिजर्व बैंक ने कहा है कि भारतीय डाक को बैंकिंग लाइसेंस देने के बारे में अलग से विचार किया जाएगा.

रिजर्व बैंक ने कहा है कि ये लाइसेंस 18 महीनों के लिए दिए गए हैं और इस दौरान दोनों फर्मों को रिजर्व बैंक की अनिवार्यताओं को पूरा करना होगा.

'संकीर्ण नज़रिया'

रिजर्व बैंक की विज्ञप्ति में बताया गया है कि 25 आवेदनों पर उनकी वित्तीय स्थिति, ट्रैक रिकॉर्ड और एक बैंक चलाने की उनकी क्षमता के आधार पर विचार किया गया.

इससे पहले केंद्रीय बैंक ने किसी विवाद से बचने के लिए नए बैंकिंग लाइसेंस जारी करने के लिए भारत के चुनाव आयोग की इजाज़त मांगी थी. मंगलवार को चुनाव आयोग ने कहा कि रिज़र्व बैंक अपने फैसले लेने के लिए आज़ाद है.

रिजर्व बैंक ने कहा है कि नए लाइसेंस देने के लिए उसका नज़रिया संकीर्ण लग सकता है.

इसे स्पष्ट करते हुए केंद्रीय बैंक ने कहा कि आज लोग प्रशासन को लेकर चिंतित हैं और जब बात एक ऐसी संस्था के लिए लाइसेंस देने की आती, जिस पर भारतीय जनता सबसे ज्यादा भरोसा करते हैं तो संकीर्ण नज़रिया अपनाना ही सही तरीका लगता है.

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