क्या दलाल स्ट्रीट को है मोदी का इंतज़ार?

  • 5 अप्रैल 2014
नरेंद्र मोदी

पिछले एक महीने से शेयर बाज़ार में लगातार उछाल आ रहा है और मुंबई में शेयर दलालों के गढ़ दलाल स्ट्रीट में लोगों का उत्साह बढ़ता जा रहा है.

विश्व भर में उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में तेज़ी आना इसका एक कारण ज़रूर है.

लेकिन कई जानकारों का मानना है कि इसके पीछे प्रमुख वजह है वो संभावना, जो कहती है कि नरेंद्र मोदी चुनाव के बाद भारत के अगले प्रधानमंत्री बन सकते हैं.

शेयर दलाल आलोक चूड़ीवाला के अनुसार बाज़ार में उछाल की ख़ास वजह विदेशी निवेशक हैं, जो नरेंद्र मोदी को विकासवादी मानते हैं.

चूड़ीवाला विदेशी निवेशकों में उत्साह से काफ़ी हैरान हैं.

वे कहते हैं, "लोकल पैसा अभी तक बाज़ार में नहीं आ रहा है. वे अभी इंतज़ार के मूड में हैं. लेकिन विदेशी निवेशक लगातार एक-डेढ़ महीने से भारतीय बाज़ार में पैसा लगा रहे हैं."

राजनीतिक अनिश्चितता

आमतौर पर राजनीतिक अनिश्चितता शेयर बाज़ार की दुश्मन होती है. बाजार स्थिरता में फलता फूलता है.

आम चुनाव का समय अनिश्चितता का होता है और शेयर बाज़ार में शेयर के भाव जितने तेज़ी से बढ़ते हैं, उतनी ही तेज़ी से नीचे भी गिर जाते हैं. साल 2009 के आम चुनाव से पहले ऐसा ही हुआ था.

भारतीय बाज़ार पिछले पांच साल से कठिन दौर से गुज़र रहा है. यहां लंबे अरसे तक मंदी छाई रही है. इस अरसे में विदेशी निवेशकों ने अपने पैसे निकाल लिए.

इसके अलावा, आर्थिक विकास की दर लगातार घटती जा रही है और आर्थिक सुधार लगभग रुक गए हैं. सवाल ये है कि ऐसे में शेयर बाज़ार में तेज़ उछाल आने का क्या कारण है ?

मोदी का विकास मॉडल

शेयर दलाल कहते हैं कि नरेंद्र मोदी ने जिस विकास मॉडल को प्रमोट करने की कोशिश की है उसने उद्योग जगत और शेयर बाज़ार को प्रभावित किया है.

आलोक चूड़ीवाला कहते हैं, "नरेंद्र मोदी जिस विकास मॉडल की बात कर रहे हैं उस पर विदेशी निवेशकों को यक़ीन है, क्योंकि गुजरात में ये मॉडल पहले से काम कर रहा है."

लेकिन स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के एक आर्थिक सर्वेक्षण में कहा गया है कि आर्थिक विकास की दर में प्रगति वापस लाने के लिए अर्थव्यवस्था के बुनियादी पहलू अब भी कमज़ोर हैं और इसके दोबारा तेज़ रफ़्तार पकड़ने के आसार कम ही दिख रहे हैं.

मुंबई के एक अन्य शेयर दलाल अमित पारिख कहते हैं कि ये दावे के साथ कहना मुश्किल है कि बाज़ार में मौजूदा उछाल का कारण मोदी के प्रधानमंत्री बनने का उत्साह है.

बाज़ार में उत्साह

उनके मुताबिक, "ये सही है कि दलाल स्ट्रीट में मोदी को लेकर बेहद उत्साह है लेकिन बाज़ार में उछाल सभी उभरती हुई अर्थव्यवस्थाओं में है. अगर भारत में चुनाव नहीं भी हो रहा होता तो शायद बाजार में मंदी नहीं रहती."

पारिख कहते हैं कि अगर मोदी प्रधानमंत्री बन भी जाते हैं तो ये कोई ज़रूरी नहीं कि आर्थिक प्रगति रफ़्तार पकड़ ही ले. उन्होंने कहा, "पांच साल से कांग्रेस सरकार आर्थिक कठिनाइयों से रूबरू है और मोदी के पास कोई जादू की छड़ी तो है नहीं कि वो आते ही इन कठिनाइयों को दूर कर देंगे."

शेयर बाज़ार से जुड़े लोगों के अनुसार ब्राज़ील, मेक्सिको और दक्षिण अफ्रीका जैसे देशों में भी बाज़ार में उछाल है. बल्कि विश्व भर में शेयर बाज़ार में तेज़ी आई है.

इसका असर भारत के बाज़ारों पर भी पड़ा है लेकिन केवल बाहरी कारणों से भारत के बाज़ारों में तेज़ी नहीं आती है. देश के अंदर के माहौल का बाज़ार पर अधिक असर होता है.

भारतीय निवेशक

मोदी अगले प्रधानमंत्री हों या कोई और, अगली सरकार के सामने चुनौतियाँ काफ़ी होंगी. भारत के निर्माण क्षेत्र का बुरा हाल है. विमानन क्षेत्र में अनिश्चितता है. बेरोज़गारी बुलंदी पर है. विदेशी निवेश रुक सा गया है. अर्थव्यवस्था में सुधार की रफ़्तार थम-सी गई है.

शेयर दलाल चूड़ीवाला के अनुसार पिछले कुछ सालों से भारतीय बाज़ारों और उद्योगपतियों में आत्मविश्वास की कमी रही.

वे कहते हैं, "बड़े भारतीय निवेशकों ने बाज़ार में पैसा डालना बंद कर दिया है और बड़े प्रोजेक्ट्स को हाथ नहीं लगा रहे हैं. वे बेहतर माहौल बनने का इंतज़ार कर रहे हैं. मोदी के वादे उनके लिए उम्मीद की एक किरण है. इसलिए वे चाहते हैं कि नरेंद्र मोदी ही प्रधानमंत्री बनें."

इन सबके बीच सवाल ये भी है कि यदि कांग्रेस के नेतृत्व वाली सरकार सत्ता में वापस लौटती है तो क्या ये शेयर बाज़ार और उद्योग जगत के लिए एक बुरी ख़बर होगी? और क्या इससे शेयर के भाव जितनी तेज़ी से बढ़े हैं, उतनी तेज़ी से नीचे गिरने लगेंगे?

साल 2004 के चुनाव में भाजपा की सत्ता में वापसी तय मानी जा रही थी लेकिन जब कांग्रेस की जीत हुई तो बाज़ार में भूकंप-सा आ गया था.

कांग्रेस की सरकार

इसी तरह से 2009 के चुनाव में कांग्रेस की वापसी के आसार कम थे. इसलिए जब कांग्रेस सत्ता में वापस आई तो शेयर बाज़ार में ज़बरदस्त झटका लगा. बाज़ार को संभलने में कुछ हफ़्ते लग गए थे.

चूड़ीवाला कहते हैं, "यदि कांग्रेस की वापसी हुई तो इसका असर बाज़ार पर बुरा पड़ेगा. लेकिन सही पॉलिसी चलाई गई तो बाज़ार में ज़बरदस्त उछाल भी आ सकता है."

उधर स्टैंडर्ड चार्टर्ड बैंक के जायज़े में कहा गया है कि अर्थव्यवस्था को दोबारा ज़िंदा और विकास दर बढ़ाने के लिए नई आर्थिक नीतियों की ज़रूरत होगी और विकास के साथ महंगाई पर क़ाबू पाने वाली संतुलित नीति लानी होगी जो एक आसान काम नहीं होगा.

दूसरी तरफ अगर किसी पार्टी या गठबंधन को बहुमत नहीं मिला तो अनिश्चितता का माहौल वापस आ सकता है

उद्योग जगत, व्यापार और बाज़ार में उत्साह बना है और वो मोदी का इंतज़ार कर रहे हैं. यदि मोदी हार भी गए तो इन दिनों जो उछाल जारी है उसमें वक़्ती तौर पर झटका तो लग सकता है लेकिन कुछ हफ़्तों में इसे दूर किया जा सकता है.

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