दिल्ली के उदासीन मतदाताओं को जगाता 'डाकू'

डाकू
Image caption डाकू का चेहरा आज तक किसी ने नहीं देखा है

"मेरा नाम डाकू है. मैं एक स्ट्रीट आर्टिस्ट हूं. दीवारों पर पेंटिंग बनाता हूं."

ये कहना है दिल्ली की सड़कों पर अंधेरी रात में निकले एक नकाबपोश का.

इनकी कला को पूरी दिल्ली में देखा जा सकता है मगर उनका चेहरा आज तक किसी ने नहीं देखा है. किसी को उनका नाम भी नहीं पता. आखिर कौन हैं ये नकाबपोश ?

ये हैं भारत के 'बैंक्सी'. वो कलाकार जो दीवारों पर ग्रैफिटी बनाकर लोगों में सामाजिक-राजनीतिक जागरुकता पैदा कर रहे हैं.

बैंक्सी एक ब्रितानी कलाकार का छद्म नाम है. बैंक्सी एक पेंटर हैं, राजनीतिक कार्यकर्ता हैं, फिल्म निर्देशक हैं और साथ ही ग्रैफिटी कलाकार हैं और उन्हीं की तरह 'डाकू' भी राजनीतिक जागरुकता पैदा कर रहे हैं.

भारत के 'बैंक्सी'

Image caption ग्रैफिटी आर्ट के जरिए 'डाकू' मतदाताओं को जागरुक करते हैं.

'डाकू' भारत में ग्रैफिटी आर्ट की मदद से मतदान के प्रति उदासीन जनता को जगा रहे हैं.

पूरा भारत 2014 के आम चुनाव के रंग में सराबोर है. हर तरफ चुनाव की बातें हो रही हैं. ऐसे में 'डाकू' अपनी अनोखी कला के साथ लोगों के बीच हैं.

इस नकाबपोश कलाकार का कहना है कि उनकी कला राजनीतिक संदेश देती है और वे लोगों को मौजूदा हालात पर सोचने-विचारने को उकसाते हैं.

उनकी ज़्यादातर पेंटिंग सामाजिक-राजनीतिक विषयों पर केंद्रित होती हैं. खासकर गैरकानूनी गतिविधियों पर.

वे कहते हैं, "हर किसी के दिमाग़ में डाकू की ख़ास तस्वीर होती है. दिल्ली या कहिए कि पूरे भारत में लोग कहीं भी थूक देते हैं, कहीं भी मूत्र-त्याग कर देते हैं, मगर दीवारों पर लिखना यहां ग़ैरक़ानूनी है. कितनी विचित्र बात है."

संदेश

यूरोप और अमरीका में लोग ग्रैफिटी को पसंद नहीं करते हैं. लेकिन आमतौर पर भारत में लोग इस कला को खराब नहीं समझते, बल्कि दीवारों पर उकेरी गई रंगीन कलाकृतियों और संदेशों को पसंद करते हैं.

'डाकू' की अधिकांश ग्रैफ़िटी एक साथ कई कहानियां कहती हैं जिनसे आम लोग खुद को जुड़ा हुआ महसूस करते हैं.

भारत में आजकल आम चुनाव का माहौल है और वे दीवारों पर लोगों को मतदान के लिए उत्साहित करने वाली पेंटिंग बना रहे हैं.

उनकी बनाई गई पेंटिंग में निहित संदेश पर लोगों में चर्चाएं होती हैं.

'स्टॉप ब्राइबिंग'

Image caption डाकू ने 'स्टॉप ब्राइबिंग', 'स्टॉप रेपिंग' जैसी नसीहतें देते स्टीकर्स भी बनाए हैं.

'डाकू' ने कई स्टीकर भी बनाए हैं. जैसे स्टॉप ब्राइबिंग (घूस लेना छोड़ो), स्टॉप रेपिंग (बलात्कार पर रोक लगाओ). इसी तरह स्टॉप शॉपिंग और कई दूसरी तरह की नसीहतों वाले स्टीकर्स भी.

उनका मानना है कि इसे जब ढेर सारे लोग देखते हैं, पसंद करते हैं तो इसके बारे में बातें होती हैं, ढेर सारी शेयरिंग होती है, फिर इसे बार-बार दोहराया जाता है. इस तरह ये पेंटिंग्स एक गली से निकलकर कई गलियों की अनगिनत दीवारों पर फैल जाती है.

'डाकू' कहते हैं कि दीवारें किसी भी विचार को अभिव्यक्त करने का बेहद सशक्त और संवेदनशील ज़रिया होती हैं.

वे अपनी कला के बारे में बताते हुए कहते हैं कि दीवारों पर लिखे और पेंट किए गए संदेश इतने संवेदनशील हो सकते हैं कि एक दीवार दंगा भड़का सकती है.

उन्होंने कहा, "चाहे वो ग्रैफ़िटी हो, या स्ट्रीट आर्ट, मैं चाहता हूं कि ज़्यादा से ज़्यादा युवा आगे आएं और इस कला के ज़रिए ख़ुद को अभिव्यक्त करें. ख़ासकर गलियों में निकलें, क्योंकि यहां से संदेश बेहतर तरीके से सबके बीच पहुंचता है."

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