'खस्ताहाल' बनारस क्यों बना हाई-प्रोफाइल?

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लगातार तीन बार से पश्चिमी भारतीय राज्य गुजरात के मुख्यमंत्री रहे नरेन्द्र मोदी ने पिछले महीने जब उत्तर प्रदेश के वाराणसी से चुनाव लड़ने की घोषणा की तो इतना तय था कि यह उनकी सोची समझी चुनावी रणनीति का हिस्सा है.

कुछ लोगों ने मोदी के इस कदम को राजनीतिक मास्टर स्ट्रोक भी क़रार दिया. दरअसल मोदी वाराणसी से चुनाव लड़ कर एक तरफ़ तो पूरे देश के हिन्दू वोटरों को बीजेपी के पक्ष में कर रहे हैं और साथ ही वो उत्तर प्रदेश में पार्टी का जनाधार भी बढ़ाना चाह रहे हैं.

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भारत में सत्ता का रास्ता उत्तर प्रदेश से ही हो कर जाता है. यहां लोकसभा की सबसे ज़्यादा 80 सीटें हैं. उत्तर प्रदेश में पार्टी का प्रदर्शन बेहतर हो तो किसी भी पार्टी के लिये सत्ता पाने का सपना सच करना आसान हो जाता है.

नरेंद्र मोदी 2002 से गुजरात के मुख्यमंत्री है. यह वही साल था जब गुजरात में सबसे भयानक दंगे भड़के थे और 1000 से ज़्यादा लोग जिनमें अधिकतर मुस्लिम थे, मारे गये थे.

गुजरात दंगो के मामले में मोदी खुद को निर्दोष बताते रहे हैं और संबंधित कोर्ट का बनाया एक पैनल उन्हें क्लीन चिट दे चुका है. बावजूद इसके मोदी का नाम दंगो को लेकर खींचा जाता रहा है. उनके आलोचकों का कहना है कि मुख्यमंत्री रहते वह जनता को सुरक्षा मुहैया कराने में नाकाम रहे.

लगातार अनदेखी

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भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री पद का उम्मीदवार घोषित कर जनता के बीच संदेश दिया है कि वो एक कुशल प्रशासक रहे हैं जिन्होंने गुजरात का चहुंमुखी विकास कर देश के सामने एक मॉडल पेश किया है.

गंगा के किनारे बसी हिन्दुओं की पवित्र नगरी वाराणसी लंबे समय से राजनितक नेताओं की अनदेखी की शिकार रही है.

मंदिरों और देवी-देवताओं वाले इस शहर में हर रोज़ हज़ारों की तादाद में भक्त आते हैं लेकिन शहर का खस्ताहाल बयान से परे है. खुली हुई उफनती नालियां, सड़कों के किनारे पड़े कचरे, रास्तों पर घूमती गाय और दिशाहीन-बेअदब ट्रैफिक शहर का हाल बताते हैं.

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बीजेपी के स्थानीय नेता और चुनावी प्रचार अभियान के सदस्य लक्ष्मण आचार्य बताते हैं कि वाराणसी सीट चुनने के पीछे मोदी की मंशा यही है कि यहां विकास हो, क्योंकि वह हर अंधेरे को अपने विकास का प्रकाश डाल कर रोशन करना चाहते हैं.

लक्ष्मण आचार्य कहते हैं कि वाराणसी के मतदाता मोदी की उम्मीदवारी से उत्साहित हैं कि क्योंकि उन्हें अपने शहर के विकास की आस दिख रही है. वाराणसी सीट के लिए 12 मई को वोट डाले जाने हैं और उससे पहले मोदी वहां कई चुनावी रैलियां कर लोगों से मिलने वाले हैं.

वाराणसी सीट पर नरेंद्र मोदी को सीधी और कड़ी टक्कर दे रहे हैं आम आदमी पार्टी के संयोजक और भ्रष्टाचार विरोधी मुहिम चलाने वाले अरविंद केजरीवाल.

आम आदमी पार्टी ने दिल्ली विधानसभा के पिछले चुनावों में अपने जबरदस्त प्रदर्शन से लोगों को चौंका दिया था. पार्टी ने अरविंद केजरीवाल के नेतृत्व में अल्पमत की सरकार भी बनाई थी जो मात्र 49 दिन चली थी.

रिवर, वीवर और सीवर

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Image caption कांग्रेस ने बनारस से पूर्व भाजपा नेता और पाँच बार विधायक रह चुके अजय राय को लोकसभा प्रत्याशी बनाया है.

वाराणसी के लिये आम आदमी पार्टी ने ''रिवर, वीवर और सीवर" का नारा दिया है. रिवर यानि गंगा नदी की सफाई, वीवर यानी बुनकरों के कल्याण के लिये काम और सीवर यानी नालों की सफाई का अभियान.

बनारसी सिल्क साड़ियां अपनी चमक और कलात्मकता के लिये दुनिया भर में जानी जाती हैं लेकिन इन्हें बनाने वाले हज़ारों बुनकरों की हालत काफ़ी समय से दयनीय है.

अरविंद केजरीवाल ने वाराणसी में रैली कर इन्हीं मुद्दों को उठाया था और लोगों से अपील की थी कि वो बीजेपी को वोट न दें.

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अरविंद केजरीवाल ने कहा था कि मोदी के विकास का नारा झूठा है. अगर वो सही में विकास कर रहे होते तो 'मैं भी उनके साथ होता'.

केजरीवाल ने कांग्रेस और बीजेपी दोनों को समान रूप से दोषी ठहराते हुए कहा था कि दोनों ही पार्टियां किसी न किसी तरीके से पिछले 65 सालों से देश को लूट रही हैं.

बीजेपी नेता लक्ष्मण आचार्य ने कहा कि वाराणसी की जनता अरविंद केजरीवाल को गंभीरता से नहीं ले रही है. यहां की जनता ने अब तक सांसदों को चुना है इस बार वो प्रधानमंत्री को चुनेगी.

बीजेपी का गढ़

कुल मिलाकर वाराणसी में हो रहे मोदी-केजरीवाल चुनावी मुकाबले ने शहर में जबरदस्त उत्साह और रोमांच का माहौल बना दिया है.

शहर के बाज़ारों और मुख्य सड़कों से लेकर संकरी गलियां तक चुनावी प्रचार के शोर शराबे में गोते खा रहीं हैं.

वाराणसी लोकसभा सीट पर तक़रीबन 3.5 लाख मुस्लिम मतदाता हैं. आम आदमी पार्टी की नज़र इन्हीं मुस्लिम मतदाताओं पर है कि इनका वोट कट्टरपंथी हिन्दू की पहचान रखने वाले नरेंद्र मोदी को न जाकर उन्हें मिलेगा. लेकिन वाराणसी लंबे समय से बीजेपी का गढ़ रही है.

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पिछले छह में से पाँच लोकसभा चुनावों में यहां से बीजेपी विजयी रही है. बीजेपी का मानना है कि इस बार भी वोटर बीजेपी को ही जिताएंगे.

वहीं मोदी के विरोधियों का मानना है कि वाराणसी से चुनाव लड़ना मोदी के अंत की शुरुआत हो सकती है.

कांग्रेस नेता मणिशंकर पाण्डेय कहते हैं, "वाराणसी में लोग दाह-संस्कार कराने आते हैं. हिन्दुओं का यकीन है कि यहाँ दाह-संस्कार किए जाने से मोक्ष की प्राप्ति होती है और आपकी आत्मा सीधे स्वर्ग जाती है."

वे कहते हैं, "यह मोदी का आख़िरी समय है. वो यहाँ से चुनाव हारेंगे और राजनीति से उन्हें मोक्ष मिल जाएगा."

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