सर्वोच्च न्यायालय पर गर्व है: लक्ष्मी

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अपने वजूद के लिए बरसों से संघर्ष कर रहे किन्नर समुदाय को आज एक राह मिल गई है. भारत के सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें स्त्री, पुरुष के बाद तीसरे लिंग के रूप में मान्यता दी है.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि किन्नर इस देश के नागरिक हैं और उन्हें भी शिक्षा, काम पाने और सामाजिक बराबरी हासिल करने का पूरा हक़ है.

किन्नरों के अधिकारों के लिए मुखर रूप से पहल करने वाली किन्नरों की नेता लक्ष्मी नारायण त्रिपाठी सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर बेहद ख़ुशी जाहिर की और कहा कि आज वे खुद को संपूर्ण भारतीय महसूस कर रही हैं.

लक्ष्मी नारायण ने बीबीसी से कहा, "अभी तो केवल राज्य सरकार के साथ काम करना है. सुप्रीम कोर्ट ने तो फैसला दे दिया है. नई सरकार आएगी तो उसके साथ काम करेंगे."

पुरुष प्रधान समाज पसंद नहीं- लक्ष्मी त्रिपाठी

इसके पहले निर्वाचन आयोग ने भी 2014 के लोकसभा चुनाव के संदर्भ में किन्नरों को थर्ड जेंडर का दर्ज़ा देकर उनको एक नई पहचान दी.

किन्नरों को तीसरे लिंग के रूप में पहचान तो मिल गई है, लेकिन सवाल है कि उनका अगला क़दम क्या होगा.

थर्ड जेंडर: नई पहचान से बदलेगी ज़िंदगी?

लक्ष्मी कहती हैं, "अभी तो सुप्रीम कोर्ट ने कानूनी तौर पर अवसरों का दरवाजा खोला है. हमें इन अवसरों को आगे लेकर जाना है."

संपूर्ण भारतीय

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अदालत ने केंद्र सरकार को हुक्म जारी किया है कि वो किन्नरों को स्वास्थ्य और शिक्षा की सुविधा मुहैया करवाए. इसके बाद उन्हें नौकरियों और शिक्षा के क्षेत्र में भी अवसर मिलेंगे. क्या इसके साथ कोई मुश्किल भी आएगी.

इस सवाल के जवाब में लक्ष्मी ने कहा, "संभव है कि ज़मीनी स्तर पर मुश्किलें आएं, लेकिन हम उनका सामना करेंगे. अभी तो जिंदगी में बहुत सारे बदलाव आने हैं."

वे कहती हैं, "बदलाव धीरे-धीरे आएगा. समाज को सतीप्रथा खत्म करने भी व़क्त लगा था. यहां आज भी बलात्कार के मामले सामने आते हैं. हमें तो आज अपना वजूद मिला है."

सत्तर फीसदी मर्द, तीस फीसदी औरत...

सुप्रीम कोर्ट ने सरकार को कहा है कि किन्नरों को सामाजिक और आर्थिक रूप से पिछड़े वर्ग के रूप में देखा जाए.

इसके बारे में लक्ष्मीनारायण ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट का पूरा फैसला अभी उन्होंने नहीं पढ़ा है, और फ़ैसले की प्रति उन्हें शाम तक मिलेगी.

वो कहती हैं, "शाम को फैसले की प्रति पढ़ने के बाद में मैं इस बारे में कुछ कह पाऊंगी. मैं इस ख़ुशी का इंतजार है. मैं ये सोच कर रोमांचित हो रही हूं कि कैसे अब हमारी जिंदगी बदल जाएगी.'

उनकी बातों में अदालत के प्रति कृतज्ञता का भाव साफ़ झलकता है. वो कहती हैं, "आज मुझे भारत के सर्वोच्च न्यायालय पर गर्व हो रहा है. आज पहली बार मैं खुद को संपूर्ण भारतीय महसूस कर रही हूं."

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