वोटरों का स्वागतः लाल गुलाब, इत्र और शर्बत से

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झारखंड के एक मतदान केंद्र पर गंवई बुज़ुर्ग महिला बुधन देवी वोट देने के लिए पहुंचीं, तो उनका स्वागत लाल गुलाब से किया गया.

वह कुछ समझतीं, तब तक मतदानकर्मियों ने उनके कान के करीब जाकर बताया कि वोट के लिए घर से निकलने वाले बड़े-बुजुर्गों का स्वागत करने का यह सरकारी फैसला है.

बुधन ने ठेठ गंवई अंदाज में इतना भर कहा, "अच्छा है बाबू. पहले तो भोर होते ही लंबी कतारें लग जाती थीं. मजाल कि कोई वोट देने तक की टस से मस हो."

लोकसभा चुनावों में वोट को लेकर देश भर में जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है. झारखंड में वोट का प्रतिशत बढ़े, इसके लिए सरकारी और गैर सरकारी स्तर पर तमाम प्रयास किए जा रहे हैं.

इन्हीं प्रयासों का एक हिस्सा है– वोटरों का स्वागत. वह भी लाल गुलाब, ईत्र और शर्बत से. इनमें भी युवा और बुजुर्ग वोटरों का विशेष ख्याल.

दरअसल पिछले चुनावों में झारखंड में महज़ 50.97 फ़ीसदी वोट पड़े थे.

मॉडल केंद्र

17 अप्रैल को राज्य के छह संसदीय क्षेत्रों के लिए वोट डाले गए हैं. इस दौरान छह सौ बूथों को मॉडल मतदान केंद्र का दर्जा दिया गया था.

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यहां शामियाने के नीचे कुर्सियां लगाई गई थीं. कई मतदान केंद्रों पर देखा गया कि महिला मतदानकर्मी वोटरों का स्वागत करने में सुबह सात बजे से चार बजे तक पूरी तन्मयता से तैनात रहीं.

युवा और बुज़ुर्ग वोटरों को सरकारी मतदान कर्मी लाल गुलाब देकर और इत्र छिड़कते हुए स्वागत करते नज़र आए. भर दोपहरी शर्बत का इंतजाम भी पक्का था.

इससे पहले दस अप्रैल को हुए चुनावों में भी कई जगहों पर वोटरों का स्वागत हुआ था. एक मतदान कर्मी ने बताया कि महिलाओं के बीच ये नुस्खा लोकप्रिय हो रहा है.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी पीके जाजोरिया कहते हैं कि मॉडल मतदान केंद्र बनाए जाने से वोटर फ्रेंडली माहौल ज़रूर बना है. वह बताते हैं कि पिछले चुनावों की तुलना में इस बार झारखंड में दस से अठारह फ़ीसदी तक वोट बढ़े हैं.

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लोग निर्भीक होकर वोट करें, इसके इंतज़ाम लगातार किए जा रहे हैं. आगे के चुनावों में इन प्रयासों को और आगे बढ़ाया जाएगा.

मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी के मुताबिक़ इस बार झारखंड के चुनावों में वोट का ग्राफ 65 फ़ीसदी से ज़्यादा तक पहुंचने का अनुमान है.

महिला वोट ज्यादा

झारखंड में लोकसभा की 14 सीटें हैं. यहां कुल मतदाताओं की संख्या 2,03,36,193 हैं. इनमें पुरूष वोटरों की संख्या एक करोड़ सात लाख 126 और महिला वोटरों की संख्या 96 लाख 36 हजार 41 है.

अब तक दस संसदीय क्षेत्रों के लिए डाले गए वोट में मतदान का प्रतिशत 58 से 65 फ़ीसदी तक है.

खास बात ये कि इस बार मतदान में महिलाओं की हिस्सेदारी ज्यादा है. मसलन लोहदगा में 57.85 फ़ीसदी पुरूष और 58.44 फ़ीसदी महिलाओं ने वोट डाले. पलामू और कोडरमा संसदीय क्षेत्र के लिए हुए चुनावों में भी पुरषों से ज्यादा महिलाओं ने वोट डाले हैं.

रांची के उपायुक्त सह निर्वाचन पदाधिकारी विनय कुमार चौबे ने बीबीसी को बताया है कि रांची में 63.78 फ़ीसदी वोट पड़े हैं. जबकि 2009 के चुनाव में 44.73 फ़ीसदी वोट डाले गए थे. रांची में ही सबसे ज्यादा 16 लाख 48 हजार वोटर हैं.

क्या वोट प्रतिशत में इज़ाफ़े में लाल गुलाब, इत्र, शर्बत से स्वागत कारगर साबित हुआ है? इस सवाल पर वह कहते हैं कि बेशक ये कोशिशें अच्छी साबित हो रही हैं.

चौबे बताते हैं कि उन्होंने खुद कई मॉडल मतदान केंद्रों का जायजा लिया. सुबह-सुबह जब मतदाताओं को हाथों में लाल गुलाब मिले, तो उनके चेहरे खिल गए. युवा वोटरों में भी उत्साह पैदा होता रहा.

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स्लोगन से ऊपर

सामाजिक और राजनीतिक कार्यकर्ता विपिन सिंह कहते हैं कि इस तरह के इंतज़ीम और स्वागत का फंडा देश भर के शहरों में होना चाहिए. क्योंकि शहरी क्षेत्र के वोटर ही घरों से निकलने में कतराते हैं.

लेकिन उनका दावा है कि इस बार अधिकतर राज्यों में वोट का जो प्रतिशत बढ़ा, वह एंटी इनकंबेंसी और प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी के बढ़ते प्रभाव का असर है.

युवा वोटर विवेक कहते हैं कि इस बार पूरे देश में मतदाताओं के बीच जागरूकता अभियान चलाया गया लेकिन झारखंड में ये प्रयास ज्यादा अच्छे लग रहे हैं. वह कहते हैं कि शहरी क्षेत्र में ही लोग घरों से नहीं निकलते, इसे ठीक करने की ज़रूरत है. इसके साथ ही वे चुनावों में होने वाले खर्च को एकदम पारदर्शी बनाने पर जोर देते हैं.

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पहली बार वोट को लेकर कॉलेज की छात्रा शिल्पा बनर्जी बताती हैं कि टीवी, रेडियो और अख़बारों में उन्होंने वोट को लेकर दर्जनों स्लोगन और नारे देखे-पढ़े था.

प्रचार के लिए देश भर में कई शख़्सियतों को ब्रांड एबंसडर भी बनाया गया है, लेकिन उनकी ख़ुशी तब और बढ़ी जब कतार में लगते ही उनका स्वागत लाल गुलाब से हुआ. वह बताती हैं कि हमने मौके पर महिला मतदान कर्मचारी से कहा भी, "हमारे दादा जी के कुर्ते पर ईत्र जरूर छिड़क दें."

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