जस्टिस राजेंद्र मल लोढ़ा भारत के नए प्रधान न्यायाधीश

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जस्टिस राजेंद्र मल लोढ़ा ने भारत के नए प्रधान न्यायाधीश के तौर पर कार्यभार संभाल लिया है.

रविवार को राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने उन्हें देश के 41वें प्रधान न्यायाधीश के रूप में शपथ दिलाई.

लोढ़ा ने जस्टिस सदाशिवम का स्थान लिया है जो शनिवार को सेवानिवृत्त हो गए. वो नौ माह तक देश के प्रधान न्यायाधीश रहे.

राष्ट्रपति भवन के दरबार हाल में हुए शपथग्रहण समारोह में उपराष्ट्रपति हामिद अंसारी, प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और कई केंद्रीय मंत्री भी मौजूद थे.

समारोह में विपक्ष का कोई नेता उपस्थित नहीं रहा.

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जस्टिस लोढ़ा पाँच माह के लिए ही सुप्रीम कोर्ट के प्रधान न्यायाधीश रहेंगे. वो इसी साल 27 सितंबर को सेवानिवृत्त होने वाले हैं.

महत्वपूर्ण फ़ैसले

64 वर्षीय जस्टिस लोढ़ा सर्वोच्च न्यायालय के सबसे वरिष्ठ जज हैं.

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जस्टिस लोढ़ा कथित कोयला आवंटन घोटाले के मामले की सुनवाई कर रही पीठ के अध्यक्ष भी हैं.

सीबीआई को राजनीति के हस्तक्षेप से दूर करने का अहम आदेश भी जस्टिस लोढ़ा ने ही सुनाया था.

अपने फ़ैसले में उन्होंने कहा था कि अदालत की निगरानी में चल रहे मामलों में कार्रवाई के लिए सीबीआई को सरकारी अनुमति की ज़रूरत नहीं है.

जस्टिरस लोढ़ा की ही पीठ ने कथित कोयला घोटाले के मामले में सीबीआई को सरकार से जानकारी न साझा करने का आदेश दिया था.

इन्हीं की अध्यक्षता वाली एक बेंच ने देश में क्लिनिकल ट्रॉयल पर रोक लगा दी थी. अपने फ़ैसले में उन्होंने कहा था कि लोगों के हित फ़ार्मा कंपनियों के हितों से ज़्यादा महत्वपूर्ण हैं.

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