नरेंद्र मोदी को पप्पू की ललकार

  • 28 अप्रैल 2014
पप्पू याादव

एक ओर जहाँ देशभर में नरेंद्र मोदी की तथाकथित लहर की चर्चा हो रही है, वहीं इन सबसे दूर बिहार के मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र में राष्ट्रीय जनता दल के बहुचर्चित उम्मीदवार पप्पू यादव न सिर्फ़ सांप्रदायिक शक्तियों को रोकने का दावा कर रहे हैं, बल्कि नरेंद्र मोदी को चुनौती भी दे रहे हैं.

मधेपुरा लोकसभा क्षेत्र इस समय हाई प्रोफ़ाइल बना हुआ है क्योंकि यहाँ से जनता दल (यू) के अध्यक्ष शरद यादव भी चुनाव लड़ रहे हैं. पप्पू यादव और भारतीय जनता पार्टी के उम्मीदवार विजय कुमार सिंह से उन्हें कड़ी टक्कर भी मिल रही है.

अजित सरकार हत्याकांड में कई वर्षों तक जेल में रहे पप्पू यादव को पिछले साल पटना हाई कोर्ट ने रिहा कर दिया था. इसके बाद पप्पू यादव जेल से छूटे और उन्हें लालू प्रसाद यादव ने मधेपुरा से टिकट दे दिया.

हालाँकि उनकी पत्नी रंजीता रंजन बगल के सुपौल से कांग्रेस की उम्मीदवार हैं. मधेपुरा में मुझे भी पप्पू यादव के जनसंपर्क अभियान को नज़दीक से देखने का मौक़ा मिला. उस रैली में पप्पू यादव जनता से ज़्यादा से ज़्यादा जुड़ने की कोशिश कर रहे थे.

नारा

वे लोगों से वोट तो मांग ही रहे हैं, साथ ही अपने काम की दुहाई भी दे रहे हैं. पप्पू यादव बुज़ुर्गों से आशीर्वाद मांगते हैं, कहते हैं कि वे उनके बेटे की तरह हैं, मैथिली में बात करते हैं. उनकी बातें सुनकर लोग तालियाँ बजाते हैं. उनके साथ बड़ी संख्या में युवा हैं, जो उनके नाम का नारा लगाते हैं.

उनके भाषणों से ये भी अहसास होता है कि उनके लिए पार्टी कोई मायने नहीं रखती. अगर राष्ट्रीय जनता दल उन्हें टिकट नहीं देता, तो भी वे चुनाव लड़ते और निर्दलीय लड़ते.

लेकिन वे अपनी प्राथमिकता भी गिनाते हैं. पप्पू यादव कहते हैं कि राजद प्रमुख लालू प्रसाद यादव ने उन्हें एक ज़िम्मेदारी सौंपी है.

उन्होंने कहा, "लालू यादव ने मुझे ज़िम्मेदारी दी है. ऐसी ताक़त, जिसे गीता पर भरोसा नहीं, जिसे संविधान पर भरोसा नहीं, जिसे लोकतंत्र पर भरोसा नहीं, जिसे इंसानियत पर भरोसा नहीं, जिसे भारतीय संस्कृति पर भरोसा नहीं, उसे रोकना है."

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अपने पार्टी अध्यक्ष लालू प्रसाद यादव की चर्चा करते हुए वे कहते हैं कि सांप्रदायिकता को रोकने के लिए एक व्यक्ति हैं, वो हैं लालू यादव.

वे चुनौती देते हुए कहते हैं- नरेंद्र मोदी को भाजपा से हटाकर निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़ने को कहिए ना, किसी में हिम्मत नहीं, सिर्फ़ पप्पू यादव ही ऐसा कर सकते हैं.

पप्पू यादव ने कहा, "हम जब जहाँ चाहें निर्दलीय के रूप में चुनाव लड़कर जीत हासिल कर सकते हैं."

पप्पू यादव अपनी जनसभा में सामाजिक न्याय की चर्चा करते हैं, सामाजिक समरसता के फ़ायदे गिनाते हैं, लेकिन जब सांप्रदायिकता की बात करते हैं, तो भाजपा और नरेंद्र मोदी पर निशाना लगाना नहीं भूलते.

आलोचना

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वे नीतीश कुमार की भी आलोचना करते हैं, जिन्होंने भाजपा के साथ गठबंधन सरकार चलाई.

भाजपा की ओर इशारा करते हुए वे कहते हैं, "एक पार्टी सांप्रदायिक है, देश को तोड़ने वाली. उसका नेता लाखों लोगों का हत्यारा है. उसने इंसानियत का कत्लेआम किया है. झूठ की नींव, झूठ की खेती. वह सामाजिक न्याय का विरोधी है और उद्योगपतियों, पूँजीपतियों और माफियाओं के हाथों में है."

उन्होंने नीतीश के कार्यकाल की चर्चा करते हुए कहा कि हर घर में आरएसएस, हर गाँव में आरएसएस को लाने की कोशिश हुई.

कांग्रेस और राष्ट्रीय जनता दल के गठबंधन पर पप्पू यादव कहते हैं कि वे सांप्रदायिक शक्तियों को लाभ नहीं पहुँचाना चाहते थे. उन्होंने कहा, "गोलबंद होने का कारण ये था कि हम मिलकर इकट्ठे होकर सांप्रदायिकता को रोकेंगे. हम केंद्र में सामाजिक न्याय की सरकार बनाएँगे."

नरेंद्र मोदी का ज़िक्र करते हुए वे कहते हैं कि संविधान को लात तले दबाकर सिर्फ़ एक व्यक्ति का उदय दिखाया जा रहा है. पप्पू यादव गुजरात में नरेंद्र मोदी के कार्यकाल में हुए विकास पर भी सवाल उठाते हैं. वे कहते हैं कि अगर तुलना करें तो कांग्रेस ने इतने वर्षों में इस देश में लाख गुना बेहतर काम किया है.

पप्पू यादव कहते हैं कि सांप्रदायिक सरकार को रोकना पूरे देश की आवाज़ है और सांप्रदायिकता से कोई समझौता नहीं किया जाएगा.

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