तेलंगाना में कांग्रेस और टीआरएस में मुख्य मुक़ाबला

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आंध्र प्रदेश के तेलंगाना इलाक़े की 17 लोकसभा सीटों और विधानसभा की 119 सीटों के लिए चुनाव प्रचार सोमवार शाम ख़त्म हो गया. दोनों के लिए मतदान 30 अप्रैल को होगा.

लोकसभा की 17 सीटों के लिए कुल 267 उम्मीदवार मैदान में हैं जबकि विधानसभा की सीटों के लिए 1669 उम्मीदवार अपना भाग्य आजमा रहे हैं.

अलग तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन चलाने वाले तेलंगाना राष्ट्र समिति (टीआरएस) के अध्यक्ष के चंद्रशेखर राव मेडक सीट से उम्मीदवार हैं जबकि कांग्रेस के जयपाल रेड्डी महबूबनगर से ताल ठोक रहे हैं.

दो जून को आंध्र प्रदेश और तेलंगाना औपचारिक रूप से दो अलग राज्य हो जाएंगे. इसलिए ये दोनों चुनाव ग़ैर विभाजित आंध्र प्रदेश के आख़िरी चुनाव होंगे.

पिछले दिनों यहाँ भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी और कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गाँधी ने कई रैलियों को संबोधित किया.

तेलंगाना में लोकसभा सीटों पर टीआरएस और कांग्रेस एक-दूसरे को टक्कर दे रहे हैं.

दोनों पार्टियाँ तेलंगाना राज्य के निर्माण का दावा कर रही हैं. इसी मुद्दे पर यहाँ चुनाव के परिणाम आने की संभावना है. भारतीय जनता पार्टी और तेलुगू देशम भी यहाँ मैदान में है लेकिन उनके अच्छे प्रदर्शन की संभावना कम है.

कहीं ख़ुशी कहीं गम

सात मई को आंध्र प्रदेश की 25 लोकसभी सीटों के लिए चुनाव होगा. इसमें भाजपा और तेलुगूदेशम के अच्छे प्रदर्शन की उम्मीद लगाई जा रही है. यह चुनाव दोनों मिलकर लड़ रहे हैं.

आंध्र प्रदेश के विभाजन को एक राज्य का नहीं बल्कि एक समाज का बंटवारा माना जा रहा है.

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तेलंगाना के लोगों में जहाँ एक अलग राज्य की मांग पूरी होने की ख़ुशी है, वहीं उनके अंदर शेष आंध्र वालों के ख़िलाफ़ ग़ुस्सा भी साफ़ नज़र आता है.

क़रीब 60 साल के संघर्ष के बाद अलग तेलंगाना का सपना पूरा हुआ है. क्रिशांक तेलंगाना के छात्रों के संगठन के प्रवक्ता हैं, जिन्होंने तेलंगाना के लिए आंदोलन में बढ़चढ़ कर भाग लिया.

वो कहते हैं कि उन्हें दो जून का इंतज़ार है जब औपचारिक रूप से तेलंगाना का जन्म होगा.

तेलंगाना के लोग चाहते हैं कि आंध्र वाले उनके इलाक़ों से निकल जाएँ. वेंकटेश गौड़ा कहते हैं, ''इधर आंध्र वालों की अब क्या ज़रुरत है. इधर आंध्र के लोग बहुत हैं. हम उन्हें हटा देंगे. दो या तीन साल में उन्हें हटा देंगे चाहे हमें इसके लिए एक और संघर्ष करना पड़े.''

उम्मीदें

अपने नए राज्य से तेलंगाना वालों को काफ़ी उम्मीदें हैं. वो अब ये समझ रहे हैं कि उन्हें नौकरियां मिलेंगी और महंगाई कम होगी और उन्हें सिंचाई के लिए पानी आराम से मिलेगा क्योंकि इन सब पर उनके विचार में आंध्र वालों का क़ब्ज़ा था.

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वेंकटेश आगे कहते हैं, ''पूरा प्रशासन आंध्र वालों के हाथ में है. सारी नौकरियां उनके पास हैं. जब वो यहाँ से हटेंगे तो ये नौकरियां हमें मिलेंगी.''

वेंकटेश के पास खड़े एक ग्रामीण ने कहा कि कृष्णा और गोदावरी नदियाँ तेलंगाना हो कर आंध्र में जाती हैं. लेकिन सारे प्रोजेक्ट्स आंध्र में हैं. अब हमारे पास खेती के लिए पानी होगा”

एक अनुमान के मुताबिक़ सरकारी नौकरियों से लेकर व्यापार तक में आंध्र के लोग अधिक संख्या है. हैदराबाद का हाईटेक सिटी काफ़ी अहम माना जाता है, जहाँ व्यापार आंध्र वालों के क़ब्ज़े में है.

आंध्र वाले अब इस बात से आशंकित हैं कि कहीं भावनाओं में बहकर तेलंगाना वाले उन्हें हैदराबाद से निकलने पर मज़बूर न करें. यही वजह है कि वे विभाजन के विरोधी हैं.

तेलंगाना के लोगों की अपेक्षाओं से तय है कि आगामी विधानसभा चुनाव के बाद बनने वाले मुख्यमंत्री के समक्ष कई चुनौतियां होंगी.

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