दिल्ली-दरबार की शक्लो-सूरत तय करेगा सातवां चरण

चुनाव अधिकारी इमेज कॉपीरइट Reuters

सोलहवीं लोकसभा के चुनाव का सातवां दौर आज पूरा हो जाने के बाद 105 लोकसभा क्षेत्रों में मतदान बाक़ी रह गया है.

यानी काम निपटता जा रहा है. पर राजनीतिक दृष्टि से देखें तो चुनाव अपने सबसे महत्वपूर्ण दौर में प्रवेश कर रहा है. आज के सातवें दौर में 89 सीटों का फ़ैसला हुआ है. कई लिहाज से यह मतदान दिल्ली की भावी सरकार की शक्लो-सूरत तय करेगा.

कांग्रेस और भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्षों की लोकसभा सदस्यता का फ़ैसला आज होगा. श्रीमती सोनिया गांधी रायबरेली से और राजनाथ सिंह लखनऊ से चुनाव लड़ रहे हैं.

जेडीयू अध्यक्ष शरद यादव बिहार के मधेपुरा से चुनाव लड़ रहे हैं. उनका फ़ैसला भी आज हो जाएगा.

वर्चस्व की लड़ाई

आज गुजरात की 26, आंध्र की 17, बिहार की सात, जम्मू कश्मीर की एक, पंजाब की 13, उत्तर प्रदेश की 14, पश्चिम बंगाल की नौ, दादरा-नगर हवेली की एक और दमण-दीव की एक सीट पर मतदान होगा.

इस दौर में शामिल गुजरात और पंजाब दो ऐसे राज्य हैं जहाँ केवल एक दिन में सभी सीटों पर मतदान हो जाएगा.

पंजाब, गुजरात और आंध्र की 56 सीटें केंद्र की भावी सरकार के लिए बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाली हैं.

गुजरात और तेलंगाना में कांग्रेस के सामने संकट है. उसे आशा थी कि नए राज्य के गठन का श्रेय उसे मिलेगा. पर तेलंगाना राज्य के लिए आंदोलन करने वाली तेलंगाना राष्ट्र समिति ने अंतिम क्षणों में कांग्रेस का साथ छोड़ दिया.

इमेज कॉपीरइट Daniel Stephen

पहले माना जा रहा था कि तेलंगाना राष्ट्र समिति का कांग्रेस में विलय हो जाएगा. पर टीआरएस ने अपना अस्तित्व समाप्त करने के बजाय उसे बनाए रखना उचित समझा.

साल 2009 के चुनाव में कांग्रेस को तेलंगाना क्षेत्र की 17 में से 12 सीटें मिली थीं. पर इस बार उसके लिए हालात अच्छे नज़र नहीं आते. तब पूरे प्रदेश में कांग्रेस को 33 सीटें मिली थीं. यानी 21 सीटें सीमांध्र क्षेत्र में थीं, जहाँ कांग्रेस को काफ़ी मुश्किलों का सामना करना होगा.

यूपी की 14, बिहार की सात और पश्चिम बंगाल की नौ सीटें भी बेहद महत्वपूर्ण भूमिका निभाने वाली हैं. इस सातवें दौर में बंगाल को छोड़ दें तो बाक़ी हर जगह एनडीए और यूपीए के बीच ज़बर्दस्त टकराव है.

दादरा और नगर हवेली तथा दमण-दीव की एक-एक सीट हालांकि राजनीतिक लिहाज से ज़्यादा महत्वपूर्ण नहीं हैं, पर इन दोनों सीटों पर कांग्रेस का परम्परागत वर्चस्व ख़त्म हो गया है.

दिल्ली का दरवाज़ा

उत्तर प्रदेश की 80 में से 47 सीटों पर मतदान आज और उसके बाद अगले दो दौर में होगा. राजनीतिक हवा में इन दिनों जो तल्खी घुल रही है, उसकी वजह उत्तर प्रदेश और बिहार की सीटें हैं.

इमेज कॉपीरइट PTI

दिल्ली का रास्ता उत्तर प्रदेश होकर जाता है. प्रदेश की 80 सीटें लोकसभा की संरचना पर गहरा असर डालेंगी. सन 2009 में यहाँ कांग्रेस को 21 सीटें मिलीं. इस अप्रत्याशित सफलता से प्रेरित होकर राहुल गांधी ने उत्तर प्रदेश को अपना समय देना शुरू कर दिया. पर 2012 के विधानसभा चुनाव में उनके मंसूबे ढेर हो गए.

ढेर तो भाजपा भी थी. पर पिछले एक साल में पार्टी ने यहाँ आशा की नई किरण देखी है. नरेंद्र मोदी फैक्टर की सबसे बड़ी और कड़ी परीक्षा उत्तर प्रदेश में ही है. पर यहाँ बहुकोणीय राजनीति को समझना आसान नहीं है. यहां पता नहीं चलता कि जनता किसको कब दगा दे दे और किसे कब आसमान पर चढ़ा दे.

बहरहाल आज राजनाथ सिंह, सोनिया गांधी, उमा भारती, मुरली मनोहर जोशी, श्रीप्रकाश जायसवाल, जितिन प्रसाद, पी.एल. पुनिया, और फ़िल्म अभिनेता जावेद जाफ़री की क़िस्मत का फ़ैसला होगा.

प्रदेश की धौरहरा, सीतापुर, मिश्रिख, उन्नाव, मोहनलालगंज, लखनऊ, रायबरेली, कानपुर, जालौन, झांसी, हमीरपुर, बांदा, फतेहपुर और बाराबंकी सीटें इस दौर में शामिल हैं.

अमेठी और सुलतानपुर में सात मई को मतदान है, जहाँ से राहुल और वरुण गांधी प्रत्याशी हैं. वाराणसी में सबसे अंतिम दिन 12 मई को मतदान होगा, जहाँ से नरेंद्र मोदी ख़ुद प्रत्याशी हैं.

इमेज कॉपीरइट Reuters

पूरे उत्तर भारत में लू की लहर है. मई का दूसरा हफ़्ता और भी गर्म होगा. पर इस बार का चुनाव गर्मी से दो-दो हाथ कर रहा है. टी-20 क्रिकेट की भाषा में चुनाव स्लॉग ओवरों के दौर में आ गया है.

सरगर्म बिहार

इस दौर में बिहार की मधेपुरा, मधुबनी, झंझारपुर, दरभंगा, समस्तीपुर, बेगूसराय और खगड़िया सीटों पर पांच महिलाओं सहित 94 उम्मीदवार मैदान में हैं.

सबसे रोचक मुक़ाबला मधेपुरा में है. वहाँ शरद यादव त्रिकोणीय मुक़ाबले में फँसे हैं. उनके सामने पूर्व सांसद राजद उम्मीदवार राजेश रंजन उर्फ पप्पू यादव तथा हाल में नीतीश कुमार के मंत्रिमंडल से त्यागपत्र देने वाली पूर्व आपदा एवं उदयोग मंत्री रेणु कुशवाहा के पति विजय कुमार सिंह भाजपा के उम्मीदवार हैं.

बिहार में लालू यादव की पार्टी राजद की वापसी होती दिखाई पड़ती है. लोकसभा में एनडीए और यूपीए दोनों में से किसी के सरकार न बना पाने की स्थिति में लालू यादव की पार्टी भी महत्वपूर्ण निभा सकती है.

दूसरी ओर भाजपा यहाँ से बड़ी सफलता हासिल करके दिल्ली की कुर्सी पर अधिकार जमाना चाहती है. इस लिहाज से आज और अगले दो दौर बेहद महत्वपूर्ण साबित होने वाले हैं.

गुजरात में आश्वस्त भाजपा

इमेज कॉपीरइट Reuters

भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी की क़िस्मत का फ़ैसला भी वड़ोदरा सीट के मतदाता तय करेंगे. वड़ोदरा से मोदी के ख़िलाफ़ कांग्रेस के मधुसूदन मिस्त्री मैदान में हैं. भाजपा के वरिष्ठ नेता लालकृष्ण आडवाणी गांधीनगर से मैदान में हैं.

सन 2009 में गुजरात की 26 में से 15 सीटें भाजपा को और 11 कांग्रेस को मिली थीं. इस बार प्रदेश में देश को प्रधानमंत्री देने की ललक है.

कांग्रेस अपनी पिछली बार की स्थिति को कायम रखती दिखाई नहीं पड़ती है. दिल्ली में एनडीए की सरकार बनाने की परिकल्पना के पीछे गुजरात में भाजपा को ज़बर्दस्त सफलता मिलने की उम्मीदें भी हैं.

पंजाब

सन 2012 में पंजाब में हुए विधानसभा चुनाव में शिरोमणि अकाली दल और भाजपा गठबंधन को अप्रत्याशित रूप से सफलता मिली थी. कांग्रेस अकाली सरकार के ख़िलाफ़ एंटी इनकम्बैसी फैक्टर का फ़ायदा नहीं उठा पाई.

इस बार कांग्रेस अपेक्षाकृत संगठित है और अकाली दल के प्रति जनता के मन में शिकायतें हैं. इस बार आम आदमी पार्टी भी चुनाव मैदान में है. सम्भव है यह पार्टी सीट न निकाल पाए, पर वोट काटेगी. सवाल है किसके?

प्रदेश के कुछ इलाक़ों में नरेंद्र मोदी के नाम पर भी वोट माँगे जा रहे हैं. बावजूद इसके अमृतसर में भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को कांग्रेस प्रत्याशी अमरिंदर सिंह कड़ी चुनौती दे रहे हैं.

इमेज कॉपीरइट AFP

जेटली पहली बार चुनाव में उतरे हैं और उनके लिए यह सीट आसान नहीं लगती. गुरदासपुर सीट पर मौजूदा सांसद प्रताप सिंह बाजवा के ख़िलाफ़ भाजपा से तीन बार सांसद रह चुके विनोद खन्ना मैदान में हैं.

सवाल है क्या कांग्रेस सन 2009 की सफलता को दोहरा पाएगी? सन 2009 में पजाब से कांग्रेस ने लोकसभा की कुल 13 में से 8 सीटें जीतीं थीं. अकाली दल को 4 और भाजपा को एक सीट मिली थी.

तेलंगाना

चूंकि आंध्र प्रदेश में विधानसभा चुनाव भी हो रहे हैं, इसलिए नए राज्य तेलंगाना की विधानसभा और सरकार का स्वरूप भी आज तय होगा. सीमांध्र की सरकार का फ़ैसला 7 मई को होने वाले आठवें दौर में होगा.

तेलंगाना का गठन दो जून के पहले सम्भव नहीं था, इसलिए राज्य के वर्तमान विवरण के आधार पर चुनाव हो रहा है. भविष्य के भौगोलिक और प्रशासनिक विभाजन के मद्देनज़र ये चुनाव इस प्रकार कराए जा रहे हैं कि चुनाव के बाद दोनों राज्यों की राजनीतिक वास्तविकता दिखाई पड़े.

राज्य की 42 लोकसभा सीटों और 294 सदस्यीय विधानसभा के लिए चुनाव दो चरणों में 30 अप्रैल और सात मई को होंगे. पहले चरण में तेलंगाना में चुनाव होंगे जबकि रायलसीमा एवं तटीय आंध्र प्रदेश (सीमांध्र) में दूसरे चरण में चुनाव कराए जाएंगे.

इमेज कॉपीरइट AP

तेलंगाना के पास 17 लोकसभा सीटें और 119 विधानसभा क्षेत्र हैं, जबकि सीमांध्र में 25 लोकसभा सीटें और 175 विधानसभा क्षेत्र हैं. चुनाव आयोग ने पहले ही स्पष्ट कर दिया है कि जो भी उम्मीदवार अपने क्षेत्र से विधायक चुना जाएगा, वह स्वत: उस राज्य का सदस्य होगा.

तेलंगाना के अलावा आज बिहार में एक, गुजरात में सात, उत्तर प्रदेश में दो और पश्चिम बंगाल में एक विधानसभा सीट पर भी उपचुनाव होना है. इन परिणामों के कोई गहरे राजनीतिक निहितार्थ नहीं हैं.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार