बीबीसी का फ़ोन क्यों काट रहे हैं ‘अस्सी के काशी’?

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नरेंद्र मोदी के बारे में बीबीसी हिंदी रेडियो पर अपनी राय ज़ाहिर करने के बाद बनारसवासी वरिष्ठ साहित्यकार काशीनाथ सिंह कई जगहों पर अपने बयान से पलट गए, पर जब बीबीसी ने इस बारे में उनसे बात करनी चाही तो उन्होंने सवाल सुनने के बाद फ़ोन ही काट दिया.

बीबीसी हिंदी रेडियो को इसी साल 16 मार्च को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था, “धर्म और जाति को अबकी मुझे लगता है कि बनारस की जनता ठेंगा दिखाएगी और कहीं न कहीं मोदी के पक्ष में लोग जाएंगे.”

ये इंटरव्यू प्रसारित होने के बाद साहित्यकार बिरादरी में काशीनाथ सिंह की कड़ी आलोचना हुई. बहुत सारे लोगों के लिए ये अप्रत्याशित बात थी क्योंकि काशीनाथ ख़ुद को हमेशा भारतीय जनता पार्टी और उसकी विचारधारा के विरुद्ध बताते रहे हैं.

लेकिन आलोचना होने पर उन्होंने बीबीसी पर ग़लत तरीक़े से बयान को पेश करने का आरोप लगा दिया.

बयान से पलटे

हिन्दी पत्रिका ‘शुक्रवार’ को दिए साक्षात्कार में जब उनसे इस बारे में सवाल पूछा गया तो उनका कहना था, “उन्होंने (बीबीसी ने) जो दिखाया वह पूरी बात नहीं थी. बात को काटकर उन्होंने प्रसारित किया जिससे भ्रम पैदा हुआ.”

यही नहीं, अभी हाल ही में अंग्रेजी पत्रिका ‘गवर्नेंस नाउ’ में भी उन्होंने इस बारे में बात की है. यहां काशीनाथ सिंह एक क़दम और आगे बढ़ गए हैं. उन्होंने कहा,“रिपोर्टर को जैसे ही उसकी मनचाही बाइट मिल गई, उसने फ़ोन काट दिया.” गवर्नेंस नाउ से बातचीत में वो आगे कहते हैं, “उसने मुझे अपनी बात भी पूरी करने नहीं दी.”

बीबीसी के बारे में दिए गए इन साक्षात्कारों के संबंध में हमने उनसे एक बार फिर 27 अप्रैल को उनका स्पष्टीकरण लेना चाहा.

पहले वो बातचीत के लिए तैयार हो गए लेकिन जैसे ही उनसे पूछा गया कि आप अपने बयान से क्यों पलट रहे हैं तो उन्होंने तुरंत फ़ोन काट दिया.

(सुनिए ये बातचीत का असंपादित ऑडियो)

काशीनाथ सिंह के 16 मार्च के इंटरव्यू का पूरा का पूरा ऑडियो यहाँ सुना जा सकता है. इसमें से कोई भी अंश संपादित नहीं किया गया है.

(सुनिए असंपादित इंटरव्यू)

लगभग सात मिनट की इसी बातचीत को संपादित कर प्रसारण योग्य बनाकर रेडियो पर उसी दिन अर्थात् 16 मार्च को शाम के कार्यक्रम दिनभर में प्रसारित किया गया था जिसे आप यहाँ सुन सकते हैं.

(सुनिए संपादित इंटरव्यू)

ये सभी रिकॉर्डिंग्स काशीनाथ सिंह से फ़ोन रिसीव करने से लेकर और बातचीत के अंत तक की कहानी कहते हैं.

आम बनारसी

दरअसल, बात क़रीब डेढ़ महीने पहले की है. जब ये तय हो गया कि भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी उत्तर प्रदेश की वाराणसी सीट से उम्मीदवार होंगे तो इस बारे में आम बनारसी की राय जानने की कोशिश की गई.

इसके लिए ‘काशी का अस्सी’ के लेखक काशीनाथ सिंह से बात करने का फ़ैसला किया गया कि उनसे पूछा जाए कि मोदी की उम्मीदवारी को आम बनारसी किस तरह से देखता है. उन्हें फ़ोन किया गया, जिज्ञासा प्रकट की गई बातचीत की और विषय भी बता दिया गया.

उनका जवाब आया कि कुछ देर बाद बात करते हैं. क़रीब आधे घंटे बाद उन्हें दोबारा फ़ोन किया गया और अब वो पूरी तरह से बातचीत को तैयार थे.

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Image caption काशीनाथ सिंह ने अन्य जगहों पर दिए साक्षात्कार में बीबीसी को दिए साक्षात्कार से पलट गए

इस दौरान उन्हें बता दिया गया था कि यह इंटरव्यू रेडियो के लिए है और इसे रिकॉर्ड किया जाएगा.

क़रीब सात मिनट तक उनसे बात हुई. इस दौरान कुछ और सवाल भी सामने आए, जिनका काशीनाथ सिंह जी ने जवाब दिया और फिर रेडियो पर इसे प्रसारण योग्य बनाकर लगभग साढ़े तीन मिनट लंबा इंटरव्यू रेडियो पर प्रसारित हुआ.

उसके बाद ये बातचीत लिखित रूप में बीबीसी की वेबसाइट पर भी प्रकाशित हुई.

पढ़ें पूरी खबर

आलोचना

कुछ लोगों ने काशीनाथ सिंह के इन विचारों को लेकर आपत्ति जताई. ख़ासकर सोशल मीडिया और कई साहित्यिक वेबसाइट्स पर उनके इस बयान की ज़बर्दस्त आलोचना हुई.

उन पर आरोप लगाए गए कि वो मोदी समर्थक हो गए हैं, तो काशीनाथ सिंह ने संभवत: इस बारे में शुरुआती सफ़ाई ये दी कि मुझसे आम बनारसी की सोच के बारे में पूछा गया था और मैंने उसी का जवाब दिया.

ये बात ठीक थी. टेलीफ़ोन पर उनसे हुए साक्षात्कार की शुरुआत इसी सवाल से हुई थी.

लेकिन उसके बाद कुछेक पत्रिकाओँ में काशीनाथ सिंह के साक्षात्कार प्रकाशित हुए जिनमें वो अपनी बातों से न सिर्फ़ पलट गए बल्कि बीबीसी के ऊपर उनकी बातों को ग़लत तरीक़े से पेश करने के आरोप लगाने लगे.

काशीनाथ सिंह जी शायद भूल गए कि उनके साक्षात्कार के एक-एक शब्द सुरक्षित हैं. हमें काशीनाथ सिंह जी की प्रतिक्रिया का इंतज़ार है. प्रतिक्रिया जैसे ही मिलेगी, पाठकों तक पहुंचाई जाएगी.

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