राहुल और केजरीवाल से मोदी ज़्यादा 'सोशल'

मोदी, केजरीवाल, राहुल

गूगल हैंगआउट्स, होलोग्राम मीटिंग, ट्विटर और फ़ेसबुक- ये शब्द, इस साल भारतीय चुनावों में बार-बार सुने जा रहे हैं.

भारत जैसे विशाल देश में चुनाव प्रचार आसान काम नहीं और राजनेता टेक्नोलॉजी के कमाल की थोड़ी-बहुत मदद लेने से गुरेज़ नहीं करते.

देश की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी (भाजपा), सत्ताधारी कांग्रेस और नवोदित आम आदमी पार्टी (आप) मतदाताओं तक पहुंचने के लिए मतदाताओं का इस्तेमाल कर रहे हैं.

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फ़ेसबुक के 9.30 करोड़ यूज़र्स हैं और ट्विटर के भारत में करीब 3.30 करोड़ अकाउंट हैं. विश्लेषकों का कहना है कि भारत के 81.40 करोड़ मतदाताओं की तुलना में यह संख्या बहुत कम है.

लेकिन कांटे की टक्कर में हर वोट का महत्व है और तीनों दल इसे अच्छी तरह जानते हैं. तो वोटों की आभासी जंग में कौन आगे है? और कौन सा नेता भारत के युवा मतदाताओं को लुभा रहा है?

बीबीसी मॉनीटरिंग ने सोशल मीडिया विश्लेषक उपकरण क्रिमसन हेक्सागॉन का इस्तेमाल इन सवालों का जवाब पाने के लिए किया.

नरेंद्र मोदी

इन चुनावों में भाजपा के प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी नरेंद्र मोदी और कांग्रेस के उपाध्यक्ष राहुल गांधी के बीच मुख्य मुक़ाबला है. हालांकि 'आप' के नेता अरविंद केजरीवाल भी काफ़ी ध्यान खींच रहे हैं.

कई विश्लेषकों का मानना है कि इन चुनावों में व्यक्ति आधारित प्रचार अमरीका के राष्ट्रपति चुनाव की तर्ज पर हो रहा है.

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मोदी और केजरीवाल लोगों से संवाद के लिए अपने निजी ट्विटर अकाउंट का इस्तेमाल कर रहे हैं तो राहुल गांधी के विचार कांग्रेस के आधिकारिक अकाउंट से आते लग रहे हैं.

नरेंद्र मोदी, अरविंद केजरीवाल और कांग्रेस के ट्विटर अकाउंट का 20 मार्च से 23 अप्रैल तक किया गया विश्लेषण बताता है कि भाजपा नेता यूज़र्स से संवाद बनाए रखने में ज़्यादा कामयाब रहे हैं.

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भाजपा के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार ट्विटर पर काफ़ी सक्रिय हैं और इस मंच का इस्तेमाल युवा मतदाताओं तक पहुंचने के लिए करते हैं.

भाजपा सोशल मीडिया मंचों का महत्व समझती है और उसने बाक़ियों के मुक़ाबले काफ़ी पहले इसके माध्यम से प्रचार शुरू कर दिया था.

भाजपा के राष्ट्रीय आईटी सेल के अरविंद गुप्ता ने बीबीसी से कहा, "मोदी किसी रैली को संबोधित कर रहे होते हैं तो उनका वही संदेश सोशल मीडिया पर गूंजने लगता है, उस रैली का इंटरनेट पर प्रसारण किया जाता है, उसे फ़ोन पर सुना जा सकता है- एक सामान्य फ़ोन कॉल के ज़रिए भी."

गुप्ता का बयान भाजपा की सोशल मीडिया और संचार रणनीति की विशालता को रेखांकित करता है, जिसने इसके विरोधियों को पछाड़ रखा है.

नरेंद्र मोदी और उनकी टीम ने सोशल मीडिया पर अपना प्रचार कांग्रेस और 'आप' के मुकाबले काफ़ी पहले शुरू कर दिया था. सुनने वाले लोगों की संख्या और जुड़ाव के नज़रिए से मोदी अरविंद केजरीवाल और राहुल गांधी से काफ़ी आगे हैं.

यह भाजपा की सोची-समझी योजना के साथ ही सोशल मीडिया पर लगाए गए भारी मात्रा में पैसे और संसाधनों की वजह से हुआ है.

भाजपा की आधिकारिक टीम के अलावा भारत भर में और विदेशों में फैल कई सपोर्ट ग्रुप भी पार्टी की मदद कर रहे हैं. ये ग्रुप कई ट्विटर एकाउंट चलाते हैं और उन्हें सोशल मीडिया मंचों पर मोदी की मौजूदगी को मज़बूत करने के लिए इस्तेमाल करते हैं.

इनमें से कई एकाउंट तो सिर्फ़ मोदी के ट्वीटों को री-ट्वीट करते हैं और हिंदू राष्ट्रवादी नेता की आलोचनाओं का जवाब देते हैं.

दूसरी तरफ़ आप अपने स्वयंसेवकों की बड़ी संख्या पर ही निर्भर है क्योंकि इसके पास मुद्रा की शक्ति नहीं है. पार्टी का जुड़ाव ज़्यादा वास्तविक लगता है.

कांग्रेस इस दौड़ में देर से शामिल हुई है और वह तो बस आप और भाजपा तक पहुंचने की कोशिश कर रही है.

ट्विटर के इस ट्रेंड से लोगों का उस व्यक्ति से मज़बूत जुड़ाव नज़र आता है जो भारत का अगला प्रधानमंत्री बनने की दौड़ में आगे है.

मार्च 20 से अप्रैल 22 तक भाजपा नेता के ट्वीटों को 2,83,323 बार री-ट्वीट किया गया. इसी अवधि के दौरान मोदी के ट्विटर हैंडल का ज़िक्र 8,18,781 बार किया गया.

ये आंकड़े बताते हैं कि वह इन चुनावों की सोशल मीडिया जंग में अपने विरोधियों से आगे हैं. पिछले कुछ दिनों से उनकी ट्विटर फॉलोइंग में भी लगातार वृद्धि हुई है और 30 अप्रैल को यह 38.50 लाख थी.

अरविंद केजरीवाल

आम आदमी पार्टी के सोशल मीडिया रणनीतिकार अंकित लाल कहते हैं, "भारत जैसे विशाल और वैविध्य वाले देश के चुनावों में जीत का अंतर बहुत कम होगा और सोशल मीडिया ही उस अंतर को लांघेगा."

लाल के बयान से पता चलता है कि नए लोगों से संवाद क़ायम करने के लिए पार्टी सोशल मीडिया मंचों पर काफ़ी निर्भर कर रही है.

तो पार्टी के नेता अरविंद केजरीवाल पर कैसा प्रदर्शन कर रहे हैं? लोगों का उनसे जुड़ाव बहुत मज़बूत है लेकिन वो मोदी का मुक़ाबला नहीं करता.

20 मार्च से 22 अप्रैल के बीच आंदोलनकारी से राजनेता बने केजरीवाल के ट्वीट 89,492 बार री-ट्वीट किए गए. यह एक प्रभावशाली आंकड़ा है लेकिन मोदी के 2,83,323 री-ट्वीट्स के आधे से भी कम है.

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हालांकि केजरीवाल उनके ट्वीटों पर दिए गए जवाबों के मामले में मोदी से आगे हैं.

उनके ट्वीट पर 69,823 जवाब दिए गए जबकि मोदी के ट्वीटों पर 68,298 ही टिप्पणियां आई थीं. उनके ट्विटर हैंडल का 7,73,246 बार ज़िक्र किया गया.

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ऐसे ज़्यादातर ट्वीट उन दिनों में किए गए थे जब आम आदमी पार्टी के नेता सुर्खियों में रहे.

आठ अप्रैल को केजरीवाल को एक नाराज़ समर्थक ने थप्पड़ मार दिया था और इससे उनके प्रति सहानुभूति उमड़ पड़ी. उनके अकाउंट में एक ही दिन में 80,000 जवाब, री-ट्वीट मिले.

राहुल गांधी

राहुल गांधी का सोशल मीडिया पर प्रदर्शन कुछ-कुछ उनकी पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट से ही जुड़ा हुआ है.

राहुल गांधी को प्रचार में युवा नेता के रूप में पेश किए जाने के बावजूद कांग्रेस इस मामले में भाजपा और आप से पिछड़ती नज़र आ रही है.

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पार्टी के आधिकारिक ट्विटर अकाउंट ने अपनी टिप्पणी के 67,203 री-ट्वीट दर्ज किए, जो मोदी और केजरीवाल के मुक़ाबले कम हैं.

राहुल गांधी और कांग्रेस के फीके प्रदर्शन के गवाह पार्टी के अकाउंट को मिलने वाले जवाब और उसका ज़िक्र भी है.

इस अवधि के दौरान पार्टी के ट्वीटों पर सिर्फ़ 14,770 जवाब ही आए हैं. राहुल गांधी और कांग्रेस का ज़िक्र 1,27,772 बार किया गया है.

भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के आधिकारिक अकाउंट में फॉलोअर्स की संख्या 30 अप्रैल तक 1,73,000 थी.

(इनपुट-मुकेश अधिकारी)

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