चुनौतियों, आशंकाओं के बीच चारधाम यात्रा शुरू

  • 4 मई 2014
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उत्तराखंड में चारधाम यात्रा शुरू हो चुकी है. गंगोत्री और यमुनोत्री के कपाट दो मई को खुल गए थे और रविवार को केदारनाथ के कपाट भी खुल चुके हैं जहां पिछले साल 16-17 जून को भीषण प्राकृतिक आपदा आई थी और बड़े पैमाने पर तबाही हुई थी. पांच मई को बदरीनाथ के कपाट खुलेंगे.

राज्य सरकार ने चारधाम यात्रा पूरे ज़ोरशोर से शुरू तो कर दी लेकिन मौसम की विकटता की आशंकाओं और पुनर्निर्माण और मरम्मत के आधे-अधूरे काम चिंता ही बढ़ा रहे हैं.

चारधाम यात्रा पर जाने वाले यात्रियों में ख़ासा उत्साह देखा जा रहा है. दिल्ली से आईं 52 साल की अनीता शर्मा पहले जत्थे में शामिल हैं.

उनका कहना है, “अकेली घर से निकली हूं, इस बात से आप समझ सकते हैं कि मेरे अंदर आपदा का बिल्कुल डर नहीं है. बस सरकार यात्रियों की सुविधा का ख्याल रखे. अच्छा मैसेज जाना चाहिए आगे आने वाले यात्रियों के लिए.”

तैयारी

चेन्नई से 60 साल की उषा देवी भी यात्रियों में एक हैं. वो कहती हैं, “पिछले साल की आपदा दिल दहलाने वाली थी. लेकिन इस डर के आगे जिया नहीं जा सकता. डर को पीछे छोड़ते हुए नई शुरुआत करनी होगी.”

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Image caption दिल्ली की अनीता शर्मा का कहना है कि तीर्थयात्रियों में आपदा का डर नहीं है.

इसी तरह के उत्साह से भरे हुए हैं हैदराबाद से 70 साल के एसबीएल नरसिम्हा राव. वो कहते हैं, “पिछले साल कुदरत का कहर भोगना पड़ा था यात्रियों को. लेकिन हर बार समय एक जैसा नहीं होता. ज़िंदगी पटरी पर आ जाती है. हमें आपदा का डर नहीं. हम श्रद्धा के आगे नतमस्तक हैं.”

गुजरात के भावनगर से आए 62 साल के अमाछेभाई भीमानी कहते हैं, “मैं पहली बार यात्रा पर निकला हूं. चार धाम के लिए अगाध श्रद्धा है. हमारी यात्रा मंगलमय होगी. हमें किसी तरह का डर नहीं है.”

यात्रियों के जत्थे में विदेशी भी शामिल हैं. इटली से आए 42 साल के गीज़ेपे लारोटोंडा शौकिया पत्रकारिता करते हैं.

लारोटोंडा कहते हैं, “हमने टीवी और इंटरनेट पर आपदा को देखा था. मैं यह देखने आया हूं कि वहां के लोग कैसे इस आपदा से उबरे हैं और यात्रियों में कितना उत्साह है, सरकार की कितनी तैयारी है.”

प्राकृतिक आपदा से सबसे ज़्यादा तबाही केदार घाटी में हुई थी. उत्तराखंड के मुख्य सचिव सुभाष कुमार ने दो दिन पहले देहरादून में चारधाम यात्रा के तैयारियों की समीक्षा की.

सुभाष कुमार दावा करते हैं, “आपदा के कहर के बाद बदरीनाथ, गंगोत्री, यमुनोत्री में सामान्य स्थिति बहाल हो गई है और इन धामों की यात्रा में अब कोई दिक्कत नहीं है.”

हालांकि सरकार यह भी मानती है कि स्थिति सामान्य होने में समय लगेगा.

मुख्य सचिव के साथ अधिकारियों की बैठक में तय किया गया कि जब तक केदारनाथ यात्रा मार्ग पर होटल, ढाबे नहीं खुल जाते हैं, गढ़वाल मंडल विकास निगम (जीएमवीएन) लंगर चलाएगा. जीएमवीएन को प्रतिदिन 1,000 लोगों के लिए पके हुए खाने की व्यवस्था करने के लिए कहा गया है. इसके अलावा जीएमवीएन रिफ़्रेशमेंट प्वाइंट भी बनाएगा.

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Image caption इटली के गीज़ेपे लारोटोंडा पिछले साल की आपदा के बाद बदली परिस्थिति को देखने आए हैं.

सुभाष कुमार के मुताबिक, “इस बार केदारनाथ यात्रा मार्ग के संवेदनशील स्थानों पर एसडीआरएफ़ और पुलिस के जवान यात्रियों की मदद के लिए तैनात रहेंगे. एसडीआरएफ की चार टीमें केदारघाटी में तैनात की गई है. केदारनाथ में 50, लिंचैली में 25, भीमताल में 25 और भीमबली में 25 जवान तैनात हैं. इसके अलावा पुलिस के आउट पोस्ट भी बनाए गए हैं.”

बायोमीट्रिक पंजीकरण

इस बीच कुछ मीडिया टीमों ने केदारनाथ का दौरा किया. टीवी पत्रकार किशोर रावत उनमें से एक हैं. किशोर रावत कहते हैं, “केदारनाथ जाने के लिए जो नया पैदल मार्ग रामबाड़ा से निकाला गया है, वह अब भी जोखिम भरा है. और वहां मिट्टी कच्ची है और पूरे रास्ते में बर्फ़ जमा है.”

हालांकि बर्फ़ काटकर रास्ता निकाल दिया गया है लेकिन उनका कहना है कि यात्रा को पूरी तरह महफ़ूज़ नहीं कहा जा सकता. इस बीच मौसम विभाग ने भी पांच मई के लिए हाई अलर्ट जारी कर दिया है.

मौसम विभाग के निदेशक आनंद शर्मा के मुताबिक, “हल्की से मध्यम बारिश की संभावना जताई गई है.” फिर भी यात्रियों को सावधान रहना होगा.

पिछले साल आपदा के बाद मौसम विभाग को दिए जाने वाले ज़रूरी और आपात उपकरणों की कमी को लेकर बहुत शोर उठा था.

चारधाम के विकट भूगोल और अप्रत्याशित मौसम के बारे में कोई फौरी सूचना का उपकरण अभी नहीं लगाया जा सका है, मिसाल के लिए राडार की व्यवस्था की बात उठी थी लेकिन केदारघाटी में या बदरीनाथ घाटी में या गंगोत्री घाटी में ऐसा कोई राडार नहीं लग पाया है.

'रफ़्तार धीमी'

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चारधाम यात्रा के लिए पंजीकरण की संख्या अभी धीमी है. ऋषिकेश से स्थानीय पत्रकार दुर्गा नौटियाल बताते हैं, “गढ़वाल मंडल विकास निगम के पास यात्रियों की बुकिंग की संख्या में गिरावट आई है. एक मई को एक बस ही रवाना हो पाई. इस बार यात्रियों की संख्या पिछले सालों के मुक़ाबले कम ही रहेगी. या हो सकता है चुनाव नतीजे आने के बाद और छुट्टियां शुरू होने के बाद यात्रा कुछ गति पकड़े.”

यात्रियों की संख्या में संभावित कमी से स्थानीय दुकानदार, होटल-ढाबे वाले और खच्चर मालिक भी चिंतित हैं. उनकी आजीविका का मुख्य आधार यात्रा सीज़न ही रहा है.

इस बीच यात्रियों और वाहनों का रिकॉर्ड रखने के लिहाज़ से सरकार ने नई व्यवस्था कर दी है. सारे यात्रियों का बायोमीट्रिक पंजीकरण कराया गया है और उन्हें टोकन दिया जा रहा है. जो उन्हें अपने गंतव्यों पर पहुंचने पर भी दिखाना होगा. इस तरह हर यात्री का रिकॉर्ड सरकार के पास रहेगा.

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