क्योंकि 'बहू' उड़ा रही है राहुल गांधी की नींद

स्मृति ईरानी, राहुल गाँधी इमेज कॉपीरइट AP

शाम के साढ़े चार बजे हैं और तापमान 39 डिग्री पार कर रहा है.

अमेठी संसदीय क्षेत्र के मुसाफिरखाना जाने वाली सड़क पर एकाएक मुझे धूल के बादल दिखते हैँ और हम गाड़ियों के काफ़िले में शामिल हो जाते हैं.

(क्या रॉबर्ट वाड्रा कांग्रेस के लिए बोझ बन गए हैं?)

लगभग तीन किलोमीटर तक पगडंडियों पर चलकर ये काफ़िला रुकता है और 'अबकी बार मोदी सरकार' के नारे गूंजते हैं.

काफ़िले में सबसे आगे चलने वाली एसयूवी से एक महिला उतरती हैं और कई हाथ उनकी ओर बढ़ जाते हैं.

बादामी साड़ी, मांग में सिंदूर और पैरों में चप्पल पहने स्मृति ईरानी एक तख़्त पर खड़ी होकर गुहार लगाती हैं, "हम आ गए हैं भैया, अब यहाँ से जाने वाले नहीं हैं."

विकास

बीबीसी से बातचीत में स्मृति ईरानी लगातार अमेठी में मूलभूत सुविधाओं के अभाव की बात करती रहीं.

(कुमार विश्वास पर 'हमला')

उन्होंने कहा, "आप घंटों मेरे साथ घूमे हैं, ख़ुद ही देख लीजिए, न तो अच्छी सड़क है, न पीने का पानी और न ही महिलाओं के लिए शौचालय. अगर 10 वर्ष सांसद रहते हुए कांग्रेस के उम्मीदवार ने ये दिया है तब मुझे क्यों नहीं जीतना चाहिए."

भारतीय जनता पार्टी ने भी अमेठी चुनाव के लिए रात दिन एक कर दिया है.

सोमवार को पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी पिछले इतिहास तोड़ते हुए यहाँ स्मृति के लिए वोट मांगने आ रहे हैं.

किराये पर घर

स्मृति ईरानी के साथ गाड़ी से सफऱ करने के दौरान साफ़ हो जाता है कि राहुल गांधी को हराना इतना आसान भी नहीं है.

(...तो मोदी ऐतिहासिक नेता होंगेः विश्वास)

उन्होंने मुझ से ही पलट कर पूछा, "क्या लग रहा है?"

लेकिन इससे पहले कि मैं उन्हे जवाब देता उन्होंने ख़ुद ही कहा, "देखिए मुझ पर बाहरी होने के आरोप लगाए जाते हैं, जबकि मैंने 23 दिन से गौरीगंज में किराए पर घर लेकर रहना शुरू कर दिया है. उनका क्या जो हमेशा मुंशीगंज के गेस्ट हाउस में रहते हैं."

महासंग्राम

सोमवार शाम तक अमेठी में चुनाव प्रचार ख़त्म हो जाएँगे लेकिन यहाँ से कांग्रेस सांसद राहुल गांधी के लिए चुनौती अभी बरक़रार है.

(राहुल या कुमार विश्वास?)

2009 के संसदीय चुनाव में राहुल गांधी को अमेठी में साढ़े चार लाख से भी ज़्यादा मत मिले थे और उनकी जीत का अंतर साढ़े तीन लाख से ज़्यादा का था.

लेकिन राहुल के लिए चुनाव 2014 की डगर पहले जितनी आसान नहीं दिखती है.

'क्योंकि सास भी कभी बहू थी' धारावाहिक में प्रमुख भूमिका निभा चुकी स्मृति ईरानी भारतीय टेलीविज़न जगत का एक लोकप्रिय चेहरा रहीं हैं.

राहुल का प्रचार

वहीं आम आदमी पार्टी ने तो चुनाव की घोषणआ से काफ़ी पहले ही अमेठी से अपने उम्मीदवार कुमार विश्वास का नाम घोषित कर दिया था.

(प्रियंका गाँधी की बैठक)

आम आदमी पार्टी के प्रमुख अरविंद केजरीवाल अपने चुनाव क्षेत्र वाराणसी से समय निकाल कर अमेठी में प्रचार भी करते रहे हैं.

असलियत ये भी है कि राहुल और प्रियंका गांधी इस चुनाव प्रचार में जितनी मशक्कत करते दिख रहे हैं उतनी चुनावी कसरत करते वो मुझे तो पहले कभी नहीं दिखे.

हालांकि कांग्रेस पार्टी के वरिष्ठ नेता जो अमेठी में राहुल के प्रचार की देख-रेख कर रहे हैं वो उनकी जीत के प्रति ख़ासे आश्वस्त दिखते हैं.

प्रदेश के एक वरिष्ठ नेता ने नाम न लिए जाने की शर्त पर कहा, "जीत का अंतर देख लीजिएगा, फिर सब कुछ साफ़ हो जाएगा विरोधी खेमे में."

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