एयर एशिया इंडिया को कामकाज की इजाज़त

एयर एशिया का विमान इमेज कॉपीरइट Reuters

एशिया में सस्ती हवाई सेवा उपलब्ध कराने वाली सबसे बड़ी कंपनी एयर एशिया और भारत के टाटा समूह की साझेदारी वाली कंपनी एयर एशिया इंडिया को परिचालन की अनुमति मिल गई है.

विदेशी निवेश वाली यह पहली एयरलाइन कंपनी होगी जो भारत में अपनी सेवाएं देगी.

भारत ने विमानन क्षेत्र में विदेशी निवेश की अनुमति साल 2012 में दी थी. विमानन क्षेत्र के विकास और अर्थव्यवस्था को गति देने के लिए सरकार ने यह फ़ैसला लिया था.

किराए में बढ़ती प्रतिस्पर्धा और ईंधन की बढ़ती क़ीमतों की वजह से भारतीय विमानन कंपनियां घाटे में चल रही हैं.

फ़ायदे का सौदा

देश की प्रमुख छह विमानन कंपनियों में से केवल एक 'इंडिगो' ही मुनाफ़ा कमा रही है.

हाल के सालों में भारत में हवाई यात्रा की मांग में तेज़ी आई है और यह इस क्षेत्र के तेज़ी से बढ़ते विमानन बाज़ार में से एक है.

तेज़ी से बढ़ रहे इस बाज़ार के अधिक से अधिक हिस्से पर कब्ज़ा करने के लिए और अधिक से अधिक यात्रियों को लुभाने के लिए विमानन कंपनियों ने अपने किरायों में कटौती की है.

किराए में कटौती और ईंधन की बढ़ती क़ीमतों ने मिलकर प्रमुख विमानन कंपनियों के मुनाफ़े को कम कर दिया है.

एयर एशिया, एशिया में कम क़ीमत पर हवाई सेवा उपलब्ध कराने वाली सबसे बड़ी कंपनी है. उसका कहना है कि वह भारत में अपने प्रतिद्वंदियों से भी कम क़ीमत पर हवाई सेवा उपलब्ध कराने की योजना बना रही है.

नई लड़ाई

एयर एशिया इंडिया के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) मिट्टू चांदिल्य ने कहा कि कंपनी देश की सबसे सस्ती एयरलाइन पर काम कर रही है.

उन्होंने भरोसा जताया कि सबसे सस्ती सेवा देने के बावजूद उनकी कंपनी मुनाफ़ा कमाने में सफल रहेगी.

हालांकि कुछ विश्लेषकों का मानना है कि एयर एशिया इंडिया के आने से विमानन कंपनियों के बीच क़ीमतों को लेकर एक नई लड़ाई शुरू होगी और इससे उनके मुनाफ़े में कमी आएगी.

सेंटर फ़ॉर एशिया पैसेफ़िक एविएशन (सीएपीए) के दक्षिण एशिया के मुख्य कार्यकारी कपिल कौल कहते हैं, ''घरेलू विमानन कंपनियों की स्थिति पहले से खराब है और एयर एशिया के आने से मौज़ूदा विमानन कंपनियों की चुनौती बढ़ेगी.''

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