सीबीआई करेगी शारदा चिट फंड मामले की जांच

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Image caption सुप्रीम कोर्ट ने सुनाया अहम फैसला

सुप्रीम कोर्ट ने शारदा चिट फंड घपले की जांच सीबीआई को सौंपने का फैसला किया है. पश्चिम बंगाल सरकार अब तक इस मामले की जांच सीबीआई को सौंपने का विरोध करती रही है.

अभी तक एक विशेष जांच टीम, एक न्यायिक आयोग, प्रवर्तन निदेशालय और गंभीर जालसाजी जांच कार्यालय इसकी छानबीन कर रहे थे.

इस घपले के केंद्र में शारदा ग्रुप और उसके गिरफ़्तार प्रमुख सुदीप्तो सेन हैं.

लगभग एक साल पहले ये घपला प्रकाश में आया, तब से बंगाल पुलिस इस मामले की जांच कर रही थी, लेकिन शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि इस मामले में हुई गंभीर व्यापारिक अमियमितताओं को देखते हुए वो इसकी जांच करने में सक्षम नहीं होगी क्योंकि इसमें 70 से ज्यादा कंपनियां गैर कानूनी तरीके से बंगाल, असम, त्रिपुरा, झारखंड और ओडिसा में धन जमा कर रही थीं.

अदालत का मानना है कि इस मामले के अंतरराष्ट्रीय परिणाम भी हो सकते हैं.

तृणमूल की आपत्ति

अदालत ने शुक्रवार को एक जनहित याचिका पर फैसला देते हुए जांच सीबीआई को सौंपने का आदेश दिया.

अदालत का कहना है कि इस मामले में उगाही गई राशि दस हजार करोड़ रुपये से भी ज़्यादा हो सकती है जो पश्चिम बंगाल सरकार के अनुमान से भी कहीं ज्यादा है.

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Image caption ममता बनर्जी की पार्टी को इस मामले से जोड़ कर देखा जा रहा है

इस मामले में राज्य की सत्ताधारी तृणमूल कांग्रेस के कई वरिष्ठ नेताओं के शारदा समूह से निकट संबंध होने के आरोप भी लगते रहे हैं.

पश्चिम बंगाल की सरकार इस मामले में सीबीआई जांच की यह कह कर आलोचना करती रही है कि राज्य की विशेष जांच टीम ने इस मामले की जांच में ख़ासी प्रगति की है और अगर इस मोड़ पर जांच सीबीआई को सौपी जाती है तो राज्य पुलिस का मनोबल गिरेगा.

जब राज्य सरकार की इस दलील को ख़ारिज कर दिया गया तो उसने आग्रह किया कि पश्चिम बंगाल को छोड़ कर अन्य राज्यों में इस केस से जुड़े मामले सीबीआई को सौंपे जाएं.

वहीं विपक्ष का कहना है कि तृणमूल इस मामले में सीबीआई की जांच नहीं चाहती है ताकि इसमें उसकी राजनीतिक भागीदारी उजागर न हो.

हालांकि विश्लेषकों का मानना है कि अगर सीबीआई ने इस मामले की जांच की तो पार्टी की 'स्वच्छ छवि' को नुकसान हो सकता है.

वहीं तृणमूल का कहना है कि शारदा समूह ने अपना व्यवसाय तब शुरू किया जब राज्य में वाम मोर्चे की सरकार थी.

वाम मोर्चा और काँग्रेस के चुनाव प्रचार में 'शारदा घपला' मुख्य मुद्दा रहा है. हाल ही में नरेंद्र मोदी ने घपले में ममता बनर्जी और उनकी पार्टी की कथित भागीदारी की कड़ी आलोचना की है.

घपले के एक साल पहले प्रकाश में आने के बाद से राज्य के जाँचकर्ताओं ने किसी भी राजनीतिक हस्ती से पूछताछ नहीं की है.

हालांकि वित्त मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले केंद्रीय संगठन प्रवर्तन निदेशालय ने हाल ही में तृणमूल काँग्रेस की नेताओं से इस सिलसिले में पूछताछ शुरू की है.

पहली पूछताछ तृणमूल काँग्रेस की लोकसभा उम्मीदवार अर्पिता घोष से की है. प्रवर्तन निदेशालय ने सुदिप्तो सेन के दिल्ली और कोलकाता स्थित आवास पर छापे मारे और माना जा रहा है कि तृणमूल काँग्रेस और शारदा घपले के बीच संबंध पर कुछ दिलचस्प सुराग उनके हाथ लगे हैं.

प्रवर्तन निदेशालय ने यह भी आरोप लगाया है कि उन्हें राज्य पुलिस से पर्याप्त सहयोग नहीं मिल रहा है.

आज़ के आदेश से तृणमूल की चुनावी संभावनाओं को 17 सीटों पर नुकसान होने की संभावना है. इन सभी 17 सीटों पर 12 मई को चुनाव होने हैं और इस आख़िरी चरण के चुनाव में इन ज़िलों से लाखों ऐसे मतदाता है जो इस घपले का शिकार हुए हैं.

क़रीब 17 लाख निवेशकों ने न्यायिक जाँच के लिए शिकायत दर्ज की है. पिछले एक साल में समूह के कुछ एजेंटों सहित 60 से ज़्यादा लोग आत्महत्या कर चुके हैं.

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