नेताओं से ज़्यादा बुद्धिमान हैं एक्टरः नगमा

  • 11 मई 2014
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फ़िल्म अभिनेत्री और मेरठ से कांग्रेस उम्मीदवार नगमा का कहना है कि बॉलीवुड एक्टरों को बेवकूफ़ समझना ग़लत है.

वाराणसी में कांग्रेस उम्मीदवार अजय राय के प्रचार के लिए पहुंची नगमा ने बीबीसी से इंटरव्यू में अरविंद केजरीवाल, नरेंद्र मोदी और सत्ता विरोधी लहर पर खुलकर अपनी बात रखी.

नगमा, मेरठ से आप ख़ुद प्रत्याशी है. अब तक प्रचार कैसा रहा है और क्या उम्मीदें हैं.

बहुत अच्छा रहा है प्रचार और उम्मीद भी सकारात्मक ही है. जो होगा अच्छा ही होगा. वहां तो बहुत सीधी लड़ाई है.

बीजेपी के मौजूदा सांसद हिंदू हैं और बाकी दोनों पार्टियों के मुस्लिम हैं. वहां ध्रुवीकरण बहुत साफ़ होता है. लेकिन मुझे उम्मीदवार बनाने से फ़र्क पड़ा है. लेकिन कम समय की वजह से...... मुझे जीत का पूरा यकीन है.... लेकिन देखते हैं, क्या होता है.

वाराणसी में राहुल गांधी के साथ रोड शो में प्रचार के बाद आपको क्या लगता है?

हमारी लड़ाई सोच की लड़ाई है. हमारी एक विचारधारा है, धर्मनिरपेक्ष, गंगा-जमुनी तहज़ीब की, सबको साथ लेकर चलने की. दो ही पार्टियां हैं. या तो बीजेपी आएगी या कांग्रेस आएगी.

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बीजेपी वाले देश को बांटने की बात कर रहे हैं, चाहे वह गिरिराज सिंह हों या प्रवीण तोगड़िया हों.

लेकिन राहुल गांधी के बीजेपी के आने पर 22,000 लोगों के मारे जाने के बयान पर विवाद हो गया है.

ये लोग ऐसी बातें कह रहे हैं- कि आज़मगढ़ आतंक का गढ़ है. और ऐसी बातें बहुत सोची-समझी रणनीति के तहत कही जा रही हैं. आप विकास की बात करो, आप सशक्तिकरण की बात करो, आप ऊंची जाति-नीची जाति की बात करते हो. जब जाति और धर्म को बीच में लाया जाता है तो विवाद खड़े हो जाते हैं.

दस साल केंद्र में यूपीए सरकार रही है, ऐसे में सत्ता-विरोधी लहर को लेकर आपका क्या कहना है?

देखिए जब 10 साल आपकी सरकार रही हो तो सत्ता-विरोधी लहर तो होगी, इसमें कोई दो राय नहीं है. लेकिन भारतीय लोगों को जा-जाकर बताना पड़ता है, बात करनी पड़ती है. देखिए जहां भारत में सुई भी नहीं बनती थी, वहां आज हवाई जहाज़ बन रहे हैं, परमाणु अस्त्र बन रहे हैं. हम कहां से कहां पहुंच गए हैं.

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यह सब विकास यूपीए सरकार के कार्यकाल में ही हुआ है. आम आदमी के लिए जो योजनाएं हैं, चाहे वह मनरेगा हो या शिक्षा का अधिकार, भोजन का अधिकार, लोकपाल बिल, सूचना का अधिकार जैसी उपलब्धियां सिर्फ़ कांग्रेस के राज में ही हासिल हो सकती थीं.

क्या राहुल गांधी देश में स्वीकार्य हैं?

बिल्कुल, वह यूथ आइकॉन हैं और हमारे देश में 70 फ़ीसदी युवा हैं.

और नरेंद्र मोदी?

मुझे लगता है कि नरेंद्र मोदी सिर्फ़ मीडिया में प्रदर्शन कर रहे हैं.

केजरीवाल के बारे में आप क्या कहेंगी?

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अरविंद केजरीवाल के बारे में मैंने साफ़ कहा है कि वह आरएसएस के एजेंट हैं. क्योंकि आरएसएस जानता है कि वह कांग्रेस के वोट नहीं तोड़ सकता. क्योंकि वह विभाजनकारी हैं. वह देश को विभाजित कर के वोट पाना चाहते हैं.

आप ही बताइए कि यह सोचना तार्किक ही है कि एक आईआरएस अधिकारी के पास इतने पैसे कहां से आए कि वह 400 प्रत्याशी लड़ा रहा है. यह कोई मज़ाक़ नहीं है.

लेकिन लोगों ने उनका समर्थन किया है.

यह सब इतने से समर्थन से नहीं हो सकता. आप भी जानते हैं और हम भी. यह सौ फ़ीसदी 'फंडिंग' है. और वोट किसके टूट रहे हैं, कांग्रेस के ही न.

जब कांग्रेस ने दिल्ली में इनको समर्थन दिया कि आप कुछ करके दिखाओ तो यह कर नहीं पाए. और अब यहां जनता को मूर्ख बनाने आ गए हैं.

यह दो-तीन सीट पा लेंगे कहीं से, लेकिन क्या यह भविष्य में लोगों को स्थायित्व दे पाएंगे.

आज भारत की राजनीति में जब भ्रष्टाचार विरोध, आरटीआई, नए विधेयकों की बात हो रही है, युवा आगे आ रहा है. क्या आपको लगता है कि बॉलीवुड और राजनीति का सफल साथ रहेगा?

देखिए एमजीआर रहे हैं, एनटीआर रहे हैं (लेकिन वह तीस-चालीस साल पहले की बात है).

आप ऐसा मत समझिए कि कलाकार बुद्धिमान नहीं हैं. वह बहुत ज़्यादा बुद्धिमान हैं. संसद में बैठने वाले बहुत से हमारे राजनेताओं को कोई ज्ञान नहीं है, कलाकारों को उनके मुकाबले बहुत ज़्यादा ज्ञान है. वह बहुत अनुभवी हैं और बहुत ज़्यादा समझ-बूझ रखते हैं.

और यह फ़िल्म इंडस्ट्री जो उनका प्रशिक्षण का मैदान रही है वह बहुत सकारात्मक रही है- राजनीति में आने के लिए.

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