मॉल जाने पर मदुरै स्कूल के 12 छात्र निष्कासित

भारत में स्कूल के बच्चे (फ़ाइल फोटो) इमेज कॉपीरइट

तमिलनाडु के मदुरै में एक स्कूल ने अपने 12 छात्रों को निष्कासित कर दिया है. इसकी वजह नौवीं कक्षा के इन छात्रों का शॉपिंग मॉल जाना बताया जा रहा है.

'सीईओए मैट्रिकुलेशन स्कूल' स्कूल के अधिकारियों ने निष्कासित छात्रों के अभिभावकों को उनका स्थानांतरण प्रमाण पत्र ले जाने का निर्देश दिया है.

निष्कासित किए गए 12 में पांच छात्रों के अभिभावकों की ओर से स्कूल के इस निर्देश को चुनौती देते हुए याचिका दायर की गई है.

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याचिका में दावा किया गया है कि निर्देश जारी करने के पहले स्कूल ने उचित छानबीन नहीं की है.

मदुरै उच्च न्यायालय की खंडपीठ ने रिट याचिका स्वीकार करते हुए सात मई को 'सीईओए मैट्रिकुलेशन सेकेंडरी स्कूल' की ओर से जारी किए गए आदेश के क्रियान्वयन पर अंतरिम स्थागनादेश के जरिए रोक लगा दी है.

शॉपिंग मॉल

मदुरै स्थित कोसाकुलम के 'सीईओए मैट्रिकुलेशन स्कूल' में पढ़ाई का अंतिम दिन होने के कारण 13 छात्रों का एक ग्रुप पास के शॉपिंग मॉल गया था. उन्होंने वहां गिफ्ट खरीदे और साथ में कुछ समय बिताया.

इसके बाद जब वे 28 मार्च को अपनी सलाना परीक्षा के पहले दिन परीक्षा देने आए तो प्रिसिंपल ने उनसे मॉल जाने के बारे में सवाल पूछे. छात्रों ने स्वीकार किया कि वे मॉल गए थे.

प्रिंसिपल ने तब 13 में से 12 छात्रों को आदेश दिया कि वे 29 मार्च से परीक्षा देने नहीं आएंगे.

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हालांकि वे 12 छात्र अगले दिन 29 मार्च को भी परीक्षा देने पहुंचे. लेकिन उन्हें लिखित परीक्षा में बैठने नहीं दिया गया.

17 अप्रैल को छात्रों के अभिभावकों को आदेश जारी किया गया कि वे स्कूल आकर इन बच्चों के स्थानांतरण प्रमाणपत्र (टीसी) वापस ले जाएं.

स्कूल ड्रेस

कोसाकुलम के 'सीईओए मैट्रिकुलेशन स्कूल' के अधिकारियों का दावा है कि कुछ छात्र स्कूल ड्रेस में ही मॉल घूमते चले गए थे. इधर छात्रों के अभिभावक इस बात पर अड़े हैं कि वे स्कूल ड्रेस में मॉल नहीं गए थे.

याचिकाकर्ता के वकील सी अरुल वादिवेल ने बीबीसी से बात करते हुए कहा है कि एक छात्र के अपने फेसबुक अकाउंट पर मॉल से जुड़ी कुछ तस्वीरें पोस्ट करने के बाद एक टीचर की नजर उन तस्वीरों पर पड़ी जिससे मामला सामने आ गया.

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अरुल वादिवेल ने बताया, "हालांकि उनमें से एक छात्र को पुलिस अधिकारी का बेटा होने के कारण सजा से दूर रखा गया है."

उन्होंने आगे बताते हुए कहा, ‘मैट्रिकुलेशन स्कूल नियमन संहिता के विनियमन संख्या 27 के अनुसार छात्रों की ओर से किसी भी तरह के दुर्व्यवहार का मामला सामने आने पर पहले आरोप जारी किए जाएंगे, उसके बाद उचित छानबीन की व्यवस्था जाएगी. इसके अनुसार छात्रों को अपना पक्ष रखने का मौका दिया जाएगा, और यदि वे दोषी पाए जाते हैं तो उनके लिए कई तरह के दंड के प्रावधान हैं. इन प्रावधानों में स्कूल से निष्कासन सबसे गंभीर सजा मानी गई है. लेकिन अफसोस कि स्कूल ने इन दिशानिर्देशों का पालन नहीं किया. साथ ही स्कूल ने छात्रों के माफी मांगने पर भी विचार नहीं किया."

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डेटिंग का आरोप

स्कूल के चेयरमैन सामी का दावा है कि छात्रों का मॉल जाना पूर्वनियोजित था. उनका कहना है, "12 छात्रों में से कुछ लड़के और लड़कियां डेटिंग पर गए थे जबकि बाकि उनकी मदद के लिए साथ थे."

चेयरमैन ने बीबीसी को बताया, "स्कूल से बाहर छात्रों का व्यवहार यदि स्कूल की प्रतिष्ठा और गरिमा को ठेस पहुंचाता है तो प्रिंसिपल को ये हक है कि वो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई करे."

उन्होंने सजा की गंभीरता के बारे में बताते हुए कहा कि भविष्य में दूसरे छात्र इस तरह के कदम न उठाएं इसलिए स्कूल की ओर से सख्त कार्रवाई की गई है.

एक छात्र को सजा से दूर रखने के बारे में सवाल करने पर उन्होंने जवाब दिया, "छह सदस्यों की समिति ने घटना की भली-भांति जांच परख की है."

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उन्होंने बताया, "जांच में वह छात्र दोषी नहीं पाया गया इसलिए उसे सजा नहीं दी गई है. इस बात का उसके पिता के पुलिस अधिकारी होने से कोई संबंध नहीं है."

अंत में ये कहते हुए अपनी बात पूरी करते हैं, "इस घटना में शामिल एक और छात्र के पिता पुलिस अधिकारी हैं, इसके अलावा एक बच्चा स्कूल के कर्मचारी का बेटा है. इसके बावजूद स्कूल ने बिना कोई पक्षपात करते हुए सबको एक सजा दी है."

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