गैस क़ीमतो के विवाद में मध्यस्थता चाहती हैं कंपनियां

रिलायंस इंडस्ट्रीज़, केजी बैसिन गैस क्षेत्र, कीमतों के निर्धारण का विवाद इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption केजी बेसिन गैस क्षेत्र में रिलायंस की साठ फ़ीसदी हिस्सेदारी है.

भारत की रिलायंस इंडस्ट्रीज़, ब्रिटेन की प्रमुख तेल कंपनी बीपी और कनाडा की निको कंपनी ने भारत सरकार के ख़िलाफ़ गैस क़ीमतों के सिलसिले में मध्यस्थता के लिए नोटिस दायर किया है.

ये कंपनियां भारत के सबसे बड़े प्राकृतिक गैस क्षेत्र केजी बेसिन-डी-6 में संचालित होती हैं और इन कंपनियों ने गैस की क़ीमतों को दोगुना करने का अनुमोदन प्राप्त कर लिया था.

लेकिन इस क़दम को लागू करने की प्रक्रिया पर भारत में आम चुनावों से ठीक पहले लागू करने से रोक लगा दी गई थी.

कंपनियों का कहना है कि क़ीमतें बढ़ाने में होने वाली देरी से केजी बेसिन क्षेत्र में उनके विकास की योजनाएं प्रभावित हो रही थीं.

कंपनियों ने एक वक्तव्य जारी करके कहा कि इस सप्ताह के आख़िर तक क़ीमतों में बढ़ोतरी को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है कि क़ीमतें कब बढ़ेंगी, इस कारण वे इस साल करीब चार अरब डॉलर के निवेश को "मंजूरी देने में अक्षम हैं."

वक्तव्य के मुताबिक़, "इसके अतिरिक्त, इससे इस व्यवसाय में संलग्न विभिन्न पक्षों की क़ीमतें निर्धारित करने और पिछले साल होने वाली महत्वपूर्ण खोजों को विकसित करने में देरी होगी."

नई क़ीमतें

भारत के सबसे बड़े गैस क्षेत्र के रूप में केजी-डी6 ब्लॉक खोजने का स्वागत किया गया था.

2007 में घरेलू क़ीमतों का निर्धारण करने वाली भारत सरकार ने इस क्षेत्र से उत्पादन के पहले पाँच वर्षों के लिए प्रति मिलियन यूनिट की क़ीमत 4.2 डॉलर क़ीमत निर्धारित की थी.

यहाँ एक अप्रैल 2009 से उत्पादन शुरू हुआ और पुरानी क़ीमतों की तिथि 31 मार्च 2013 को समाप्त हो रही थी.

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Image caption 2009 के बाद से केजी बेसिन के गैस उत्पादन में कमी आई है.

नई क़ीमतों के निर्धारण पर दो साल तक विवाद होता रहा और भारत के चर्चित मुद्दों में शामिल था.

अंततः 2013 में सरकार ने क़ीमतों को आठ डॉलर प्रति मिलियन यूनिट करने की अनुमति दे दी थी.

इस बीच 2009 के बाद से गैस उत्पादन में कमी आई है.

विवाद की वज़ह

इस क्षेत्र के कुल उत्पादन का 60 फ़ीसदी हिस्सा रखने वाली कंपनी रिलायंस का कहना है कि भूगर्भीय दिक्कतों के कारण गैस उत्पादन में कमी आई है.

हालांकि सरकार का कहना है कि रिलायंस ने अपने उत्पादन का लक्ष्य हासिल नहीं किया और उत्पादन में गिरावट के लिए रिलायंस पर 1.7 अरब डॉलर का जुर्माना लगाया था.

तीन कंपनियों ने साझा बयान में कहा कि वेगैस उत्पादन में कमी रोकने के लिए कड़ी मेहनत कर रही हैं.

उन्होंने कहा कि पाँच ट्रिलियन घन मीटर गैस की गैस की खोज इस क्षेत्र में की गई थी, इस बाज़ार तक पहुंचाने के लिए निवेश और विकास का इंतज़ार है.

साझा बयान के अनुसार कंपनियां कहती हैं, "जैसा कि हम पहले भी कह चुके हैं, इन संसाधनों के आर्थिक विकास के लिए गैस की क़ीमतों के दीर्घकालिक निर्धारण में स्पष्टता की जरूरत है.

बीपी का इस क्षेत्र में 30 फ़ीसदी हिस्सा है.

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