भाजपा का क्लीन स्वीप, कांग्रेस की सबसे बड़ी हार

  • 17 मई 2014
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सोलहवीं लोकसभा के लिए दो महीने लंबी चुनावी प्रक्रिया शुक्रवार को नतीजे घोषित होने के साथ ही संपन्न हो गया.

नतीजे भी चौंकाने वाले रहे. यह ऐतिहासिक चुनाव रहा जिसमें भारतीय जनता पार्टी को न सिर्फ स्पष्ट बहुमत मिला बल्कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन का आंकड़ा तीन सौ के पार चला गया.

इसके साथ ही कांग्रेस पार्टी को चुनावी इतिहास की सबसे बुरी और सबसे अपमानजनक हार का सामना करना पड़ा.

अपने जन्म के एक वर्ष के भीतर ही दिल्ली विधानसभा चुनाव में अपने अप्रत्याशित प्रदर्शन से सबको चौंकाने वाली आम आदमी पार्टी के दिग्गज नेता तो हार गए लेकिन पार्टी अपना खाता खोलने में सफल रही.

पहली बार लोकसभा चुनाव लड़ रही आम आदमी पार्टी के खाते में चार सीटें आईं और ये चारों सीटें उसे पंजाब में मिलीं.

क्षेत्रीय दल

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Image caption भाजपा की जीत पर जश्न मनाते कार्यकर्ता

इस चुनाव में कुछ अपवादों को छोड़कर क्षेत्रीय दलों को करारी शिकस्त का सामना करना पड़ा.

उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी को करारा झटका लगा जबकि प्रदेश में दूसरे नंबर की पार्टी बहुजन समाज पार्टी का खाता तक नहीं खुल पाया.

बिहार में भी कमोबेश यही स्थिति रही. जदयू और राजद दोनों ही प्रमुख राज्य स्तरीय दलों का लगभग सफाया हो गया लेकिन भाजपा नीत गठबंधन में शामिल होने के कारण रामविलास पासवान की लोक जनशक्ति पार्टी ने पिछले चुनाव के मुकाबले अच्छा प्रदर्शन किया है.

भाजपा ने पांच राज्यों दिल्ली, राजस्थान, गुजरात, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में क्लीन स्वीप किया यानी इन राज्यों की सभी सीटों पर उसने जीत हासिल की.

क्षेत्रीय दलों की बात करें तो केवल पश्चिम बंगाल में ममता बनर्जी, तमिलनाडु में जयललिता और ओडिशा में नवीन पटनायक ही अपने गढ़ को बचाने में कामयाब रहे.

इस चुनाव की खासियत यह रही कि भाजपा उत्तर भारत में पश्चिम बंगाल के साथ ओडिशा में भी सीटें निकालने में सफल रही, तो दक्षिण में कर्नाटक, तमिलनाडु और आंध्र में उसने अच्छा प्रदर्शन किया.

जीतने वाले भाजपा/एनडीए के दिग्गज

भाजपा के लगभग सभी दिग्गज नेता चुनाव जीतने में कामयाब रहे. यहां तक कि भारत प्रशासित जम्मू कश्मीर में जम्मू के अलावा लद्दाख की सीट से भी भाजपा के प्रत्याशियों ने जीत दर्ज की.

राजस्थान में जयपुर ग्रामीण सीट से ओलम्पिक पदक विजेता भाजपा के राज्यवर्द्धन सिंह राठौर ने पूर्व केंद्रीय मंत्री और कांग्रेस नेता सीपी जोशी को हराया.

Image caption अमृतसर में कैप्टन अमरिंदर सिंह ने भाजपा के वरिष्ठ नेता अरुण जेटली को हरा दिया.

हालांकि भाजपा के कुछ दिग्गज हार भी गए. अरुण जेटली को कांग्रेस के कैप्टन अमरिंदर सिंह ने करीब एक लाख मतों से हराया. इसके अलावा स्मृति इरानी और शाहनवाज हुसैन भी चुनाव हार गए हैं.

कर्नाटक में पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवगौड़ा जनता दल सेक्युलर पार्टी से हासन लोकसभा सीट से जीत गए हैं, वहीं लोकसभा के पूर्व अध्यक्ष पीए संगमा मेघालय सीट से जीतने में सफल रहे.

कांग्रेस के जो दिग्गज जीते/हारे

कांग्रेस के लगभग सारे बड़े दिग्गजों को हार का मुंह देखना पड़ा है.

इस सूची में कपिल सिब्बल, अजय माकन, दिल्ली की पूर्व मुख्यमंत्री शीला दीक्षित के बेटे संदीप दीक्षित, कृष्णा तीरथ, सलमान खुर्शीद, पी चिदंबरम के बेटे कार्ति चिदम्बर, गुलाम नबी आजाद, सचिन पायलट, मीरा कुमार, सुशील कुमार शिंदे, नवीन जिंदल और क्रिकेटर अजहरुद्दीन के नाम प्रमुख हैं.

हालांकि कांग्रेस के कुछ दिग्गज जबरदस्त सत्ता विरोधी लहर में भी अपनी सीट बचाने में कामयाब रहे.

कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के अलावा वीरप्पा मोइली, शशि थरूर, कमलनाथ, दीपेंद्र सिंह हुड्डा (रोहतक), ज्योतिरादित्य सिंधिया (गुना), मल्लिकार्जुन खड़गे (गुलबर्गा) और केवी थॉमस (अर्नाकुलम) विजयी रहे.

अन्य हारने वाले दिग्गजों में बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री और राजद उम्मीदवार राबड़ी देवी, उनकी बेटी मीसा भारती, जनता दल यूनाइटेड नेता शरद यादव, चौधरी अजित सिंह, जयंत चौधरी, प्रकाश झा और फारुख़ अब्दुल्ला के नाम प्रमुख हैं.

आम आदमी पार्टी के प्रमुख नेताओं योगेंद्र यादव, अरविंद केजरीवाल, कुमार विश्वास, राखी बिडलान, आशुतोष, गुल पनाग, राजमोहन गांधी, शाज़िया इल्मी को करारी हार का सामना करना पड़ा.

राज्यों में भाजपा की स्थिति

यदि राज्यवार बात की जाए तो सबसे बड़े राज्य उत्तर प्रदेश की कुल 80 सीटों में से भाजपा को 71, सपा को 5, कांग्रेस को 2 और अपना दल को 2 सीटें मिली हैं. यहां से बसपा इस बार अपना खाता भी नहीं खोल पाई.

बिहार की 40 सीटों में से भाजपा 22 पर, लोजपा छह पर, राजद चार पर, राष्ट्रीय लोक समता पार्टी तीन पर कांग्रेस दो पर विजयी रही जबकि जदयू और एनसीपी के हिस्से में दो और एक सीटें आईं.

राजस्थान (25 सीटें), दिल्ली (7 सीटें), उत्तराखंड (5 सीटें), हिमाचल प्रदेश (4) और गुजरात (26) में भाजपा ने क्लीन स्वीप किया. यहां किसी और पार्टी को खाता खोलने का मौका नहीं मिला.

मध्य प्रदेश में भाजपा को 27 सीटें मिलीं और कांग्रेस दो सीटों पर विजयी रही.

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Image caption दस साल तक प्रधानमंत्री रहने के बाद मनमोहन सिंह के नेतृत्व में यूपीए सरकार को करारी हार का सामना करना पड़ा.

महाराष्ट्र में भी भाजपा को खासी बढ़त मिली है. यहां कुल 48 सीटों में से भाजपा 23 पर, शिवसेना 18 पर, एनसीपी चार पर और कांग्रेस दो पर विजयी रहे जबकि एक सीट एक स्वाभिमान पक्ष दल के खाते में गई है.

कर्नाटक में भी भाजपा ने अपनी बढ़त बरकार रखी और कुल 28 सीटों में से 17 पर जीत दर्ज की. कांग्रेस के खाते में 9 और जनता दल सेक्युलर के खाते में दो सीटें आईं.

केरल की कुल 20 सीटों पर कांग्रेस आठ, माकपा पांच, आईयूएमएल दो, भाकपा एक, केरल कांग्रेस (एम) एक, रिवोल्यूशनरी सोशलिस्ट पार्टी एर और दो सीटें निर्दलीयों के खाते में गई हैं.

जयललिता, ममता बनर्जी, नवीन पटनायक अपन-अपने गढ़ बचाए रखने में कामयाब रहे.

तमिलनाडु कुल 39 सीटों में एआईडीएमके 37, भाजपा और पीएमके एक-एक सीटों पर जीत दर्ज की.

पश्चिम बंगाल की कुल 42 सीटों में से तृणमूल कांग्रेस 34 पर, कांग्रेस चार पर, भाजपा दो और माकपा 2 पर विजयी रही.

ओडिशा कुल 21 सीटों पर बीजद 20 सीटें और भाजपा एक सीट पर कामयाब रही.

आंध्र प्रदेश की कुल 42 सीटों पर तेलगुदेशम पार्टी को 16, टीआरएस को 11, वाईएसआर कांग्रेस को नौ, भाजपा को तीन, कांग्रेस को दो और एआईएमआईएम को एक सीट मिली.

पूर्वोत्तर

पूर्वोत्तर में भी भाजपा ने अपनी कामयाबी का परचम लहराया. असम की कुल 14 सीटों में से भाजपा ने सात पर जीत हासिल की जबकि कांग्रेस को तीन एआईयूडीएफ को तीन और एक पर निर्दलीय प्रत्याशी जीता.

इस लोकसभा चुनाव में पहली बार शामिल होने वाली आम आदमी पार्टी का खाता पंजाब से खुला जहां इसने चार सीटें जीतीं. यहां कुल 13 सीटों में से अकाली दल को चार, कांग्रेस को तीन और भाजपा को दो सीटें मिलीं.

हरियाणा की कुल 10 सीटों में सात भाजपा के खाते में आईं जबकि दो पर आईएनएलडी और एक पार कांग्रेस विजयी हुई.

केंद्र प्रशासित राज्यों अंडमान निकोबार और चंडीगढ़ की दोनों सीटों पर भाजपा ने जीत हासिल की.

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