'मुसलमान न कभी डरा है, न कभी डरेगा'

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लोकसभा चुनाव 2014 के नतीजों से ये तय हो गया है कि भारत के अगले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ही होंगे.

नरेंद्र मोदी की भारी जीत मुस्लिम समुदाय के लिए क्या मायने रखती है? उनके दिल में मोदी सरकार के प्रति कहीं कोई आशंका तो नहीं. इन्हीं कुछ सवालों को टटोलने के लिए बीबीसी ने दो अहम शख्सियतों मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सैयद क़ासिम रसूल इलियास और जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महमूद मदनी से बात की.

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महमूद मदनी कहते हैं, "हमें इस बात का अहसास तो चुनाव अभियान के दौरान ही हो गया था कि इस बार सेक्यूलर पार्टियां, कांग्रेस या यूपीए की सरकार नहीं बना पाएगी. और ये उम्मीद थी कि भाजपा हुकूमत में आए. अब जो चुनाव परिणाम दिख रहे हैं, इसमें तो कोई आश्चर्य नहीं है."

पहचान और मुद्दे

मदनी बताते हैं कि वैसे उन्हें इस बात का अंदेशा है कि अगर भाजपा, जिसने बहुमत हासिल कर लिया है, वो अपने एजेंडे पर कायम रहती है तो उनके निशाने पर अल्पसंख्यक और उनके मसले होंगे.

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वे कहते हैं, "पहले भी केंद्र में एनडीए की सरकार थी. फिर कई राज्यों में बीजेपी की सरकार है और वहां मुसलमानों की अच्छी-खासी आबादी है. ये और बात है कि यहां उन्होंने अपना एजेंडा लागू करने की कोशिश की है. जाहिर है कि मुसलमान वहां अपनी पहचान और मुद्दों के साथ रह रहे हैं."

महमूद मदनी का मानना है कि मोदी सरकार में कई महत्वपूर्ण मसले पैदा हो सकते हैं जैसे कि समान नागरिक संहिता, या राम मंदिर निर्माण, या धारा 370, लेकिन इस बार लोगों ने इन मुद्दों से हटकर विकास के नाम पर वोट दिया है.

मदनी के अनुसार लोकसभा चुनाव 2014 के दौरान कहीं 'हिंदुत्व' का मुद्दा नहीं था.

'हिंदू लेबोरेटरी'

जमीयत उलेमा-ए-हिंद के महमूद मदनी का कहना है, "हालांकि ये बात सही है कि भाजपा ने जिस शख्स को अपने प्रधानमंत्री उम्मीदवार के तौर पर सामने रखा, उनकी उपलब्धि इसके अलावा और कुछ नहीं कि उन्होंने एक 'हिंदू लेबोरेटरी' के रूप में गुजरात को विकसित किया था. इसके अलावा 2002 का एक कारनामा उनके खाते में है. यह एक बड़ा फैक्टर था उनको आगे बढ़ाने में."

महमूद मदनी आगे कहते हैं, "बहरहाल, भाजपा ने चुनाव अभियान के दौरान कोशिश की कि इन विरोधाभासों को सामने न आने दिया जाए. ये दिखाया गया कि देश की आबादी अमन और शांति चाहती है. साथ ही वो भ्रष्टाचार मुक्त समाज भी चाहती है."

वे कहते हैं, "अगर वाकई भाजपा ये साबित करना चाहती है कि वह एक स्थाई सरकार दे सकती है तो उसे इन तमाम मुद्दों से खुद को अलग रखना होगा."

उन्होंने कहा कि भाजपा के लिए ये सुनहरा मौका है खुद को साबित करने का.

डरने की जरूरत नहीं

तो दूसरी ओर मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड के सैयद क़ासिम रसूल इलियास को आने वाली मोदी सरकार के प्रदर्शन को लेकर कोई संशय नहीं है.

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सैयद क़ासिम रसूल इलियास का कहना है, "मुसलमान न कभी डरा है और न आइंदा कभी डरेगा. इस देश में, समाज में बहुत शक्ति और ताकत है. तो सिर्फ मुसलमान को ही नहीं, किसी को भी डरने और घबराने की जरूरत नहीं है."

वे कहते हैं, "कोई आए और कोई जाए, हमें इससे कोई फर्क नहीं पड़ता. एकता, भाईचारा और शांति बनाए रखना, लोगों को उन्नति के समान अवसर उपलब्ध कराना किसी भी सरकार की जिम्मेदारी होती है."

उन्होंने आगे कहा, "नई सरकार अपनी इस जिम्मेदारी को कैसे निभाती है ये तो कुछ दिन बाद ही पता चलेगा. उसके बाद फैसला होगा कि सरकार कैसी है कैसी नहीं है."

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