एक निर्णायक राजनेता माने जाते हैं मोदी

  • 16 मई 2014
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भारत की मुख्य विपक्षी पार्टी भारतीय जनता पार्टी के प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार नरेंद्र मोदी को एक निर्याणक राजनेता के रूप में देखा जाता है.

मोदी 2001 से गुजरात के मुख्यमंत्री हैं. उन्हें गुजरात को एक आर्थिक शक्ति बनाने की वज़ह से एक कुशल और सक्रिय राजनेता के रूप में देखा जाता है, लेकिन उन पर 2002 में धार्मिक दंगे न रोक पाने के आरोप भी लगते रहे हैं.

इन दंगों में 1000 से ज़्यादा लोग मारे गए थे, जिनमें ज़्यादातर मुसलमान थे. हालांकि इन आरोपों से वे लगातार इनकार करते रहे हैं.

पिछले जून में जब उन्हें भाजपा के चुनावी अभियान का प्रमुख बनाया गया था, तब पार्टी के सहयोगी दल जनता दल (एकी) ने मुसलमानों का समर्थन खोने के डर से भाजपा से अपना समर्थन वापस ले लिया था.

अंतरराष्ट्रीय छवि

दंगे के बाद मोदी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अछूत हो गए थे. उन्हें अमरीका ने वीज़ा देने से मना कर दिया था और ब्रिटेन ने उनसे सारे संबंध खत्म कर लिए थे.

लेकिन एक दशक के बाद यह विवादास्पद नेता राजनीति की मुख्यधारा में फिर वापस आ गया है.

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पिछले साल भारत में अमरीका की राजदूत नैंसी पावेल ने मोदी से भारत-अमरीका संबंधों, क्षेत्रीय सुरक्षा के मसले, मानवाधिकार और भारत में निवेश संबंधी विषयों पर बात करने के लिए मुलाक़ात की थी.

अक्तूबर 2012 में भारत में ब्रिटेन के हाई कमिश्नर ने मोदी से मुलाक़ात की थी और उन्हें संसद में संबोधन के लिए आमंत्रित किया था.

लेबर पार्टी सांसद टोरी ने मोदी को बुलाने के फ़ैसले का यह कहकर समर्थन किया था कि उनके नज़रिए को जानना ज़रूरी है.

माफ़ी

मोदी ने भाजपा के प्रचार अभियान के दौरान अप्रैल से मई के बीच 440 रैलियों को संबोधित किया है.

उनकी सभाओं के दौरान समर्थक मोदी की शक्ल वाले मुखौटे पहनकर शामिल हुए और 1000 चाय स्टॉलों पर मोदी की तस्वीर वाली कप में चाय पिलाई गई.

उन्होंने सोशल मीडिया का भी प्रभावकारी ढंग से इस्तेमाल किया. वोटरों से सीधा संवाद करने के लिए थ्रीडी होलोग्राम का भी प्रयोग किया गया.

पार्टी के अंदर उन्हें लेकर अंदरूनी मतभेद भी रहे हैं.

हालांकि बहुत से भारतीय कहते हैं कि वे मोदी को गुजरात दंगे में कथित संलिप्तता की वजह से प्रधानमंत्री के रूप में स्वीकार नहीं कर सकते.

हालांकि वे अब तक इस मामले में बचे हुए हैं. उनकी नज़दीकी सहयोगी रही माया कोडनानी इस मामले में दोषी साबित हो चुकी हैं और उन्हें 28 साल जेल की सज़ा हुई है.

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कोडनानी दंगे के वक़्त मंत्री नहीं थीं, लेकिन 2007 में उन्हें मोदी ने महिला और बाल मंत्रालय में मंत्री बनाया था.

आलोचक मोदी के इस क़दम को दंगे में कोडनानी की भूमिका के फलस्वरूप मिले "इनाम" के रूप में देखते हैं.

प्रशासक

मोदी ने भारत और देश के बाहर जनमत के ध्रुवीकरण में सफलता पाई है. उन्हें गुजरात में समृद्धि और विकास लाने का श्रेय जाता है. उन्हें देश के चोटी के उद्यमियों का भी समर्थन प्राप्त है.

मोदी की छवि एक साफ़ और कुशल प्रशासक की है, जिनके ऊपर भ्रष्टाचार का कोई दाग़ नहीं है.

इस वजह से वे तीन बार राज्य के मुख्यमंत्री चुने गए हैं.

दिसंबर 2002 में दंगे के बाद वह दोबारा मुख्यमंत्री चुनकर आए थे. इसके बाद उन्होंने खुले तौर पर कट्टर हिंदूवाद की ज़मीन पर अपना अभियान चलाया, लेकिन 2007 और 2012 में हुए चुनाव में उन्होंने विकास की बात पर जोर दिया.

2002 के दंगा पीड़ितों के लिए उनकी जीत अन्याय का प्रतीक थी. उन्होंने कभी भी दंगों के ऊपर कोई अफ़सोस ज़ाहिर नहीं किया.

17 साल की उम्र में नरेंद्र मोदी की शादी हुई थी, लेकिन उनकी पत्नी शायद ही कभी उनके साथ रहीं. वे हमेशा अपनी व्यक्तिगत ज़िंदगी से जुड़े सवालों को टालते रहे हैं.

चुनाव के दौरान पहली बार उन्होंने सार्वजनिक रूप से अपनी शादी की बात स्वीकारी.

संघ की पृष्ठभूमि

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विशेषज्ञ कहते हैं कि मोदी की पार्टी में मज़बूत स्थिति के पीछे राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ ( आरएसएस) का हाथ है. आरएसएस की स्थापना 1920 में हुई थी, जिनका उद्देश्य भारत को एक हिंदू राष्ट्र बनाने का है. यह बीजेपी का वैचारिक मंच है.

आरएसएस का गुजरात में मज़बूत आधार है और मोदी के साथ इसके संबंध को संगठन की मज़बूती के रूप में देखा जाता है. मोदी 1980 में भाजपा की गुजरात इकाई से जुड़े.

विशेषज्ञ कहते हैं, "एक संगठनकर्ता के रूप में मोदी की छवि अपराजेय है, जो आएएसएस में प्रचारक के रूप में रहते हुए उन्होंने अर्जित की है.

जनवरी 2001 में आए भूकंप के बाद मोदी पहली बार विपक्षियों को हराते हुए सत्ता में आए थे. भूकंप में क़रीब 20 हज़ार लोग मारे गए थे.

मोदी ने अपनी वेबसाइट पर एक मज़बूत राष्ट्रवादी अभियान चलाया है "भारत प्रथम".

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