हमने तो गुडबाय कर दिया: नीतीश कुमार

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बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अपने पद से इस्तीफ़ा दे दिया है. नीतीश ने शनिवार को राज्यपाल को अपना इस्तीफ़ा सौंपा.

नीतीश ने लोकसभा चुनाव में मिली हार की नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए इस्तीफ़े की घोषणा करते हुए कहा, "जनता ने स्पष्ट जनादेश दिया है, हम उसका सम्मान करते हैं."

उन्होंने कहा, "हमने अपना अभियान मुद्दों पर केंद्रित किया और उसी के आधार पर लोगों के पास समर्थन मांगने गए थे. हमें अपेक्षित समर्थन नहीं मिला. इसकी नैतिक ज़िम्मेदारी लेते हुए मैंने त्यागपत्र दिया है."

नीतीश ने कहा कि हमने मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया है, मगर विधानसभा भंग करने की सिफ़ारिश नहीं की है. नीतीश ने कहा, "वैकल्पिक सरकार बनने का रास्ता खुला हुआ है. जो भी प्रक्रिया होगी, राज्यपाल उसे देखेंगे. "

उन्होंने कहा कि ''हमने तो गुडबाय कह दिया, अब जिसे जो करना है वह करे.''

नीतीश की पार्टी जनता दल यूनाइटेड को आम चुनावों में मात्र सीटें दो मिली हैं. वहीं भाजपा गठबंधन को बिहार की कुल 40 में से 31 सीटों पर जीत हासिल हुई है.

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भाजपा गठबंधन से अलग होने के बारे में उन्होंने कहा, "भाजपा से रिश्ते तोड़ना सही निर्णय था. वह निर्णय सिद्धांत पर आधारित था. मुझे अफ़सोस यह है कि कोई सैद्धांतिक लाइन ले नहीं सकता. हमने वोट के आधार पर निर्णय नहीं लिया था."

विचारधारा की लड़ाई

नीतीश के इस्तीफ़े पर प्रतिक्रिया देते हुए भाजपा प्रवक्ता प्रकाश जावड़ेकर का कहना था, "नीतीश जनता से कटे थे, बिहार के विकास से कटे थे और जिस अहंकार का भाव पैदा हुआ था, उसके कारण जनता ने उन्हें सज़ा दी और वे 20 से दो बन गए."

उन्होंने कहा, "यह विचारधारा की लड़ाई नहीं थी, यह अहम की लड़ाई थी. उनका सिर्फ़ एक ही काम था मोदी-द्वेष. लोगों ने ठान लिया था कि इस बार मोदी के नेतृत्व में भाजपा को जिताएंगे. वे साथ में रहते, तो उनका फ़ायदा था. अब नहीं रहे, तो हमारा फ़ायदा हुआ और उनका नुक़सान हुआ."

उधर, कांग्रेस नेता शकील अहमद ने कहा, "उन्होंने सोचा होगा कि जनता ने अपेक्षा के मुताबिक़ उन्हें वोट नहीं दिया है. नैतिक आधार पर उन्होंने इस्तीफ़ा दिया है. इस्तीफ़े में उन्होंने विधानसभा भंग करने के लिए लिखा है या नया चुनाव कराने के लिए कहा है या सिर्फ़ नैतिक आधार पर इस्तीफ़ा दिया है, इसकी जानकारी हमें अभी नहीं है."

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अहमद ने कहा, "वे अपने काम के आधार पर जनता के बीच वोट मांगने गए थे, लेकिन उन्हें उतनी सीटें नहीं मिली. नैतिक आधार पर दिए गए इस्तीफ़े की आलोचना नहीं होनी चाहिए."

चुनाव की संभावना

राष्ट्रीय जनता दल के नेता मनोज झा ने बीबीसी हिन्दी से कहा, "यह सिर्फ़ राजनीतिक प्रदर्शन के आधार पर इस्तीफ़ा नहीं है. मेरा मानना है कि शायद उनका दल कुछ अंतर्विरोधों से जूझ रहा था, जिसके चुनाव के बाद ज़्यादा प्रकट होने की संभावना थी. संभवतः यह नीतीश कुमार का पहले से निर्धारित फ़ैसला हो सकता है."

तुरंत चुनाव होने के सवाल पर उन्होंने कहा, "हम अभी तुरंत चुनाव से निकले हैं. लोकसभा चुनावों के साथ पांच विधानसभाओं के भी उपचुनाव हुए हैं, जिनमें तीन पर हमने जीत दर्ज की है. एक राजनीतिक दल के रूप में चुनावों के लिए हम पूरी तरह तैयार हैं. भले ही भाजपा नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनाए, लेकिन हम लगातार कहते रहे हैं कि यह एक पैकेजिंग के तहत बांटने की विचारधारा है. हम जनमत को स्वीकारते हैं लेकिन अपनी बात पर पूरी तरह टिके हैं."

गठबंधन में टूट

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नीतीश कुमार ने भाजपा गठबंधन से अपना नाता तब तोड़ा था, जब भारतीय जनता पार्टी ने नरेंद्र मोदी को अपने प्रचार अभियान का नेतृत्व सौंपा था.

बिहार में नीतीश कुमार ने भारतीय जनता पार्टी के साथ गठबंधन करके सरकार बनाई थी.

बिहार विधानसभा की कुल 243 सीटों में से नीतीश की पार्टी जद-यू के पास कुल 115 सीटें थीं. वहीं भाजपा के पास 89, लालू प्रसाद यादव की राष्ट्रीय जनता दल के पास 21 सीटें हैं. कांग्रेस के पास चार सीटें हैं.

बिहार में बहुमत के लिए 122 सीटें चाहिए. भाजपा से अलग होने के बाद नीतीश कुमार ने कांग्रेस एवं अन्य के समर्थन से विश्वासमत प्राप्त किया था.

वहीं भारतीय जनता पार्टी को आम चुनाव में अकेले दम पर बहुमत मिला है. उसे कुल 282 सीटों पर विजय हासिल हुई है. वहीं भाजपा गठबंधन एनडीए को 335 सीटें मिली हैं.

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