नीतीश को इस्तीफ़ा देकर क्या हासिल हुआ?

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बिहार का नया मुख्यमंत्री कौन होगा इसके लिए कम-से-कम सोमवार दिन तक इंतज़ार करना पड़ सकता है.

तेज़ी से बदले घटनाक्रमों के बीच सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि इस्तीफ़ा देकर नीतीश कुमार आख़िर हासिल क्या करना चाहते हैं? क्या जो वह चाहते हैं वह हासिल होता दिख रहा है?

इस सवाल पर राजनीतिक विश्लेषक महेंद्र सुमन कहते हैं, नीतीश कुमार अपनी छवि की लेकर सतर्क रहने वाले नेता हैं, जिस तरह उन्हें लोकसभा चुनाव में हार का सामना करना पड़ा उसको लेकर उनके ऊपर दबाव है.

इन स्थितियों में इस्तीफे़ से उन्हें अपनी छवि बनाने में सहूलियत होगी.

पार्टी की एकता

वहीं इस सवाल पर वरिष्ठ पत्रकार सुरुर अहमद कहते हैं कि मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा देकर नीतीश कुमार यह दिखाना चाहते हैं कि पार्टी के सभी विधायक उनके साथ हैं. इसके पहले मीडिया में इस बात को लेकर चर्चा थी कि जदयूके कई विधायक और मंत्री भारतीय जनता पार्टी से मिले हुए हैं. वहीं भाजपा नेता यह दावा कर रहे थे कि वे जब चाहें नीतीश सरकार को गिरा सकते हैं.

लेकिन इसके साथ ही एक सवाल यह भी खड़ा होता है कि नीतीश कुमार अगर पार्टी विधायक दल की बैठक में इस्तीफे की घोषणा करते तो क्या ज़्यादा बेहतर नहीं होता?

इस संबंध में जदयू प्रवक्ता नीरज कुमार ने कहा, "विधानमंडल दल को अपनी बात कहने का अधिकार है, वो हमारे नेता हैं और उन्हें अपनी बात कहने का अधिकार है. उनसे अनुरोध करना हमारा काम है, फैसला लेना उनका काम है. पार्टी के विधायकों ने एकस्वर में उनसे कहा कि इस समय ध्रुवीकरण की राजनीति की जो चुनौतियां खड़ी हुई हैं, मुख्यमंत्री जी आप उसे स्वीकार करिए, पूरी पार्टी आपके साथ है. इसके लिए एक राष्ट्रव्यापी राजनीति की शुरूआत होनी चाहिए."

नीतीश के इस्तीफे़ के बाद जदयू विधायक दल के नेता के रूप में कई नाम हवा में तैर रहे हैं. इनमें निवर्तमान सरकार के मंत्री विजेंद्र चैधरी, नरेंद्र नारायण यादव और विजेंद्र प्रसाद यादव के नाम प्रमुख हैं.

विधायकों का दबाव

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लेकिन इन अटकलों के बीच कुछ सवाल भी उठ रहे हैं, पहला तो यह कि क्या जदयू नीतीश कुमार की जगह किसी और को विधायक दल का नेता चुन पाएगा?

इस सवाल पर महेंद्र सुमन कहते हैं, "सवाल यह नहीं है कि जदयू की दूसरी पंक्ति के सब नेता नीतीश को चाहते हैं. सवाल यह है कि नीतीश के बदले पार्टी की दूसरी पंक्ति से जो भी नाम सामने आ रहे हैं, उन्हें पसंद नहीं किया जा रहा है. दूसरी पंक्ति में प्रतिस्पर्धा बहुत ज़्यदा है. कम से कम आधा दर्जन लोगों में होड़ है. इस स्थिति में विधायक दल को संभालने वाले व्यक्ति नीतीश ही होंगे."

अब सबसे बड़ा सवाल यह कि अगर नीतीश विधायकों की मांग और दवाब में अपना इस्तीफ़ा वापस लेते हैं तो क्या उनकी साख प्रभावित होगी?

सुरुर अहमद कहते हैं कि यह एक महत्तवपूर्ण सवाल है. नीतीश कुमार ने उच्च नैतिक आदर्शों के आधार पर हार की जिम्मेदारी लेते हुए मुख्यमंत्री पद से इस्तीफ़ा दिया. ऐसे में अगर वो उसे वापस लेते हैं तो निश्चित रूप से उनकी साख पर असर पड़ेगा. लेकिन यह उनकी मजबूरी भी थी.

नीतीश कुमार की साख बढ़ेगी या घटेगी? क्या बिहार को नया मुख्यमंत्री मिलेगा? क्या जदयू टूट का शिकार होगी? क्या बिहार में लालू और नीतीश करीब आएंगे? इन सभी सवालों का जवाब धीरे-धीरे आने वाले दिनों में मिलेगा.

फिलहाल इतना जरूर कहा जा रहा है कि मीडिया के प्रिय कहे जाने वाले नीतीश कुमार लोकसभा चुनाव में मिली जबरदस्त हार के बावजूद सुर्खियों में बने हुए हैं.

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