अनंतमूर्ति को धमकियों के बाद पुलिस सुरक्षा

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कन्नड़ भाषा के प्रसिद्ध साहित्यकार और ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित लेखक यूआर अनंतमूर्ति को पुलिस सुरक्षा मुहैया कराई गई है. उन्हें फ़ोन पर मिल रही धमकियों को देखते हुए ऐसा किया गया है. हालांकि उन्होंने इसकी आधिकारिक शिकायत नहीं दर्ज कराई है.

बंगलौर पुलिस कमिश्नर राघवेंद्र ओराडकर ने बताया, "अनंतमूर्ति ने मौखिक रूप से हमें बताया है कि उन्हें धमकी भरे फोन कॉल आ रहे हैं. हमने उनकी सुरक्षा के लिए पुलिस बल का एक दस्ता उनके घर पर तैनात किया है."

आम चुनाव की घोषणा के बाद अनंतमूर्ति ने कहा था कि अगर नरेंद्र मोदी भारत के प्रधानमंत्री बनते हैं तो वह देश छोड़कर जाना पसंद करेंगे. बाद में उन्होंने यह कहते हुए अपना बयान वापस ले लिया था कि उन्होंने निराशावश ऐसा कहा था.

लेकिन नरेंद्र मोदी की चुनावी कामयाबी के बाद अनंतमूर्ति के पास धमकी भरे फोन आने शुरू हो गए.

अनंतमूर्ति ने बीबीसी हिंदी से कहा, "मुझे असमय ऐसे फोन कॉल आने शुरू हुए जिनमें पूछा जाता है कि आप एयर टिकट क्यों नहीं ले रहे हैं और पाकिस्तान क्यों नहीं जा रहे?"

चुनाव परिणाम के आने के बाद मंगलौर और शिमोगा के नरेंद्र मोदी समर्थकों ने 17 मई को कराची जाने के लिए अनंतमूर्ति के नाम का हवाई टिकट बुक कराया था.

हालांकि, अनंतमूर्ति ने अब तक ऐसा कोई टिकट मिलने से इनकार किया है.

आधिकारिक शिकायत नहीं

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जिस शख़्स के बारे में दावा किया जा रहा है कि उन्होंने अनंतमूर्ति के लिए मंगलौर से टिकट बुक कराया है, उनसे जब बीबीसी हिंदी ने संपर्क करने की कोशिश की तो उन्होंने बात करने से इनकार कर दिया.

(नरेंद्र मोदी के सामने क्या-क्या होंगी चुनौतियां)

बंगलौर पुलिस कमिश्नर के मुताबिक ख़तरे की गंभीरता को देखते अनंतमूर्ति की सुरक्षा बनी रहेगी. हालांकि पुलिस ने अभी इस मामले में कोई जांच शुरू नहीं की है, क्योंकि आधिकारिक तौर पर कोई शिकायत दर्ज नहीं हुई है.

अनंतमूर्ति को मिल रही धमकियों के बार राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित कन्नड़ फिल्मों के निर्देशक गिरीश कासरवल्ली ने कहा, "अनंतमूर्ति जैसी शख़्सियत के बयान की भावनाओं को समझा जाना जरूरी है. ऐसे लोगों के बयान को शाब्दिक तौर पर लेने की जरूरत नहीं है."

उन्होंने कहा, "कई बार लोग किसी शख़्स और उसकी विचारधारा को लेकर उलझन में रहते हैं. किसी विचारधारा की आलोचना का ये मतलब नहीं होता है कि वह मोदी की व्यक्तिगत आलोचना भी कर रहे थे."

अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता?

ऐसे में सवाल यह उठता है कि क्या अब अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को ख़तरा पैदा हो रहा है?

कासरवल्ली इस सवाल के जवाब में कहते हैं, "हमें देखना होगा. अगर आपने ध्यान दिया होगा तो मोदी का अंदाज़ नरम पड़ा है. हमें अगले छह महीने तक इंतज़ार करना होगा तभी यह तय होगा कि हम किस दशा में बढ़ रहे हैं."

(किसके सजदे में झुक गए मोदी...)

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कासरवल्ली को उम्मीद है कि भारतीय जनता पार्टी के वरिष्ठ नेता मौजूदा हालात में कोई संतोषजनक रास्ता निकालने की कोशिश करेंगे.

कासरवल्ली ने कहा, "हम एक लोकतंत्र में रहते हैं, जहां हमें अपने विचार रखने का पूरा हक़ है. अनंतमूर्ति का स्वतंत्र भारत के प्रति एक स्पष्ट नजरिया है, जिसमें सभी धर्म, भाषा और संस्कृति से जुड़े लोग एक सथ मिल कर रह सकें."

अनंतमूर्ति ने कहा, "पहले, हमलोग चुनाव से कुछ न कुछ सीखते थे. लेकिन यह पहला चुनाव था, जिसमें इतनी विद्रुपता देखने को मिली. देश की राष्ट्रीयता का सवाल ज़रूर उठेगा, अगर उस पर कोई ख़तरा आता है."

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