कितना जानते हैं आप नरेंद्र मोदी को

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चुनाव से पहले उनके नामांकन पत्र दाखिल करते समय पहली बार औपचारिक रूप से पता चला वो शादीशुदा हैं. उससे पहले ये स्पष्ट नहीं था.

इस सच के बाहर आने पर बवाल मचा लेकिन ख़ुद उन्होंने इस बारे में कोई बयान नहीं दिया. उनका व्यक्तित्व एक पहेली की तरह है जिसे लोग समझने की कोशिश कर रहे हैं.

कोई कहता है वो राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) के बचपन से प्रचारक रहे हैं इसलिए वो इस संस्था के एजेंडे पर चल रहे हैं.

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कोई कहता है उन्होंने आरएसएस और हिंदुत्व परिवार की सभी संस्थाओं को गुजरात में ख़त्म कर दिया और वो अपने एजेंडे पर चल रहे हैं. उनके एक क़रीबी साथी के अनुसार वो देश पर अपनी गहरी छाप और विरासत छोड़ कर जाना चाहते हैं.

वो पिछले कुछ दशकों से सार्वजनिक जीवन में हैं. इस बार चुनावी मुहिम के दौरान छह महीने तक हम उन्हें रोज़ टीवी पर देखते आए हैं और अख़बारों में उनके बारे में पढ़ते आए हैं. हममें से अधिकतर ये सोचते हैं कि हम उन्हें अच्छी तरह से जानते हैं. लेकिन क्या हम सही मायनों में नरेंद्र भाई मोदी को कितना जानते हैं? क्या उनके बारे में हम सब कुछ जानते हैं?

आइए नज़र डालते हैं मोदी के बारे में कुछ कम ज्ञात तथ्यों पर.

कम ज्ञात तथ्य

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इस चुनाव से पहले नरेंद्र मोदी आमतौर से एक बैचलर के रूप में जाने थे लेकिन अब उन्होंने ख़ुद ही स्वीकार किया कि वो शादीशुदा हैं. अटकलें पहले भी लगाई जा रही थीं कि जशोदाबेन उनकी पत्नी हैं लेकिन इसकी पुष्टि उन्होंने पहले कभी नहीं की थी.

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ये अब भी स्पष्ट नहीं है कि उनकी शादी कब हुई और उस समय वो कितने साल के थे. उनके भाई प्रह्लाद मोदी ने मुझे बताया कि भाई मोदी की शादी हुई थी और कुछ साल वो अपनी पत्नी के साथ रहे. उन्होंने बताया कि ख़ुद वो अपनी भाभी से लगभग 40 साल पहले मिले थे.

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पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की एक कवि के रूप में पहचान थी लेकिन ये कम लोगों को मालूम है कि नरेंद्र मोदी एक लेखक भी हैं. वो शायद इसलिए कि वो केवल गुजराती भाषा में लिखते हैं. उनकी कुछ किताबें भी छपी हैं जिनमें ज़्यादातर पुराने हिंदुत्व परिवार के नेताओं के जीवन के बारे में है. वो एक लेखक के रूप में भावुक और ग़ैर निष्पक्ष हैं. उनके लेख में गंभीरता तो है गहराई की कमी है.

चुनावों के नतीजों के बाद जब स्पष्ट हो गया कि वो देश के प्रधानमंत्री बनेंगे तो वो सबसे पहले अपनी माँ से मिलने गए. उनके आलोचकों ने कहा वो किसी भी रिश्तेदार से क़रीब नहीं हैं और वो माँ से मिलने का दिखावा कर रहे हैं. लेकिन वरिष्ठ पत्रकार आकार पटेल कहते हैं नरेंद्र मोदी ने 2003 में उनसे कहा था कि वो अपनी माँ से काफ़ी क़रीब हैं.

स्टाइल पर ध्यान

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नरेंद्र मोदी सार्वजनिक रूप से सामने आने से पहले से ही अपने कपड़ों और हुलिये पर काफी ध्यान देते थे. वो हमेशा दाढ़ी और बाल ट्रिम करवाते हैं. वो भारतीय लिबास पहनते हैं. सिलाई और कट पर उनकी पूरी नज़र होती है, चाहे वो उनकी आधी आस्तीन का कुर्ता हो या उनका नीले रंग का जैकेट. आकार पटेल उन्हें क़रीब से जानते हैं और उनके मुताबिक़ नरेंद्र मोदी कपड़ों के स्टाइल पर काफी ध्यान देते हैं.

मोदी पर है पाकिस्तान की नज़र

नरेंद्र मोदी का बचपन गुजरात के वडनगर में गुज़रा जहाँ उनके साथियों और पड़ोसियों में मुसलमान बच्चे भी शामिल थे. उनके भाई प्रह्लाद मोदी के अनुसार दोनों भाई मुस्लिम बच्चों के साथ अक्सर खेला करते थे.

आमतौर से नरेंद्र मोदी को मुस्लिम समाज में मुसलमान विरोधी समझा जाता है लेकिन उनके एक क़रीबी मुस्लिम व्यापारी साथी ज़फर सरेशवाला के अनुसार मोदी मुस्लिम विरोधी नहीं हैं. उनका दावा है कि अब तक वो 13 मुस्लिम युवकों को जेल से छुड़वा चुके हैं.

जब कभी मासूम लोगों को पकड़ा गया और उनके परिवार वालों मोदी जी को चिट्ठी लिखी अक्सर उन्होंने ख़ुद से दिलचस्पी लेकर मुसलमानों को जेलों से रिहा करवाया.

इस्लाम की जानकारी

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मोदी का इस्लाम के बारे में अध्ययन और जानकारी एक औसत भारतीय मुसलमान से अधिक है. जफर सरेशवाला कहते हैं, "उन्होंने हमारे पैग़म्बर के जीवन पर किताब पढ़ी है और हदीस भी पढ़ी है". वो आगे कहते हैं, "एक बार मुसलमानों का एक प्रतिनिधिमंडल मोदी जी से मिलने गया. उन्होंने एक हदीस पढ़कर सुनाई जिसमें कहा गया था कि इल्म हासिल करना हर मुसलमान का कर्तव्य है. वो बोले ये पहला मज़हब है जिसने पढ़ाई को आवश्यक बनाया लेकिन आज मुसलमानों में पढ़ाई की कमी क्यों है?"

शपथ के बाद मोदी और शरीफ की दोतरफ़ा बातचीत

नरेंद्र मोदी बॉलीवुड के हीरो सलमान ख़ान के साथ पतंग उड़ाते देखे गए. उनके भाई के अनुसार बचपन से ही मोदी पतंग उड़ाने के बहुत शौक़ीन थे.

उनके बारे में कहा जाता है कि वो बचपन में संत और साधुओं से काफी प्रभावित थे. स्कूल के बाद दो साल तक वो देश के विभिन्न प्रांतों में साधुओं के साथ घूमते रहे और गुजरात वापस लौट कर आरएसएस के सेवक बन गए.

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वापस लौट कर उन्होंने अपने भाई के साथ मिलकर चाय की दुकान खोली और कई सालों तक चाय बेचते रहे. चाय की दुकान से उनके घर का ख़र्च चलता था क्योंकि उस समय उनका परिवार काफी ग़रीब थी.

समलैंगिकता और चीन

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समलैंगिकता के मामले में भारत के नए प्रधानमंत्री की राय क्या है? ये किसी को नहीं मालूम. हाँ उनकी पार्टी क्या सोचती है इसका पता सभी को है. भाजपा अकेली ऐसी पार्टी थी जिसने सुप्रीम कोर्ट के हाल के उस फ़ैसले का समर्थन किया था जिस में अदालत ने दिल्ली हाई कोर्ट के फैसले को रद्द कर दिया था और समलैंगिकता एक बार फिर से अप्राकृतिक कर्म क़रार दिया गया.

मुस्लिम बहुल देश कैसे परख रहे हैं मोदी को ?

मोदी चीन से काफी प्रभावित हैं और वो गुजरात के मुख्यमंत्री की हैसियत से चार बार चीन की यात्रा कर चुके हैं. चीन ने गुजरात में काफी निवेश किया है. अब चीन को आशा है कि मोदी के शासनकाल में दोनों देशों के बीच व्यापारिक संबंध और फलेंगे-फूलेंगे.

मोदी हमेशा अपनी सुबह प्रार्थना से शुरू करते हैं और उसके बाद लाज़मी तौर पर ईमेल चेक करते हैं. अपने बारे में लेख पढ़ते हैं. इसके अलावा वो अख़बार भी पढ़ते हैं.

गुजरात के मुख्यमंत्री के तौर पर वो अधिकतर फ़ैसले ख़ुद से लेते थे और तब मंत्रिमंडल को इसकी जानकारी देते थे. वो हमेशा कुछ गिने-चुने प्रशासनिक अधिकारियों पर ही भरोसा करते हैं.

कहा जाता है कि उनका कोई क़रीबी साथी नहीं है. वो एकांत में काम करना पसंद करते हैं.

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