भूत सा भटक रहा, बाबाओं को झुठलाने वाला

सनल एडामारुकु इमेज कॉपीरइट sanal

बाबाओं और धर्मगुरूओं के 'चमत्कारों' के सत्य को उजागर करने वाले सनल एडामारकू को ईशनिंदा के आरोपों के बाद देश छोड़कर भागना पड़ा है. फ़िलहाल वो फिनलैंड में स्वनिर्वासन का जीवन व्यतीत कर रहे हैं और उन्हें डर है कि भारत आने पर उनकी जान को ख़तरा हो सकता है.

उन्होंने बार बार 'चमत्कार' के सच को लोगों के सामने लाया है.

एक लाइव टीवी प्रसारण के दौरान जब एक हिंदू तांत्रिक ने दावा किया कि वो अपनी तांत्रिक विद्या से किसी को भी मार सकते हैं तो सनल ने उनकी चुनौती वहीं पर स्वीकार कर ली.

दोनों ही चैनल में मेहमान के तौर पर कार्यक्रम में हिस्सा ले रहे थे.

चैनल ने सारे कार्यक्रम रद्द कर दिए और तांत्रिक ने मंत्रोच्चारण का जाप शुरु कर दिया. लेकिन काफ़ी देर होने के बाद भी कुछ नहीं हुआ. और इस बीच सनल वहां शांत मुद्रा में बैठे रहे, चेहरे पर दूर-दूर तक मौत के डर का कोई भाव नहीं था.

दाभोलकर की हत्या के बाद एंटी ब्लैक मैजिक अध्यादेश पारित होगा

भारतीय तर्कशास्त्र एसोसिएशन के अध्यक्ष के तौर पर सनल एडामारकू उस समूह का हिस्सा रहे जो देश भर में घूम घूमकर काला जादू और अंधविश्वास के पीछे की सच्चाई को उजागर करने की कोशिश करता रहा है.

तर्कों के आधार पर ढोंगियों को बेनक़ाब करने के इस काम में ज़ाहिर हैं उनके विरोधियों की भी कमी नहीं थी.

1990 के दशक में वो गांव-गांव में घूमकर उन चमत्कारों - जैसे चुटकी से राख निकालना और हवा से सोने के ज़ेवर प्रकट करवा देना, का भांडाफोड़ करते रहे जिसने कुछ बाबाओं को भारी शोहरत और शिष्यों की भीड़ दिलवाई थी.

वे मानते हैं कि भारत में टीवी के आने के बाद से इस तरह के अंधविश्वासों और झूठी करामातों को फैलाने का काम और आसान हो गया है. लेकिन सनल ने भी टीवी का इस्तेमाल अपने तर्कों को पेश करने के लिए किया.

इमेज कॉपीरइट sanal

वे कहते हैं, " टीवी पर आने से पहले मैं गांव गांव घूमकर अपनी बातों को लोगों तक पहुंचाने का काम करता था. लेकिन कुछ लोगों को मेरा टीवी के ज़रिए लाखों लोगों तक पहुंचना बिलकुल पसंद नहीं."

अंधविश्वास

साल 2012 में मुंबई के बाहरी इलाके में एक चमत्कार हुआ. ईसा मसीह के पैर के अंगूठे से अचानक पानी निकलने लगा. इस घटना के बारे में बात फैलने के बाद मुंबई के बाहरी इलाके में रह रहे हज़ारों कैथोलिक अनुयायी यीशू के दर्शन करने दौड़े चले आए. कुछ लोगों ने तो वो पानी भी पिया.

इस घटना की जांच के दौरान उन्हें एक बार लगा कि उनकी ज़िंदगी ख़तरे में है.

अपने एक इंजीनियर दोस्त के साथ वे उस जगह पहुंचे और ईसा के अंगूठे से पानी निकलने वाली जगह की जांच करने लगे. वे पानी के स्त्रोत की खोज करने लगे.

काले जादू के ख़िलाफ़ लड़ने वालों के समर्थन में प्रदर्शन

प्रतिमा की दीवार पर हल्की नमी थी. नमी का कारण पास के एक शौचालय से जुड़े एक नाले के पाईप से निकलने वाला पानी था. जो धीरे-धीरे प्रतिमा से रिस कर बाहर आ रहा था.

सनल कहते हैं, "ये एक फूटी हुई पाईप का चमत्कार था."

इस परिणाम के सबूतों को सनल ने एक लाईव टीवी पर कैथोलिक लॉबी समूह के लोगों के सामने पेश किया. पर स्टुडियो के बाहर बहुत सारे लोग लाठी डंडा लिए खड़े थे. सनल मानते हैं कि वे भाड़े के लोग थे.

चर्च का अपमान

इमेज कॉपीरइट AFP
Image caption पाकिस्तान में ईशनिंदा के लिए हुई गिरफ़्तारी का विरोध करते प्रदर्शनकारी

लेकिन यह बात तब और गंभीर हो गई जब कुछ कैथोलिक लोगों के लिए घटना के पीछे के सच से बड़ा सवाल चर्च की अवमानना बन गया. उनका मानना था कि सनल ने चर्च पर आरोप लगाया है कि वे इस घटना से पैसे बना रहे हैं. साथ ही वे ये मानते थे कि सनल चर्च पर अंधविश्वास फैलाने और यहां तक की मदर टेरेसा संत के होने पर भी सवाल उठा रहे है.

उसी हफ़्ते मुंबई पुलिस ने कैथोलिक समूहों की तरफ़ से सनल के ख़िलाफ ईशनिंदा की तीन शिकायतें दर्ज की. ये सारी शिकायतें आज़ादी के पहले से चली आ रही धारा 295ए के तरह दर्ज की गईं. इसके अंतर्गत किसी धर्म के ख़िलाफ़ जानबुझकर और दुर्भावना फ़ैलाने वाले भाषणों या बयानों को क़ानूनी तौर पर अपराध की श्रेणी में रखा गया है.

इसमें तीन साल तक की सज़ा और जुर्माने का प्रावधान है.

कुछ लोगों का मानना है कि ये धारा बोलने की आज़ादी के ख़िलाफ़ इस्तेमाल की जाती है.

साल 1927 में कुछ जगहों पर फैली अशांति को रोकने की ग़र्ज़ से लाया गया था.

सनल एडामारकू कहते हैं, "इस धारा के अंतर्गत पुलिस मुझे बिना किसी गिरफ़्तारी वारंट के लंबे समय तक के लिए जेल में डाल सकती है. लेकिन मैं ये ख़तरा मोल नहीं लेना चाहता था."

सनल ने अपने लिए अंतरिम ज़मानत की अपील की लेकिन उसे ख़ारिज कर दिया गया.

इसके साथ ही सनल का कहना है कि उन्हें पुलिस की तरफ़ से धमकी भरे फ़ोन आ रहे थे जिसमें पुलिस इनपर माफ़ी मांगने के लिए दबाव बना रही थी. पुलिसवालों ने सनल को धमकी दी कि बिना माफ़ी मांगे केस वापस नहीं लिया जाएगा.

भारत से फिनलैंड

इमेज कॉपीरइट BBC World Service

इन सारी घटनाओं से परेशान सनल एक यूरोप के लेक्चर में भाग लेने के लिए समय से पहले ही भारत से चले गए. फिनलैंड वो पहला देश था जहां सनल को वीज़ा मिला .

वहां के कुछ मूल निवासी उनके दोस्ते भी थे जो इनकी मदद करने को तैयार थे.

दो साल पहले एक लंबी भरी दुपहरी में सनल, हेलसेंकी पहुंचे थे. सोचा था कि कुछ हफ़्तों में मामला शांत हो जाने पर वे भारत वापस लौट जाएंगें.

लेकिन ऐसा हुआ नहीं. पुलिस में शिकायत करने वाले कैथोलिक सेकुलर फोरम (सीएसएफ) आज भी अपनी शिकायत पर अड़ा हुआ है.

दो साल बीत गए हैं सनल गुस्से और ग़म की भावना लिए एकांत जीवन जी रहे हैं. एक विदेशी ज़मीन पर ख़ुद को जीवित रखने की कोशिश में लगे हुए.

पिछले साल फिनलैंड में सनल के सबसे क़रीबी दोस्त, फिनलैंड ह्यूमिनिस्ट सोसाईटी के संस्थापक पैक्का एलो की मौत के बाद सनल और भी अकेले हो गए हैं.

वे कहते हैं, "मुझे बहुत सारे लोगों की याद आती है. सबसे ज़्यादा दुख मुझे इसी का है कि मैं उनसे मिल नहीं सकता."

उनके भारत छोड़ने के बाद से उनकी बेटी ने एक बेटी को जन्म दिया है और उनकी मां की मृत्यु हो गई है.

दोस्त की मौत

इमेज कॉपीरइट Getty

हर सुबह स्काईपे पर भारतीय तर्कशास्त्र एसोसिएशन की मीटिंग लेना और धर्म गुरूओं द्वारा फैलाए जा रहे अंधविश्वास के किस्सों को इक्ट्ठा करना उनके महत्वपूर्ण कामों में शामिल हैं.

मुंबई के कार्डीनल ओस्वाल्ड ग्रेसिएस ने सनल और कैथोलिक समूहों के बीच सुलह कराने की कोशिश की. लेकिन सुलह की शर्त थी सनल का कैथोलिक समूह से माफ़ी मांगना.

लेकिन सनल ने इससे साफ़ इंकार कर दिया. उनका कहना है कि ऐसा करना उनकी बोलने की आज़ादी के ख़िलाफ़ है.

वे कहते हैं, "मैं नहीं मानता कि मैंने कुछ ग़लत कहा है."

उनका कहना है, "मुझे लगता है कि मेरे पास भी अपनी बात को कहने का अधिकार है. मैं बैठकर बात करने और किसी तरह की सुधार के लिए भी तैयार हूं. लेकिन मैं किसी की धौंस सहने को तैयार नहीं. ना ही किसी और के कहने पर मैं अपने विचारों को बदल सकता हूं."

दाभोलकर के क़त्ल पर पुणे में ग़म, गुस्सा

क़ानूनी जानकारों का कहना है कि भारत वापसी सनल के लिए ख़तरनाक हो सकता है.

उनके दोस्त नरेन्द्र दाभोलकर के साथ जो हुआ उसे देख सनल का डर और भी बढ़ गया है.

नरेन्द्र दाभोलकर अंधविश्वाल और काला जादू के ख़िलाफ़ हमेशा से आवाज़ बुलंद करते आए. लेकिन एक दिन कुछ लोगों ने गोली मारकर उनकी हत्या कर दी.

सनल कहते हैं, "दाभोलकर ने मुझसे कहा था कि मुंबई आने पर वे और उनके दोस्त मुझे सुरक्षा देंगे. मैं तो उनके इस प्रस्ताव पर विचार भी कर रहा था."

दाभोलकर से बातचीत के चौथे ही दिन उनकी ह्त्या हो गई.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर फ़ॉलो भी कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार