नक्सलियों की नसबंदी तो पलटी, ज़िंदगी पलटेगी

  • 18 जून 2014

महाराष्ट्र के गडचिरोली इलाका नक्सलप्रभावित रहा है. नक्सलियों का प्रभाव स्थानीय लड़के-लड़कियों पर भी पड़ा. समाज के पिछले और दबे कुचले इलाके के अपने लोगों के उत्थान के लिए इन युवाओं ने कुछ साल हथियार उठा लिए थे.

अलग अलग इलाकों में ऐसे युवाओं का समूह दलम कहलाता था. गडचिरोली के दुर्गम जंगलों में पैदल घूमते हुए, पुलिस का मुक़ाबला करते हुए, उनकी गोलियों से बचते हुए इन युवाओं की ज़िंदगी आगे बढ़ रही थी.

आपस में थोड़ा समय व्यतीत करने के दौरान दलम के अंदर पुरुष तथा स्त्री साथियों से धीरे धीरे जान पहचान हुई और कुछ को आपस में प्यार भी हो गया. जिन्हें प्यार हुआ उन्होंने ज़िंदगी भर साथ निभाने की कसमें खाईं और शादी के बंधन तक में बंध गए.

लेकिन मनचाहा जीवन साथी मिलाने और शादी करने का आनंद ज़्यादा दिन तक टिक न सका.नक्सल मुहिम के कायदोंके मुताबिक, शादीशुदा पुरुषों पर नसबंदी का ऑपरेशन कर दिया गया ताकि वह बच्चों को जन्म न दे सके और न ही परिवार बढ़ा सके.

बेहतर ज़िंदगी का भरोसा

कुछ महीने इस हालत में गुज़रने के बाद एक बेहतर ज़िंदगी के लिए इन लोगों ने पुलिस को सरेंडर करने का फ़ैसला लिया. इन लोगों के पुनर्वसन के लिए महाराष्ट्र सरकार ने 29 अगस्त 2005 को एक आदेश जारी कर गडचिरोली में पुनर्वसन कक्ष शुरू किया जिसे सितम्बर 2013 में सरेंडर सेल में तब्दील किया गया.

इस सेल के माध्यम से अब तक कई नक्सलियों का पुनर्वसन किया जा चुका है.

इस सेल के प्रभारी पुलिस उपनिरीक्षक दिगंबर पाटील ने बीबीसी से बातचीत में बताया, "सन 2013 के बाद जिन शादीशुदा नक्सलियों ने सरेंडर किया है, उनमें से 14 लोगों का ऑपरेशन कर उन्हें फिर से पिता बनाने के काबिल बना दिया गया है, और बाक़ी के ऑपरेशन जल्द ही किए जाएंगे. यह सारे ऑपरेशन गडचिरोली के सरकारी अस्पताल में किए गए."

इनमें से दो दंपत्ति, चंदा और तलवारे तथा लालसू और क्रांति, जल्द ही माता-पिता बनाने वाले थे. मगर बदकिस्मती से पिता बनाने की खुशी और सुख अनुभव करने से पहले ही लालसू की किसी अनजान बीमारी से पिछले महीने मौत हो गई.

सरकार कर रही है मदद

पाटील ने बताया, ''इस वक्त करीब 200 नक्सली सरेंडर सेल में है और इनके पुनर्वसन के लिए हाल ही में गडचिरोली जिला प्रशासन ने शहर के नजदीक साढ़े पाँच हेक्टर जमीन दी है, जहाँ इन्हें बसाया जाएगा."

नक्सली पुनर्वसन योजना के अंतर्गत इन लोगों के मतदाता कार्ड, राशन कार्ड और आधार कार्ड बनाए गए है और पुलिस इनके रोजगार के लिए भी कोशिश कर रही है.

गडचिरोली के पुलिस अधीक्षक सुवेज़ हक़ ने बताया, "जिला प्रशासन द्वारा दिए गए जमीन पर हम इनके लिए घरकुल तथा इंदिरा आवास योजना के अंतर्गत मकान बनवा रहे हैं. उनके लिए रोजगार मुहैया कराने के लिए हमने उन्हें सिलाई मशीनें भी दी हैं, इसके अलावा उनके नौकरी के लिए भी कोशिशें की जा रही हैं."

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