यूपी के राज्यपाल बीएल जोशी का इस्तीफ़ा

उत्तर प्रदेश के पूर्व राज्यपाल बीएल जोशी और नरेंद्र मोदी इमेज कॉपीरइट UPGovernor

केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सरकार आने के बाद राजभवनों में बदलाव की आहट सुनाई देने लगी है. इस सिलसिले में उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी ने मंगलवार को इस्तीफा दे दिया.

सरकार ने जोशी के इस्तीफे को मंजूर कर अगले फैसले तक उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी को उत्तर प्रदेश की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी है.

राष्ट्रपति भवन ने एक विज्ञप्ति जारी कर बताया, "राष्ट्रपति ने उत्तर प्रदेश के राज्यपाल बीएल जोशी का इस्तीफा स्वीकार कर लिया है और उत्तराखंड के राज्यपाल अजीज कुरैशी को उत्तर प्रदेश के राज्यपाल का अतिरिक्त प्रभार सौंपा है."

उत्तर प्रदेश में नए राज्यपाल की नियुक्ति जल्द की जाएगी.

जोशी के इस्तीफ़े के अलावा मीडिया में कुछ और राज्यों के राज्यपालों के इस्तीफ़े की चर्चा गर्म रही. इसके बाद कर्नाटक के गवर्नर हंसराज भारद्वाज ने इस बात से इनकार किया कि वह इस्तीफ़ा देने नहीं जा रहे हैं. इसी तरह असम के राज्यपाल जेबी पटनायक ने भी इस्तीफ़े की ख़बरों से इनकार किया.

भारद्वाज ने कहा, "मेरी पारी जब ख़त्म होने जा रही है तो ये मेरा कर्तव्य है कि मैं राष्ट्रपति से मिलूँ. मैंने प्रधानमंत्री से मिलने का समय माँगा है."

वहीं पटनायक का कहना था, "अगर इस्तीफ़े की अफ़वाह है तो मैं उसका कुछ नहीं कर सकता."

बदलाव के इरादे

समाचार एजेंसी पीटीआई के मुताबिक जोशी के इस्तीफे के साथ ही नरेंद्र मोदी सरकार ने यूपीए शासन के दौरान नियुक्त किए गए राज्यपालों को हटाने की प्रक्रिया शुरू कर दी है.

पीटीआई के मुताबिक नई सरकार राज्यपालों के अलावा राष्ट्रीय आपदा प्रबंधन प्राधिकरण जैसी संस्थाओं में सदस्य के तौर पर की गई राजनीतिक नियुक्तियों को भी रद्द करने की तैयारी कर रही है.

बीएल जोशी इससे पहले पुलिस सेवा में अधिकारी रह चुके हैं और नेहरू-गांधी परिवार के साथ अपनी नज़दीकियों के लिए जाने जाते हैं.

सरकार के इस कदम को कांग्रेस और माकपा ने असंवैधानिक और अनैतिक बताया है, जबकि भाजपा नेताओं का कहना है कि इस फैसले में कुछ भी गलत नहीं है.

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