उत्तर प्रदेश भाजपा नेताओं की नई मुश्किल

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उत्तर प्रदेश के भारतीय जनता पार्टी के नेताओं का क़द धीरे-धीरे छोटा होता जा रहा है.

इसकी शुरुआत लोकसभा चुनाव से हुई जब प्रदेश में पार्टी की कमान नरेंद्र मोदी के विश्वासपात्र अमित शाह को सौंपी गई.

शाह ने राजस्थान से आए राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ के प्रचारक सुनील बंसल की मदद से पार्टी को ऐसी सफलता दिलाई कि बहुजन समाज पार्टी, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस तीनों ही हतप्रभ हैं.

लोकसभा चुनाव में प्रदेश के दिग्गज माने जाने वाले नेता मुरली मनोहर जोशी, लालजी टंडन, कलराज मिश्रा और अन्य की नाराज़गी की ज़्यादा परवाह किए बगैर अमित शाह और बंसल की जोड़ी ने प्रदेश के दो मज़बूत क्षेत्रीय दलों को क़रारी शिकस्त देकर बड़े नेताओं को ख़ामोश होने पर विवश कर दिया.

शाह के बाद भाजपा ने अब सुनील बंसल को प्रदेश में एक बड़ी ज़िम्मेदारी देकर भेजा है. कम उम्र के बंसल को उत्तर प्रदेश में संगठन मंत्री नियुक्त किया गया है. प्रदेश विधानसभा के लिए 2017 में होने वाले चुनाव के मद्देनज़र बंसल को संगठन का दायित्व सौंपा गया है.

नेताओं का क़द

भाजपा के युवा नेता अमित पुरी यह मानने को तैयार नहीं हैं कि पार्टी के प्रदेश के नेताओं का क़द छोटा हो रहा है.

अमित शाह के संदर्भ में वे कहते हैं, "प्रभारी चाहे किसी भी दल का हो हमेशा बाहर का ही होता है. जहां तक संगठन मंत्री (सुनील बंसल) के पद की बात है तो भाजपा में जो प्रक्रिया है उसके तहत कोई भी प्रचारक, वो चाहे किसी भी प्रदेश का हो, कहीं भी भेजा जा सकता है."

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Image caption उत्तर प्रदेश के अग्रणी नेता कलराज मिश्रा को वर्तमान सरकार में केंद्रीय मंत्री बनाया गया है.

यह पूछने पर कि इससे यह लगता है कि प्रदेश भाजपा में कोई विशिष्ट चेहरा नहीं है, अमित पुरी ने कहा कि वो अलग बात है.

यदि देखा जाए तो प्रदेश भाजपा में कल्याण सिंह, लालजी टंडन, कलराज मिश्रा, मुरली मनोहर जोशी और ओम प्रकाश सिंह जैसे बड़े नेताओं का नाम लोगों के दिलो-दिमाग़ में धीरे-धीरे धूमिल हो जाएगा.

नेताओं की खींचतान

एक दशक से ज़्यादा समय तक कल्याण सिंह, लालजी टंडन, कलराज मिश्रा और राजनाथ सिंह पार्टी को अलग-अलग दिशाओं में खींचते रहे. परिणाम यह रहा कि प्रदेश की राजनीति में भाजपा हाशिए पर आ गई.

इन बड़े नेताओं की जगह कौन लेगा यह अभी पता नहीं. अब यह बंसल के हाथ में होगा कि किस मोहरे को कहाँ बिठाएँ.

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किन्तु एक बात साफ़ है कि बंसल को संगठन का कार्य सौंपकर भाजपा ने विपक्षी दलों को 2017 के लिए एक चिंताजनक संदेश दिया है. फिलहाल कोई बंसल के लखनऊ आगमन को कोई महत्त्व नहीं देना चाहता है.

17 जून को पदभार ग्रहण करने के बाद बंसल ने कहा कि उनका प्रयास होगा कि ग्रामीण क्षेत्रों में पार्टी की उपस्थिति नज़र आए और बूथ स्तर तक कार्यकर्ता सक्रिय रहें.

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