लापता अमरीकी छात्रा लद्दाख में मृत पाई गई

लद्दाख इमेज कॉपीरइट AP

अमरीका में मैसाचुसेट्स इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी के अधिकारियों के मुताबिक़ एमआईटी की स्नातक की छात्रा जो भारत में एक हफ़्ते से अधिक समय से लापता थी लद्दाख में एक खड्ड में मृत पाई गई है.

रिपोर्ट के मुताबिक़ वह जॉगिंग करते समय फिसल कर पहाड़ से सैकड़ों फुट नीचे खड्डे में गिर गई.

अमरीका की रोड द्वीप की राजधानी प्रोविडेंस की रहने वाली 28 वर्षीय केटलिन गोल्डस्टीन शनिवार को लद्दाख के एक दूरदराज के क्षेत्र में एक रास्ते के नीचे खड्ड में मृत पाई गईं.

14 जून को वह इस क्षेत्र में सुबह दौड़ने गई थीं, तभी से वह लापता थीं. गोल्डस्टीन के माता पिता, जैक गोल्डस्टीन और जॉं प्लोवर अपनी बेटी को खोजने के लिए भारत आए थे.

उन्होंने एमआईटी के अधिकारियों को बताया कि लगता है कि वह किसी चट्टान से फिसल कर गई.

फिसलने से हु्ई मौत

गोल्डस्टीन एक प्रतिस्पर्धी धावक थीं. वह एमआईटी में वास्तुकला की चार साली की डिग्री की छात्रा थी.

वह ऊर्जा और विकास पर स्टूडेंट्स एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट के परिसर में होने वाली एक वर्कशॉप में भाग लेने के लिए सात जून को भारत आई थीं.

वर्कशॉप एमआईटी से जुड़े दलाई लामा सेंटर फॉर एथिक्स एंड ट्रांसफॉर्मेटिव वैल्यूज़ और अबू धाबी के मसदार इंस्टीट्यूट ऑफ़ साइंस एंड टेक्नोलॉजी द्वारा आयोजित किया गया था.

एमआईटी के अधिकारियों ने कहा कि वर्कशॉप ख़त्म होने के बाद उन्हें पास के एक बौद्ध मठ में सौर पैनल स्थापित करने में मदद करने के लिए रुकना था.

एमआईटी के अध्यक्ष एल राफेल रेफ ने कल एमआईटी के सदस्यों को एक ईमेल भेजकर कहा है कि गोल्डस्टीन के लिए कैंपस में प्रार्थना सभा रखी गई है.

रेफ ने लिखा, "वह विकासशील देशों में ऊर्जा की ज़रूरतों के समाधान में पूरी तन्मयता से लगी हुई थी. वह इसकी तलाश में उत्तरी भारत के एक दूरदराज के क्षेत्र में अपने मौत के वक्त भी लगी हुई थी. एक युवा और होनहार शख्सियत का इस तरह जाना एक भयानक नुक़सान है."

जब गोल्डस्टीन गायब हुई तो लद्दाख के स्टूडेंटस ऑफ़ एजुकेशनल एंड कल्चरल मूवमेंट के छात्रों और और प्रशिक्षकों ने उसकी तलाश शुरू की.

छात्रा की खोज में स्थानीय पुलिस, इंटेलिजेंस ब्यूरो, नई दिल्ली स्थित अमरीकी दूतावास, अमरीकी विदेश विभाग और एफबीआई लगी हुई थी. एमआईटी ने मुंबई स्थित एक निजी सुरक्षा फर्म की भी तलाशी अभियान के लिए सेवाएं ली थीं.

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