यूपी के बिजली संकट में इनकी हो रही है चांदी

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इन दिनों जब जून की भीषण गर्मी में तापमान 46-47 डिग्री के आस-पास मंडरा रहा है, उत्तर प्रदेश के लोग बिजली की कटौती से बेहाल हैं.

राज्य के कुछ निवासी तो बिजली की कमी और लंबी कटौती के आदी हो चुके हैं लेकिन बहुत से ऐसे हैं जिनका आक्रोश बिजली विभाग के कर्मचारियों को झेलना पड़ता है.

जो बिजली की आँख-मिचौली से समझौता कर चुके हैं उनके लिए दो उपकरण यानी जनरेटर और इन्वर्टर घरों के लिए अनिवार्य हैं. हर वर्ष इन दोनों उपकरणों की मांग बढ़ती जाती है और इनसे जुड़े लोगों का कारोबार चमक रहा है.

इस वर्ष गर्मी के तीन महीनों में, सिर्फ लखनऊ में ही 500 जनरेटर बिके. पिछले वर्ष की तुलना में यह बिक्री 30 प्रतिशत अधिक थी. यह बड़ी संख्या इस बात का सबूत है कि प्रदेश की राजधानी में भी बिजली का हाल कितना बुरा है.

बढ़ती मांग

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Image caption गर्मी को भगाने के लिए हर कोई अपनी अपनी तरह से कोशिश करता है

जनरेटर बेचने वाली एक दुकान के मालिक पीके गोयल किसी पर्यावरणविद की तरह कहते हैं, "हमें मालूम है कि जनरेटर से कितना नुकसान होता है. लेकिन ख़राब वोल्टेज और अनियमित आपूर्ति, लम्बे समय तक बिजली का गुल हो जाना और रोज़ाना बढ़ते हुए बिजली की दरें हमें जनरेटर इस्तेमाल करने पर मजबूर करते हैं."

गोयल बताते हैं कि घरों में आम तौर पर 3, 5 या 7 केवी का जनरेटर इस्तेमाल होता है. प्रदेश में छोटे जनरेटर हज़ारों की संख्या में बिके हैं.

एक विशेष ब्रांड के इन्वर्टर के डिस्ट्रीब्यूटर मुकेश गुप्ता ने बताया कि 2013 में 10000 इन्वर्टर सप्लाई किए थे. गुप्ता के मुताबिक़ 2014 में इन्वर्टर की मांग गिरी है.

लेकिन स्थानीय इन्वर्टर विक्रेता पुत्तनलाल इस साल हुई इन्वर्टर की बिक्री से उत्साहित हैं. उनका कहना है कि पिछले तीन महीनों में उन्होंने 3000 इन्वर्टर बेचे हैं.

पुत्तनलाल का मानना है कि प्रदेश में बिजली की सप्लाई इतनी अनियमित है कि बहुत जल्दी लगभग सभी घरों में इन्वर्टर पाया जाएगा, "क्योंकि बिजली कब जाएगी और कितनी देर में आएगी किसी को पता नहीं रहता. ऐसे में कम से कम एक पंखा और एक बल्ब से लोगों को कुछ तो राहत मिलती है".

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