आम फ़ार्मेसी की नींद उड़ाई 'अम्मा फार्मेसी' ने

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तमिलनाडु की मुख्यमंत्री जयराम जयललिता ने अम्मा ब्रांड की सब्जी, कैंटीन और नमक के बाद बाजार में अब 'अम्मा दवाइयां' उतारी हैं.

तमिलनाडु में इस वित्तीय वर्ष के दौरान करीब 100 की संख्या में 'अम्मा फार्मेसी' की दुकानें शुरू की जाएंगी. इन दुकानों पर जीवन रक्षक दवाओं सहित अन्य दवाएं 'उचित मूल्य' पर उपलब्ध होंगी.

जयललिता ने तमिलनाडु के सात जिलों में करीब 10 स्टोर्स की शुरुआत की. चेन्नई, कांचीपुरम्, कुदालोर, इरोद, सल्वागंगा में एक-एक और मदुरै, वीरुधंगर तथा सलेम में दो-दो स्टोर खोले गए हैं.

तमिलनाडु के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बीबीसी को बताया, "इन दुकानों में ब्रांडेड दवाइयां उपलब्ध होंगी. यहां जेनेरिक दवाइयां नहीं मिलेंगी."

किसी भी आम फार्मेसी की तुलना में 'अम्मा फार्मेसी' की दवाइयां कितनी सस्ती होंगीं, इसके बारे में उक्त अधिकारी ने कहा, "यह जानकारी मैं नहीं दे सकता. यह तो ट्रेड सीक्रेट है."

लेकिन अम्मा फार्मेसी के खुलने से दवा बेचने वाली नियमित दुकानें संशकित हैं.

आशंकाएं

तमिलनाडु के दवा और औषधि संघ के सचिव एन आनंद कहते हैं, "अम्मा फ़ार्मेसी के आने से हमारे कारोबार पर असर पड़ेगा. इन दुकानों में किस तरह की दवाएं बेची जाएंगी हमें इसका कोई अंदाज़ा नहीं है. हमें बस इतना पता चला है कि वे दवाएं 10 से 20 फ़ीसदी सस्ती होंगी, लेकिन हमें यह सच नहीं लगता."

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क्या संघ को इस तरह की दुकानों के सुझाव पसंद नहीं आए, इसके जवाब में आनंद कहते हैं, "लोगों के भले के लिए हम भी वे दवाएं बेचने को तैयार हैं. लेकिन हम ऐसा तभी करेंगे यदि वे नेशनल फ़ार्मास्युटिकल प्राइसिंग अथॉरिटी (एनपीपीए) के मानदंडों के मुताबिक होंगी."

निजी क्षेत्र

आनंद ने कहा, "एनपीपीए और निर्माता इस बात को सुनिश्चित करते हैं कि हमारी दवा की दुकानों के माध्यम से जो भी दवाएं बेची जाएं उनमें सभी के लिए मार्जिन (अतिरिक्त राशि) शामिल हों. अगर सरकार हमें इस बात का आश्वासन देती है कि हमारा मार्जिन सुरक्षित रहेगा तो हमें भी अम्मा फार्मेसी की तरह अपनी दुकानों से उन्हीं दवाओं को बेचने में कोई दिक्कत नहीं है."

तमिलनाडु सरकार साल 1995-96 में तमिलनाडु चिकित्सा सेवा निगम का गठन करने वाली देश की पहली सरकारों में से एक है.

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यह निगम सुनिश्चित करता है कि एक आपूर्ति श्रृंखला से माध्यम से दवा निर्माताओं से निगम के गोदाम तक दवाएं सीधे पहुंचें.

निगम यह भी तय करता है कि सरकारी अस्पतालों में दवाएं मुफ्त हों न्यूनतम दामों में आपूर्ति की जाएं. साथ ही निगम यह भी सुनिश्चित करता है कि दवाओं की कभी कमी पैदा न हो.

कुछ साल पहले सेवानिवृत्त हुए आर पूरनलिंगम ने निगम को स्थापित करने में मदद की थी. वह कहते हैं, "निगम सार्वजनिक क्षेत्र यानी सरकारी अस्पताल के प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र को दवाओं की आपूर्ति करता है. अम्मा फार्मेसी निजी क्षेत्र को दवाओं की आपूर्ति करेगी. यहां कोई भी उचित मूल्य पर सीधे दुकान से दवाएं खरीद सकता है."

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