कश्मीर: ज़िंदगी-मौत का अखाड़ा बना एक मैदान

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भारत प्रशासित कश्मीर में सेना के एक प्रशिक्षण मैदान को हटाने के लिए मुहिम चल रही है.

बड़गाम ज़िले में तोसा मैदान में सेना के प्रशिक्षण का इलाक़ा है. वहाँ जब एक मोर्टार में धमाका हुआ तो एक सात वर्ष की लड़की की मृत्यु हो गई और उसकी बहन के दोनों पैर उड़ गए.

इस मैदान को 1964 से ही भारतीय सेना को स्थानीय प्रशासन ने पट्टे पर दे दिया था तभी से इसे युद्धाभ्यास के लिए इस्तेमाल किया जाता रहा है.

घटना में मारी गई लड़की के दादा मंज़ूर अहमद का कहना है, ''हम हर तरह के विस्फोट को पहचान सकते हैं. मैं इन बहरा कर देने वली आवाज़ों को सुनते हुए बड़ा हुआ हूं. जब धमाका होता है तो हाथ से चाय की प्याली छूट जाती है.''

वर्ष 1964 में हुए इस पट्टे की मियाद पहले ही अप्रैल में ख़त्म हो चुकी है और ग्रामीण अब इस प्रशिक्षण केंद्र को अन्य कहीं स्थानांतरित किए जाने की मांग कर रहे हैं.

'तोसा मैदान बचाओ फ्रंट' का गठन करने वाले एक स्थानीय व्यक्ति मौलवी मक़बूल कहते हैं, ''उन्हें आबादी से दूर कोई जगह तलाशनी चाहिए. सरकार को इस पट्टे की मियाद नहीं बढ़ानी चाहिए. इस आंदोलन का यही उद्देश्य है.''

मौतें

पिछले पचास सालों में महिलाओं और बच्चों समेत अब तक 150 लोग दुर्घटनावश चलाए गए गोलों और इसी तरह की अन्य घटनाओं से जान गंवा चुके हैं.

हालांकि अधिकारी केवल 63 मौतों की पुष्टि करते हैं. इसी कड़ी में दुर्घटना की शिकार बनी सात वर्षीय सिमरन मुश्ताक़ के जनाज़े में बड़ी संख्या में लोग इकट्ठा हुए.

यहां तक कि जिस स्कूल में सिमरन पढ़ती थीं, उस स्कूल के छात्र और छात्राओं ने भी इकट्ठा होकर पट्टे को बढ़ाने के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया है.

उन्होंने जानलेवा पट्टे को ख़त्म करने की मांग की. बच्चों के हाथों में तख़्तियों पर लिखा था, ''हम खिलौनों के साथ खेलना चाहते हैं, बमों के साथ नहीं.''

मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्लाह ने वादा किया है कि पट्टे के समझौते का नवीनीकरण नहीं किया जाएगा.

इस बीच, अलगाववादी समूहों ने भी 'तोसा मैदान बचाओ फ्रंट' के पीछे अपना ज़ोर लगा दिया है.

मौलवी मक़बूल कहते हैं, ''हम उस हर शख्स के शुक्रगुजार हैं जो हमारा समर्थन करता है. लेकिन हमें तब खुशी होगी जब लोग इसमें जुड़ेंगे. अगर हम इसका राजनीतिकरण करेंगे तो प्रशासन को बहाना मिल जाएगा.''

भारतीय सेना के पूरे कश्मीर में बड़ी संख्या में रक्षा प्रतिष्ठान हैं. सेना ने कई जगहों पर अपने प्रशिक्षण केंद्र बना रखे हैं.

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