पांच बार नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित

होमी जहांगीर भाभआ, अल्बर्ट आइंस्टाइन इमेज कॉपीरइट TIFR

भाभा का एक कुत्ता हुआ करता था. उसके बहुत लंबे कान होते थे जिसे वो क्यूपिड कह कर पुकारते थे और रोज़ उसे सड़क पर घुमाने ले जाते थे.

जैसे ही भाभा घर लौटते थे वो कुत्ता दौड़कर उनके पास आ कर उनके पैर चाटता था. जब भाभा का एक विमान दुर्घटना में निधन हुआ तो उस कुत्ते ने पूरे एक महीने तक कुछ नहीं खाया.

रोज़ डॉक्टर आ कर उसे दवाई देते थे लेकिन वो कुत्ता सिर्फ़ पानी पिया करता था और खाने को हाथ नहीं लगाता था. वो ज़्यादा दिनों तक जीवित नहीं रह पाया.

भाभा भी इंसान थे. हर इंसान पूरी तरह परफ़ेक्ट नहीं होता. भाभा भी इसके अपवाद नहीं थे. उनकी सिर्फ़ एक कमी थी कि वो वक़्त के पाबंद नहीं थे.

नोबेल के लिए पांच नामांकन

इंदिरा चौधरी कहतीं हैं, "हर इंसान में कुछ अच्छे गुण होते हैं तो कुछ बुरे. बहुत लोग बताते हैं कि उन्हें समय का कोई ध्यान नहीं रहता था. जो लोग उनसे मिलने का अप्वॉयमेंट लेते थे वो इंतज़ार करते रहते थे. यहाँ तक कि अंतरराष्ट्रीय परमाणु एजेंसी, वियना में वह कभी-कभी बैठकों में बहुत देर से आते थे."

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"उन लोगों ने इसका इलाज ये निकाला था कि वह मीटिंग से आधा घंटा पहले ही उसके होने की घोषणा करते थे ताकि भाभा के देर से आने का बहाना न मिल पाए."

भाभा को पाँच बार भौतिकी के नोबेल पुरस्कार के लिए नामांकित किया गया. भाभा के जीवन की कहानी आधुनिक भारत के निर्माण की कहानी भी है.

उनको श्रद्धांजलि देते हुए जेआर डी टाटा ने कहा था, "होमी भाभा उन तीन महान हस्तियों में से एक हैं जिन्हें मुझे इस दुनिया में जानने का सौभाग्य मिला है. इनमें से एक थे जवाहरलाल नेहरू, दूसरे थे महात्मा गाँधी और तीसरे थे होमी भाभा."

"होमी न सिर्फ़ एक महान गणितज्ञ और वैज्ञानिक थे बल्कि एक महान इंजीनियर, निर्माता और उद्यानकर्मी भी थे. इसके अलावा वो एक कलाकार भी थे. वास्तव में जितने भी लोगों को मैंने जाना है और उनमें ये दो लोग भी शामिल हैं जिनका मैंने ज़िक्र किया है, उनमें से होमी अकेले शख़्स हैं... जिन्हें "संपूर्ण इंसान' कहा जा सकता है."

(भारत के लिएनार्डो विंची थे होमी भाभा....पढ़िए पहली कड़ी)

(होमी भाभा: जवाहरलाल नेहरू के 'भाई'...पढ़िए दूसरी कड़ी)

(साठ साल पहले पेड़ों का ट्रांसप्लांट....पढ़िए तीसरी कड़ी)

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