भारतीय नर्सों की वापसी और सरकार की चुप्पी

  • 5 जुलाई 2014
केरल के मुख्यमंत्री ओमन चांडी Image copyright GOVT OF KERALA

46 भारतीय नर्सों के इराक़ से रिहा होकर सुरक्षित भारत पहुंचने के बाद कई सवाल उठ रहे हैं. जिनमें सबसे अहम यह कि आईएसआईएस चरमपंथियों ने भारतीय नर्सों को अपनी क़ैद से रिहा कर भारत क्यों भेजा?

नर्सों की रिहाई कैसे संभव हुई, इस बारे में भारतीय विदेश मंत्रालय ने कुछ भी बताने से इनकार कर दिया है.

यहां तक कि केरल के मुख्यमंत्री ओमान चांडी भी इस विषय पर कुछ बोलना नहीं चाहते. उनके अनुसार ''यह राष्ट्रहित से जुड़ा मसला है.’’

मुख्यमंत्री ओमान चांडी ने बीबीसी हिंदी को बताया कि पिछले तीन दिन से उनकी बातचीत बग़दाद के भारतीय दूतावास अधिकारियों के साथ, विदेश मंत्रालय अधिकारियों और भारत की विदेश मंत्री सुषमा स्वराज के साथ चल रही थी.

उन्होंने कहा, ''मैं इतना ज़रूर कहना चाहूंगा कि मुझे सबका पूरा सहयोग मिला. सुषमा स्वराज के प्रयासों के लिए मैं उनका अभिनंदन करता हूं.’’

कर्ज़ की माफ़ी?

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केरल के मुख्यमंत्री चांडी से जब ये पूछा गया कि क्या विदेश मंत्रालय और भारतीय दूतावास के साथ बातचीत में केरल के कारोबारियों को भी शामिल किया गया था, तो उन्होंने बताया कि वे ऐसी किसी जानकारी के बारे में चर्चा नहीं करना चाहते.

इराक़ में फंसी 46 नर्सों के सुरक्षित भारत लौटने से चांडी बेहद खुश हैं.

उन्होंने कहा, ''अब तक हमारा पहला एजेंडा उनकी सुरक्षित वापसी थी.’’

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तो क्या नर्सों ने शिक्षा और भर्ती के लिए जो कर्ज़ ले रखा है, केरल सरकार उसे माफ़ करेगी?

''वे सुरक्षित लौट आई हैं. इस मसले पर हम अब विचार-विमर्श करेंगे.’’

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