भारत नहीं, चीन-ब्राज़ील कैरफ़ोर की पसंद

बीजिंग, चीन में कैरफ़ोर स्टोर

फ्रांसीसी खुदरा कंपनी, कैरफ़ोर, इसी साल सितंबर के अंत में भारतीय बाज़ार से निकल रहा है. कैरफ़ोर ने लगभग चार साल पहले देश में अपना पहला स्टोर खोला था.

इस वक़्त कैरफ़ोर के भारत में पांच कैश एंड कैरी थोक स्टोर हैं यानी ऐसे स्टोर जहां नक़द देकर थोक में सामान ख़रीदा जा सकता है.

कैरफ़ोर दुनिया की सबसे बड़ी खुदरा कंपनियों में से एक है.

कंपनी के मुख्य कार्यकारी जॉर्जेस प्लासाट के तीन-वर्षीय बहाली कार्यक्रम के तहत कंपनी पिछले कुछ समय से सिंगापुर, मलेशिया और ग्रीस जैसे बाज़ारों से निकली है जहां उसे उम्मीद से कम कामयाबी मिली है.

कंपनी कह चुकी है कि वो यूरोप, चीन और ब्राज़ील जैसे मुख्य बाज़ारों पर ध्यान देना चाहती है.

निवेश के लिए चीन-अमरीका बेहतर

सशर्त मंज़ूरी

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Image caption अब तक केवल एक विदेशी कंपनी, ब्रिटेन की टेस्को, ने ही भारत में स्टोर खोलने का फ़ैसला किया है.

भारत ने साल 2012 में मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र को विदेशी कंपनियों के लिए सशर्त खोला था.

इनमें मूलभूत ढांचे में निवेश और स्थानीय उद्यमों से सामान ख़रीदने की शर्त शामिल हैं. इसके अलावा विदेशी कंपनियों को स्टोर खोलने देने की अंतिम मंज़ूरी का फ़ैसला राज्य सरकारों पर छोड़ा गया है.

कई विश्लेषकों का कहना है कि इन शर्तों ने इस क्षेत्र में बहुत सी विदेशी कंपनियों को निवेश करने से रोका है.

अक्तूबर 2013 में खुदरा बाज़ार क्षेत्र की दुनिया की सबसे बड़ी कंपनी वाल-मार्ट ने भारत की कंपनी भारती एंटरप्राइज़ेज़ के संग अपना साझा उपक्रम ख़त्म कर दिया था.

अब तक केवल ब्रितानी कंपनी टेस्को ने ही भारत में अपने स्टोर खोलने का फ़ैसला किया है.

शुरुआत में मल्टी ब्रांड खुदरा क्षेत्र में विदेशी कंपनियों के निवेश के मुद्दे पर भारत में राजनैतिक विरोध भी था.

उस वक़्त भारतीय जनता पार्टी ने इसका ये कहते हुए विरोध किया था कि विदेशी सुपरमार्केट चेनों के आने से स्थानीय खुदरा व्यापारियों और कंपनियों को नुक़सान होगा.

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