डीएसपी ज़िया-उल-हक़ हत्या की फिर से जाँच

डीसपी ज़िया-उल-हक़
Image caption डीसपी ज़िया-उल-हक़ की प्रतापगढ़ के कुंडा में मार्च, 2013 को हत्या कर दी गई थी

लखनऊ स्थित सीबीआई की विशेष अदालत ने प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील में पुलिस उपाधीक्षक ज़िया-उल-हक़ की हत्या में सीबीआई की क्लोज़र रिपोर्ट को ख़ारिज कर दिया है. अदालत ने इस मामले में दोबारा जांच के आदेश दिए.

इस मामले में उत्तर प्रदेश सरकार के खाद्य और रसद मंत्री रघुराज प्रताप सिंह उर्फ़ राजा भैया का भी नाम था.

प्रतापगढ़ की कुंडा तहसील में दो मार्च 2013 को उत्तर प्रदेश के पुलिस उपाधीक्षक ज़िया-उल-हक़ की गोली मारकर हत्या कर दी गई थी.

अगस्त 2013 में सीबीआई ने विशेष अदालत में इस मामले में क्लोज़र रिपोर्ट लगा दी थी. इस रिपोर्ट को ज़िया-उल-हक़ की पत्नी परवीन आज़ाद ने अदालत में चुनौती दी थी .

हत्या

परवीन अब दांतों की डॉक्टर बन चुकी हैं. वह अदालत के फैसले से बेहद खुश हैं.

Image caption सीबीआई ने यूपी के खाद्य और रसद मंत्री राजा भैया को इस मामले में क्लीन चिट दे दी थी

उन्होंने कहा, "मैं इस मामले में न्याय पाने के लिए अपना समय और धन दोनों लगा दूंगी. अगर इस बार भी सीबीआई की जांच में कमी नज़र आई तो मैं उसे फिर से चुनौती दूंगी. ज़रूरत पड़ी तो मैं सुप्रीम कोर्ट तक जाऊंगी."

दो मार्च को कुंडा के बलीपुर में दो गुटों में हुए संघर्ष में ग्राम प्रधान नन्हे यादव और उनके भाई की मौत हो गई थी.

जानकारी मिलने पर जांच के लिए उपाधीक्षक ज़िया-उल-हक़ घटना स्थल पर पहुंचे जहां कुछ लोगों ने उन पर जानलेवा हमला कर दिया.

बुरी तरह ज़ख़्मी ज़िया की अस्पताल जाते समय रास्ते में मृत्यु हो गई थी.

ज़िया की पत्नी ने राजा भैया के खिलाफ अपने पति की हत्या में साज़िश रचने का आरोप लगाते हुए उनके ख़िलाफ़ एफ़आईआर करवा दी थी.

मगर सीबीआई जांच के बाद राजा भैया को क्लीन चिट दे दी गई थी. उस जाँच में पॉलीग्राफ टेस्ट भी शामिल था.

(बीबीसी हिन्दी के एंड्रॉएड ऐप के लिए यहां क्लिक करें. आप हमें फ़ेसबुक और ट्विटर पर भी फ़ॉलो कर सकते हैं.)

संबंधित समाचार