'लंबी छलांग के हौसलों वाला बजट'

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भारतीय जनता पार्टी गठबंधन सरकार का पहला बजट कमोबेश सकारात्मक रहा.

हालांकि सरकार ने रक्षा और बीमा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 26 प्रतिशत से 49 प्रतिशत करने के सिवाय अन्य कोई बड़े नीतिगत फ़ैसले नहीं किए.

सरकार ने आम करदाताओं को थोड़ी राहत ज़रूर दी है. वहीं युवा उद्यमियों को प्रोत्साहित करने पर भी सरकार का ज़ोर रहा.

चुनावी वादे के अनुरूप सरकार ने गंगा की सफ़ाई के लिए भी अच्छा ख़ासा बजट आबंटित किया है.

पढ़िए प्रमोद जोशी का विश्लेषण विस्तार से

मोदी सरकार ने अपने उस कार्यक्रम को आगे बढ़ाया है, जिसकी घोषणा संसद के संयुक्त अधिवेशन में राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी ने की थी.

लगातार दो साल से पाँच फीसदी के नीचे चली गई अर्थव्यवस्था को इस साल पाँच फीसदी के ऊपर जाने का मौका मिलने जा रहा है.

वित्त मंत्री का यह बजट भाषण सामान्य भाषणों से ज्यादा लंबा था और इसमें सपनों की बातें हैं.

सरकार को अभी यह बताना होगा कि वह राजस्व प्राप्तियों के लक्ष्यों को किस प्रकार हासिल करेगी.

उससे बड़ी चुनौती है कि वह जीडीपी की तुलना में राजकोषीय घाटे को 4.1 प्रतिशत के भीतर कैसे रखेगी, जिसे वह खुद मुश्किल काम मानती है.

अंदेशों की अनदेखी

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एक रोज़ पहले देश के आर्थिक सर्वेक्षण ने जो आशंका पैदा की थी, उसकी छाया इस बजट में दिखाई नहीं दी. वित्त मंत्री ने प्रत्यक्ष और परोक्ष करों में राहत दी है.

छह हफ़्ते पुरानी यह सरकार अपने विचारों में साफ दिखाई देती है. महत्वपूर्ण होगा कि यह साल सरकार किस तरह बिताती है. फिलहाल सरकार का इरादा लम्बी छलांग लगाने का है.

वित्त मंत्री ने आयकर छूट की सीमा में 50 हजार की वृद्धि करके और धारा 80 सी के तहत निवेश की सीमा एक लाख से बढ़ाकर डेढ़ लाख करके वेतनभोगियों को राहत दी है.

हालांकि वे ज़्यादा बड़ी राहत की उम्मीद कर रहे थे, पर फ़िलहाल अर्थव्यवस्था इसकी अनुमति नहीं देती.

पूँजी निवेश के लिए लाल कालीन

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Image caption रक्षा क्षेत्र में एफडीआई की सीमा 26 प्रतिशत से 49 प्रतिशत कर दी गई है.

इस बजट की मूल दिशा आर्थिक संवृद्धि की दर को बढ़ाकर 7 से 8 फीसदी तक ले जाना है. दूसरा बड़ा लक्ष्य है राजकोषीय घाटे को कम करना.

सरकारी खर्चों को कम किए बगैर घाटे को कम करने की जिम्मेदारी वित्त मंत्री पर है, जिसके लिए उन्होंने व्यय प्रबंधन आयोग बनाने की घोषणा की है.

इसी तरह रेट्रो टैक्स (पिछली तारीख से टैक्स लागू करना) प्रबंधन के जटिल काम को निपटाने के लिए भी उन्होंने संस्थागत व्यवस्थाएं की हैं. मूलतः यह कदम पूँजी निवेश की राह में आ रही बाधाओं के लिए है.

मोदी सरकार ने रक्षा क्षेत्र और बीमा में प्रत्यक्ष पूँजी निवेश की सीमा 49 फीसदी तक लाकर उदारीकरण के कार्यक्रम को एक और चरण तक पहुँचा दिया है.

हालांकि उम्मीद थी कि वे रक्षा क्षेत्र में शत प्रतिशत की छूट देंगे. या कम से कम 51 फीसदी करेंगे. तभी हमें हाई एंड तकनीक मिल पाएगी.

उन्होंने वस्तु एवं सेवा कर (जीएसटी) को समयबद्ध करने की कोशिश की है. उन्होंने कहा कि जीएसटी इस कारोबारी साल के आखिर तक लागू हो सकता है. इसी तरह डायरेक्ट टैक्स कोड पर विमर्श को बढ़ाने का वादा भी उन्होंने किया है.

इंफ्रास्ट्रक्चर को पटरी पर लाने की तैयारी

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इस बजट का उद्देश्य देश में पूँजी निवेश के माहौल को सुधारना और फिलहाल इंफ्रास्ट्रक्चर के काम को फिर से पटरी पर लाना है.

उन्होंने स्पेशल इकॉनॉमिक जोन को फिर से सक्रिय करने और 8500 किलोमीटर के हाइवे निर्माण का संकल्प लेकर अर्थव्यवस्था की गाड़ी को पटरियों पर लाने की कोशिश की है. इसके अलावा 16 नए बंदरगाहों का विकास करने की घोषणा भी वित्त मंत्री ने की है.

इलाहाबाद से हल्दिया तक जलमार्ग का विकास करने और खनन तथा कोयला उद्योग में जान डालने की कोशिशें भी अर्थव्यवस्था को सहारा देंगी. गांवों में ब्रॉडबैंड कनेक्टिविटी सरकार की व्यापक डिजिटाइज़ेशन की प्रक्रिया का हिस्सा है.

देश में 100 नए स्मार्ट शहरों के विकास की घोषणा और 20 लाख से ज्यादा आबादी वाले शहरों में मेट्रो चलाने की योजना भी इंफ्रास्ट्रक्चर निर्माण के विचार से महत्वपूर्ण साबित होगी.

ग्रामीण क्षेत्र के लिए मोदी सरकार गुजरात के अपने प्रयोगों को दोहराना चाहती है. इसमें खासतौर से प्रधानमंत्री सिंचाई योजना उल्लेखनीय है.

कृषि क्षेत्र के लिए 8 लाख करोड़ के कर्ज का महत्वाकांक्षी लक्ष्य वित्तमंत्री ने स्थापित किया है. वे किसानों को सात फीसदी की दर से कर्ज देने का भरोसा दिला रहे हैं.

एम्स और आईआईटी क्रांति

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देश के चार राज्यों में नए एम्स स्थापित करने और हर साल नए राज्यों में एम्स खोलने और 12 नए मेडिकल कॉलेज खोलने की घोषणा वित्त मंत्री ने की है.

इसके अलावा वे पाँच नए आईआईटी और पाँच नए आईआईएम खोलने का कार्यक्रम लेकर आए हैं.

उनका यह भी कहना है कि हम हर साल राज्यों में नए एम्स खोलते जाएंगे और अंततः प्रत्येक राज्य में एम्स होंगे.

बजट को देखने के कई नजरिए होते हैं. मसलन बाज़ार यानी पूँजी बाज़ार की प्रतिक्रिया क्या है? उद्योग-व्यापार मंडल क्या सोचते हैं?

वेतन-भोगी वर्ग की राय क्या है? सामान्य उपभोक्ता का नज़रिया क्या है? गृहणियों के लिए इस बजट में क्या है? या फिर नितांत गरीबों पर इसका क्या असर होगा वगैरह.

कोई भी बजट किसी एक तबके के लिए अच्छा और दूसरे के लिए ख़राब हो सकता है.

राजनीतिक दृष्टि से बजट

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राजनीतिक दृष्टि से इसीलिए बजट के असर को विभिन्न तबकों पर देखने की जरूरत होती है. किसी भी बजट में आलोचना की पर्याप्त सम्भावनाएं होती हैं.

पर बजट में भ्रम दिखाई नहीं पड़ने चाहिए. जो भी हो साफ और निर्भीक हो. इस मामले में यह बजट आर्थिक उदारीकरण की गति को तेज करने के प्रति संकल्प-बद्ध लगता है.

दो राय नहीं कि इसमें तमाम कार्यक्रम कांग्रेस सरकार ने भी सोचे थे, पर उसने इन्हें लागू करने में संकोच किया.

इस बजट पर देश के शेयर बाजार की प्रतिक्रिया शुरू में संकोच भरी थी.

वित्त मंत्री का बजट भाषण शुरू होते वक्त सेंसेक्स 25500 के ऊपर था, जो आधा घंटे बाद 25120 के आस-पास आ गया.

लेकिन जब प्रत्यक्ष कर और अप्रत्यक्ष करों की व्यवस्था वे बता रहे थे, सेंसेक्स 25500 के ऊपर चला गया. मोटे तौर पर यह बजट देश के कारोबारियों के मनोनुकूल है. पर इसमें भविष्य के भारत की महत्वाकांक्षाएं छिपीं हैं.

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