बंगलौर: 'बच्चों को स्कूल नहीं भेजेंगे'

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बंगलौर में एक स्कूल में बच्ची से बलात्कार के बाद अभिभावकों ने घटना के विरोध में अपने बच्चों को उस स्कूल में तब तक न भेजने का फ़ैसला किया है जब तक कि वे सुरक्षित महसूस नहीं करते.

अभिभावकों ने ये फ़ैसला स्कूल के चेयरमैन के 'असंतोषजनक’ जवाब के बाद लिया है.

गुरुवार को सैकड़ों अभिभावकों ने स्कूल प्रबंधन के ख़िलाफ़ प्रदर्शन किया था.

एक अभिभावक अनिता मखारिया ने बीबीसी हिंदी से कहा, ''हमने स्कूल प्रबंधन को बता दिया है कि हमें अपने बच्चों को स्कूल भेजना तब तक सुरक्षित नहीं लगता जब तक कि वे बच्चों की सुरक्षा को लेकर हमारी मांगों को लिखित में नहीं मान लेते.’’

स्कूल के चेयरमैन रुस्तम केरावाला ने सैकड़ों अभिभावकों से कहा था कि घटना को लेकर उन्हें खेद है और स्कूल 'प्रशासन को पूरा सहयोग दे रहा है. दोषियों को सज़ा मिलेगी.’

अभियुक्तों की पहचान नहीं

चौथी कक्षा में पढ़ने वाले एक बच्चे के पिता विवेक शर्मा ने कहा, "स्कूल प्रबंधन ने इस पूरे मामले को बेहद ख़राब ढंग से निपटाया है."

बच्ची से दो जुलाई को कथित रूप से एक सुरक्षाकर्मी और जिम इंस्ट्रक्टर ने बलात्कार किया था.

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर कहा, "अभिभावकों को 11 जुलाई को ही लगा कि ये मामला बलात्कार का है. आधिकारिक रूप से अब तक स्कूल ने अभिभावकों को नहीं बताया है कि बच्ची के साथ क्या हुआ."

हालांकि पुलिस अब तक अभियुक्तों की पहचान नहीं कर सकी है.

'पहले चोरी का मामला बताया'

बंगलौर के अतिरिक्त पुलिस आयुक्त (क़ानून व्यवस्था) कमल पंत ने कहा, "हमें बेहद ध्यान से काम करना है. हम बच्ची को और परेशान नहीं कर सकते."

पुलिस का कहना है कि उसने अभियुक्तों की एक शिनाख्त परेड की है. स्कूल में कई जिम इंस्ट्रक्टर हैं इसलिए दूसरी शिनाख्त परेड जल्द होगी.

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अपनी दोनों बच्चियों को इसी स्कूल में पढ़ा रहे मयंक कुमार कहते हैं, ''शुरुआत से ही स्कूल प्रशासन इससे इनकार करता रहा. पहले जब पुलिस स्कूल पहुंची तो उन्होंने कहा कि ये चोरी का मामला है. फिर हमें अख़बारों से पता चला कि ये बलात्कार का मामला है.’’

इलाके के एक नागरिक संगठन व्हाइटफ़ील्ड राइज़िंग के सदस्य इस मामले को लेकर चिंतित हैं.

व्हाइटफ़ील्ड राइज़िंग की नित्या रामकृष्णन कहती हैं, ''प्रबंधन कह रहा है कि घटना स्कूल परिसर के बाहर हुई. सवाल ये है कि बच्ची को अकेली बाहर क्यों जाने दिया गया.’’

वकील केवी धनंजय कहते हैं, ''अगर ये साफ़ होता है कि स्कूल ने लापरवाही बरती तो अभिभावक स्कूल पर मुकदमा कर सकते हैं.’’

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