डॉक्टरों की कमी से इलाज को तरसते गांव

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सवा अरब की आबादी और सिर्फ़ नौ लाख अठारह हज़ार डॉक्टर. ये हाल है भारत के स्वास्थ्य क्षेत्र का. भारत के गांव डॉक्टरों की कमी से जूझ रहे हैं और डॉक्टर शहर छोड़कर जाना नहीं चाहते.

भारत में कैंसर जैसी बीमारियों के मरीज़ों की संख्या में तेज़ी से बढ़ोतरी हो रही है. हालांकि राहत की बात ये है कि शिशु मृत्यु दर में कमी देखी गई है. ये कहना है भारत के स्वास्थ्य मंत्रालय का.

पढ़िए सलमान रावी की पूरी रिपोर्ट

भारत सरकार के मुताबिक देश में चार लाख डॉक्टरों की और ज़रूरत है ताकि दूर दराज़ के गांवों के लोग बुनियादी चिकित्सा सुविधा से महरूम न रह जाएं.

फिलहाल सबसे ज़्यादा डॉक्टरों की संख्या महाराष्ट्र और तमिलनाडु में है. कहने को तो नौ लाख से ज़्यादा डॉक्टर पंजीकृत हैं लेकिन देश में काम करने वाले डॉक्टरों की संख्या छह से साढ़े छह लाख ही है.

रिपोर्ट के मुताबिक भारत में औसतन 1217 लोगों पर मात्र एक डॉक्टर है.

विदेश चले जाते हैं डॉक्टर

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रिपोर्ट तैयार करने वाली संस्था सेंट्रल ब्यूरो ऑफ़ हेल्थ इंटेलिजेंस की निदेशक डॉक्टर मधु रायकवार ने बीबीसी से बात करते हुए कहा कि वर्ष 2010 से लेकर 2012 के आंकड़ों की समीक्षा की गई.

रायकवार का कहना है कि सरकार ने डॉक्टरों की कमी की बात को गंभीरता से लिया है और इसी वजह से देश में करीब 50 नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना की जा रही है.

इस बीच सरकार ये भी पता कर रही है आखिर वे कौन से कारण है जो पढ़ाई पूरी करने के बाद डॉक्टरों को विदेश खींच ले जाते हैं.

रिपोर्ट के ताज़ा आंकड़े बताते हैं कि आने वाले छह सालों में कैंसर के मरीज़ों में 21 प्रतिशत की वृद्धि होगी और इनमें ज़्यादातर महिलाएं होंगी.

प्रोस्ट्रेट, लिवर और फेफड़ों के कैंसर के रोगियों की संख्या में खास तौर पर वृद्धि होने के संकेत रिपोर्ट में दिए गए हैं. जबकि मुँह के कैंसर के मामलों में 51 प्रतिशत की वृद्धि की बात भी कही गई है.

शहर का मोह

ग़ैर सरकारी संगठन पब्लिक हेल्थ फाउंडेशन ऑफ इंडिया के अरविंद छिब्बर कहते हैं कि आंकड़े और भी ज़्यादा चौंकाने वाले हो सकते हैं. उनका कहना है "अभी तक हमारे पास आंकड़े जुटाने के संसाधन ही नहीं हैं. ख़ास तौर पर ग्रामीण इलाक़ों में आंकड़े जुटाने के संसाधन तो नहीं के बराबर हैं."

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दक्षिणी दिल्ली के डॉक्टर प्रवीण खंडूजा मानते हैं कि आधुनिक जीवनशैली ही बीमारियों के बढ़ने की वजह है.

वो कहते हैं, "लोगों का खानपान बदल रहा है. 'जंक- फ़ूड' खाने का चलन बढ़ता जा रहा है. लोग 12-12 घंटे बैठकर काम करते हैं. लोग व्यायाम भी नहीं कर पाते. जहां तक ग्रामीण इलाक़ों में काम करने का सवाल है, तो ये सच है कि डॉक्टर शहरों में ही रहना चाहते हैं. आप मुझ से पूछें तो मैं दिल्ली में ही पला, बड़ा हुआ. मैं यहां से कहीं और नहीं जाना चाहता."

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