बदायूं रेप: कब्रों से शव निकालना हुआ मुश्किल

उत्तर प्रदेश के बदायूं ज़िले में गंगा के बढ़े हुए जल स्तर ने दो बलात्कार पीड़ितों के शवों का दोबारा पोस्टमॉर्टम के सीबीआई के इरादों पर पानी फेर दिया.

शवों को दफ़नाए जाने के लगभग चालीस दिन बाद सीबीआई का दल दोबारा पोस्टमार्टम के लिए बदायूं में है.

मई में बदायूं के एक गाँवमें दो बहनों की लाशें पेड़ से लटकी पाई गई थीं. उनके शवों पर पहले हुए पोस्टमॉर्टम परीक्षण में उनके साथ बलात्कार किए जाने की पुष्टि हुई थी.

पोस्टमॉर्टम के बाद शवों को 28 मई को गंगा नदी के अटैना घाट के निकट दफ़नाया गया था. जिस जगह शवों को दफ़नाया गया था वहां शनिवार को पांच-छह फ़ीट पानी भर रहा था.

इस मामले पर विवाद बढ़ने के बाद इसकी जांच सीबीआई को सौंप दी गई थी. सीबीआई ने दोनों लड़कियों का दोबारा पोस्टमॉर्टम परीक्षण कराने का फ़ैसला किया.

हालांकि दूसरी ओर आपराधिक मामलों के वकील आईबी सिंह के मुताबिक़ इतने समय के बाद शव परीक्षण का कोई औचित्य नहीं बनता.

औचित्य पर सवाल

सीबीआई और ज़िला प्रशासन ने बालू की बोरियां डलवा कर उस जगह को पानी से बचाने का प्रयास जरूर किया, लेकिन वो सफ़ल नहीं रहा.

इसके बाद पंप लगवाकर पानी निकालने का प्रयास भी जब असफल रहा तो अधिकारियों ने प्रकृति के आगे हार मान ली.

बंदायू के पुलिस अधीक्षक मनीष चौहान ने विफलता को स्वीकार करते हुए कहा कि शवों को निकालने के लिए 20 जुलाई को एक बार फिर से कोशिश होगी.

हालांकि इलाके में लगातार बढ़ते जल स्तर से उस कोशिश पर अभी से आशंका जताई जा रही है.

इस मामले में पीड़िता के परिवार के मुताबिक़ अभियुक्त और पुलिस वाले एक ही जाति के थे, इसलिए पुलिस ने अभियुक्तों की ही मदद की.

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