दिल्ली: क्या चुनाव से डर रही है भाजपा?

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'भारतीय जनता पार्टी दिल्ली में सरकार बनाने के लिए ख़रीद फरोख्त का सहारा ले रही है.'

ये आरोप भाजपा पर आम आदमी पार्टी के अरविंद केजरीवाल ने लगाया लेकिन पार्टी के पूर्व अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने इस आरोप को बेबुनियाद कहकर ख़ारिज कर दिया.

केजरीवाल का आरोप ये था कि भाजपा सरकार बनाने के लिए कुछ कांग्रेस के विधायकों को ख़रीदने की कोशिश कर रही है.

केजरीवाल ने ये भी दावा किया कि भाजपा ने उनकी पार्टी के विधायकों को भी ख़रीदने की कोशिश की लेकिन इसमें सफलता नहीं मिली.

भाजपा ने अब केजरीवाल के ख़िलाफ़ मानहानि का मुक़दमा दायर कर दिया है.

सच क्या है, ये एक अलग मुद्दा है लेकिन सवाल ये है कि भारी बहुमत से आम चुनाव जीतने वाली पार्टी दिल्ली में चुनाव का सामना करने को तैयार क्यों नहीं है?

चुनाव से दूरी

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आम चुनाव में दिल्ली की सभी 7 लोकसभा सीटों पर भारी जीत के बावजूद भाजपा दिल्ली विधानसभा चुनाव से क्यों भागती नज़र आती है?

पिछले साल दिल्ली में भाजपा नेता हर्षवर्धन ने साफ़ कहा था कि उनके पास सरकार बनाने के लिए बहुमत नहीं है इसलिए वो सरकार नहीं बनाएंगे. उन्होंने ये भी कहा था कि वो दोबारा चुनाव के लिए तैयार हैं.

भाजपा के 31 विधायक जीत कर आए थे जिनमें से तीन लोकसभा चुनाव जीत चुके हैं. अब भाजपा के विधायकों की संख्या घटकर 28 हो गई है और उसे अकाली दल के एक विधायक का समर्थन हासिल है. यानी भाजपा को अब सरकार बनाने के लिए 5 विधायक चाहिए.

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सत्ता के गलियारों में ख़बर ये है कि भाजपा ने हाल में एक सर्वेक्षण कराया था जिसमें पता चला कि दिल्ली में अगर अभी विधानसभा का चुनाव हो तो जीत आम आदमी पार्टी की हो सकती है.

ख़ुद भाजपा के अंदर चुनाव दोबारा कराने के मुद्दे पर मतभेद हैं. सूत्रों के अनुसार दिल्ली के 7 सांसदों में से चार दोबारा चुनाव कराने के मूड में नहीं हैं जबकि बाक़ी बचे तीन कहते हैं कि वो दोनों ही स्थिति के लिए तैयार हैं.

महंगाई बड़ी चुनौती

जहां तक बात दिल्ली के विधायकों का सवाल है तो ज़्यादातर विधायक चुनाव का सामना करने के लिए तैयार नहीं हैं.

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मगर आम आदमी पार्टी के नेता आशुतोष का कहना है कि भाजपा के चुनाव से पीछे हटने का कारण ये है कि केंद्र में इसकी 50 दिन पुरानी सरकार महंगाई पर काबू नहीं पा सकी है जिससे लोगों में पार्टी की लोकप्रियता घटी है.

कहा ये जा रहा है कि दिल्ली में सरकार बनाने के दावे का फ़ैसला प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर छोड़ दिया गया है जो ब्राज़ील के दौरे से अभी लौटे हैं.

लेकिन शायद भाजपा नरेंद्र मोदी की रज़ामंदी के बावजूद सरकार बनाने के लिए ज़रूरी 35 विधायकों का समर्थन हासिल न कर सके.

ख़बर ये है कि जिन पांच कांग्रेसी विधायकों को भाजपा अपनी तरफ लुभाने में सफल होती नज़र आ रही थी उसमें इसे कामयाबी अब तक नहीं मिली है. इसका मुख्य कारण है आपसी अविश्वास.

अब सब की निगाहें टिकी हैं दिल्ली के उप राज्यपाल नजीब जंग पर जिन्होंने पांच महीने पहले मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की सिफारिश पर विधानसभा को अब तक भंग नहीं किया.

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