चार साल से बंद पड़ा है लाखों के इस्तेमाल वाला पुल

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बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार का सपना है कि प्रांत के किसी भी हिस्से से लोग पांच घंटे का सफ़र कर पटना पहुंच सकें. इसके लिए उनके कार्यकाल में बड़े पैमाने पर सड़कों और पुलों का निर्माण भी हुआ.

लेकिन उत्तर-पूर्वी बिहार के पांच ज़िलों की लाखों की आबादी के लिए पिछले चार सालों से यह सपना हक़ीक़त नहीं बन पा रहा है.

आख़िर क्यों? जानने के लिए पढ़ें पूरी रिपोर्ट.

राष्ट्रीय राजमार्ग 107 पर स्थित बीपी मंडल सेतु, जिसे लोग डुमरी पुल कहते हैं, अगस्त, 2010 से ही यातायात के लिए बंद पड़ा है.

दशकों की मांग के बाद कोसी इलाक़े को मिला यह पुल निर्माण के लगभग दो दशक बाद ही अनुपयोगी हो गया है.

नदी विशेषज्ञ रणजीव ने बताया, "अभी डुमरीघाट पुल जहां बना है उसके कम से कम दो-ढाई किलोमीटर लंबा होना चाहिए था. लेकिन यह पुल जब डिजाइन हुआ तब एक किलोमीटर का डिजाइन हुआ था."

उन्होंने कहा, "जब पुल बनकर तैयार हुआ तो चार-पांच साल का समय सड़क बनाने में लगा क्योंकि यहां बागमती नदी की धारा कोसी में मिलती है. इस जगह पर बुल बनाए जाने की जगह ज़िंदा नदी को बोल्डरों से बांधकर सड़क बना दी गई. नतीजा यह हुआ कि पुल दो दशक भी नहीं चल पाया."

नहीं मिलती उचित क़ीमत

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यह पुल खगड़िया ज़िले के बेलदौर अंचल में कोसी नदी पर स्थित है. इलाक़े में मक्का की काफ़ी अच्छी खेती होती है.

पिलगरा गांव के किसान नरेंद्र साह बताते हैं कि जहां तक गाडि़यां आती हैं, वहां के किसानों के मुक़ाबले उन्हें प्रति क्विंटल सौ से दो सौ रुपये कम क़ीमत मिलती है.

वहीं डुमरी पुल के पास चाय की दुकान चलाने वाले लालमोहन गोस्वामी रोज़मर्रा की कई परेशानियां का ज़िक्र करते हैं जिनकी वजह पुल का बंद पड़ा होना है.

वे कहते हैं कि इलाक़े के लोगों की दिक़्क़तें तब बहुत बढ़ जाती हैं जब रात-बेरात किसी को इलाज की ज़रुरत पड़ती है.

पेड़ा व्यवसाय प्रभावित

एनएच-31 यानी की आसाम रोड से उतरकर इस पुल तक पहुंचने का रास्ता करुआ मोड़ होकर जाता है. करुआ मोड़ इलाक़े में दूध का भी उत्पादन ख़ूब होता है और पुल बनने के बाद यह मोड़ अपने स्वादिष्ट पेड़ों के लिए भी मशहूर हो गया.

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लेकिन पुल बंदी के असर से पेड़ा व्यापार बहुत मंदा पड़ गया है. एक पेड़ा व्यवसायी हरेकृष्ण गुप्ता बताते हैं कि पहले अगर सौ रुपये का पेड़ा बेचते थे तो अब दस रुपये का भी नहीं बेच पाते.

अस्थाई पुल

अगस्त, 2010 में इस पुल के बंद होने के बाद नवंबर 2011 में इसके समानांतर लोहे का एक अस्थाई पुल बनाया गया है.

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लेकिन इस पुल पर केवल छोटी गाड़ियों का ही आवागमन होता है और बरसात में नदी का जलस्तर बढ़ते ही इसे लगभग तीन महीनों के लिए बंद कर दिया जाता है.

पुल की मरम्मत के सवाल पर राष्ट्रीय उच्चपथ उपभाग के प्रभारी मुख्य अभियंता केदार बैठा यह आश्वस्त करते हैं कि निविदा प्रक्रिया पूरी हो चुकी है और केंद्र से स्वीकृति मिलते ही मरम्मत कार्य शुरु कर दिया जाएगा.

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