'शिक्षा में बेहतर, बाकी क्षेत्रों में फिसड्डी भारत'

भारत में ग़रीबी

संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम (यूएनडीपी) द्वारा टोक्यो में जारी की गयी सालाना रिपोर्ट में कहा गया है कि मानव विकास सूचकांक में भारत 187 देशों में 135 वें स्थान पर है.

रिपोर्ट के अनुसार पहले पांच देशों में नॉर्वे, ऑस्ट्रेलिया, स्विट्ज़रलैंड, हॉलैंड और अमरीका शामिल हैं.

इस सूची के अंतिम पांच देश नाइजर, कांगो, सेंट्रल अफ्रीकन रिपब्लिक, चाड और सिएरा लियोन हैं.

रिपोर्ट के अनुसार, भारत में वर्ष 1990 में औसत उम्र 58.5 साल थी जो 2013 में बढ़कर 66.4 हो गयी है.

वहीँ चीन की औसत उम्र 75 वर्ष से अधिक है. हालांकि वैश्विक औसत आयु 70.8 वर्ष है जबकि विकसित देशों का औसत 80 साल से थोड़ा ज़्यादा है.

'55 फ़ीसदी भारतीय ग़रीब'

शिक्षा के संबंध में इस रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने इस क्षेत्र में भी बेहतर प्रदर्शन किया है.

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भारत में स्कूली पढ़ाई के औसत वर्ष 11.7 हैं जबकि विश्व का औसत 12.2 है.

लेकिन प्रति व्यक्ति आय की अगर बात की जाए तो इसमें काफ़ी निराशा हुई है.

रिपोर्ट के अनुसार भारत में प्रति व्यक्ति सालाना आय 5,150 अमरीकी डॉलर है.

यह औसत ब्रिक्स देशों में सबसे कम है जबकि विश्व की तुलना में यह आधे से भी कम है. विकसित देशों में प्रति व्यक्ति आय 40,046 अमरीकी डॉलर है.

रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत में रहने वाले 55 प्रतिशत लोग हर दृष्टिकोण से ग़रीब हैं जबकि ब्राज़ील में ऐसे लोगों का औसत 3 प्रतिशत, चीन में 6 प्रतिशत और दक्षिण अफ्रीका में 10 प्रतिशत है.

लैंगिक असमानता सूचकांक में भारत का स्थान 152 देशों में 127 वां है जो बांग्लादेश से भी खराब है. बांग्लादेश 115 वें स्थान पर जबकि चीन 37 वें पायदान पर है.

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